-निर्मल कुमार शर्मा
यह दुनिया पहले ही हथियारों के गलाकाट होड़ से बुरी तरह आक्रांत थी ! युद्ध विशेषज्ञों के अनुसार इस धरती पर विध्वंसक हथियारों का इतना ज्यादे जखीरा इकट्ठा हो चुका है कि उससे इस धरती पर उपस्थित मनुष्यप्रजाति सहित इसके समस्त जैवमण्डल को कई बार विनष्ट किया जा सकता है ! प्राचीनकाल के परंपरागत युद्धों में प्रायः तीर,धनुष,गदा,भाला, तलवार आदि साधारण हथियारों से आमने-सामने की लड़ाई होती थी,जिससे सामनेवाले एक-दो व्यक्तियों को शारीरिक क्षति या मौत होती थी,लेकिन अब आधुनिक विज्ञान के युग में आमने-सामने की लड़ाई न होकर ऐसे-ऐसे हथियार विकसित कर लिए गए हैं,जो एक बटन को दबाते ही हजारों किलोमीटर दूर अपने दुश्मन को,जो जमीन के अंदर काफी गहराई में मोटी कंक्रीट के बंकर में भी सुरक्षित मानकर पनाह लिया हो,उसे पलक झपकते ही नस्तनाबूद और मटियामेट कर देने की क्षमता रखते हैं। इन परमाण्विक,हाइड्रोजन,नाइट्रोजन आदि बमों से एक साथ ही लाखों मानवों सहित पशु-पक्षियों और अरबों तरह के माइक्रो व सूक्ष्म जीवों का सार्वभौमिक सत्यानाश,सर्वनाश हो जाता है, आज से लगभग ठीक 76 साल पूर्व इसी अमेरिका के एक सिरफिरे राष्ट्रपति के द्वारा गिराए गये दो परमाणु बमों से हिरोशिमा और नागासाकी में इस धरती की संपूर्ण मानवता कराह उठी थी ! इस दुनिया में ऐसे विकसित और अतिउन्नत हथियार बनानेवाले देशों में अमेरिका और रूस अग्रगण्य हैं,वही अमेरिका पिछले दिनों दुःखद रूप से और आश्चर्यजनक रूप से अफगानिस्तान जैसे छोटे और अत्यंन्त गरीब देश के तालिबान नामक एक छोटे से उग्रवादी संगठन के आक्रामकता से घबराकर अचानक भाग खड़ा हुआ है,लेकिन अपने पीछे खरबों रूपये की कीमत के दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रकार के हथियार उन निहायत असभ्य, बर्बर और क्रूरतम् तालिबानी आतंकवादियों को सौंप गया है,जो अफगानिस्तान में अब तक सैकड़ों कलाकारों,लेखकों,गायकों,कवियों,हास्य कलाकारों, खिलाड़ियों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों आदि को जबरन उनके घरों से घसीट-घसीट कर उनकी निर्ममता और क्रूरता से हत्याएं कर चुके हैं !
अमेरिका द्वारा किए गए उक्त प्रकार की कायरतापूर्ण कृत्य से इस दुनिया के भारत सहित बहुत से शांति और अमन चाहनेवाले देशों के लिए अब सबसे बड़ी यह समस्या उठ खड़ी हुई है कि अब तक अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में छोड़े गए अतिपरिष्कृत व अतिविध्वंसक हथियार अब तक कुछ शिक्षित,समझदार व लोकतांत्रिक पद्धति से चुने गए प्रशासकों के परिरक्षण में कुछ सुरक्षित तो थे,लेकिन ये खरबों रूपयों के अतिपरिष्कृत व अतिविध्वंसक हथियार अब खुलेआम उन उग्रवादियों के अधिकार में आ गए हैं,जो बात-बात में लड़कियों,औरतों तक को,बुरका न पहनने, हाथ या मुँह दिख जाने या खाना ठीक से न पकाने आदि के कथित अपराध में उन्हें सीधे गोली मार दे रहे हैं या उन पर कोड़े बरसा रहे हैं या उनका सिर कलम कर दे रहे हैं या उन्हें जलती भट्ठी में जिन्दा झोंक दे रहे हैं !
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना द्वारा इतने ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर्स तालिबानी आतंकवादियों के लिए छोड़ गये है,जिनकी संख्या इस दुनिया के 85 प्रतिशत देशों के पास तक नहीं हैं ! वे तालिबानी आतंकवादियों को लगभग 85 बिलियन डॉलर मतलब 62.67 खरब रूपयों के मूल्य के बराबर इस दुनिया के सबसे घातक,सबसे श्रेष्ठ हथियार दे गए हैं ! द इंस्पेक्टर जनरल फॉर अफगान रिकंस्ट्रक्टर या सिगर संस्था के द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार अमरिकियों द्वारा अफगानिस्तान में छोड़कर भाग गए हथियारों के जखीरे का एक संक्षिप्त विवरण निम्नवत है, 22174 हमवी बख्तरबंद,634 एम 1117बख्तरबंद,155 मैक्सप्रो बख्तबंद,169 एम 113 टैंक,42000ट्रक्स-एसयूवी,8000 ट्रक,64363 मशीन गन्स,162043 रेडियो वाकी-टाकी,16035 नाइट विजन डिवाइस,358530 असॉल्ट राइफल्स,126295 पिस्तौलें,176आर्टिलरीज,33एमआइ-17 हेलिकॉप्टर्स,33यूएच-60ब्लैकहॉक हेलिकॉप्टर्स,43 एमडी-530 हेलिकॉप्टर्स,4 सी-130 ट्रांसपोर्ट युद्धक विमान,23 ईएमबी 314-ए 29 सुपर टुकनो युद्धक विमान,28 सेसना 208 युद्धक विमान,10 सेसना एसी-208 एयरक्राफ्ट्स ।
भारत सहित अफगानिस्तान के आसपास के देशों को सबसे बड़ी चिंता यह सता रही है कि तालिबानी आतंकवादियों के कब्जे में अचानक व अप्रत्याशित रूप से आए इतने अधिक व परिष्कृत सैनिक हथियारों को तालिबान से देर-सबेर हक्कानी आतंकवादी नेटवर्क को फिर दुनियाभर के अन्य बड़े-बड़े आतंकवादी गुटों तक तथा उन हथियारों को चलाने के लिए पाकिस्तानी सेना के पास भी पहुँचेंगे,तब ये सभी घातक हथियार विशेषरूप से भारत और अन्य पड़ोसी देशों के खिलाफ पाकिस्तान दुरूपयोग कर सकता है ! तब की भयावह स्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती ! -निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद





