श्रमिक जनता संघ के तरफ से मेधा पाटकर ने रखी बात
* सेंचुरी टेक्सटाइल का मनजीत ग्लोबल, मंजीत कॉटन के साथ विक्रय और रजिस्ट्री के नामांतरण पर श्रमिक जनता संघ के सदस्य और स्थानीय नागरिकों ने 87 की संख्या में आपत्ति लगाई थी, जिस पर 31 अगस्त को तहसीलदार न्यायालय कसरावद में जोरदार बहस हुई।
श्रमिक जनता संघ के सभी आपत्ति कर्ता उपस्थित थे। श्रमिक जनता संघ के और से मेधा पाटकर ने बहुत ही जबरदस्त और तर्कसंगत तरीके से बात रखी तथा संजय चौहान, राजकुमार दुबे, सत्येंद्र यादव, राजेश खेते ने भी अपनी बात रखी । सेंचुरी और मनजीत के बीच विक्रय की रजिस्ट्री में जिन गलत तथ्यों का सहारा लिया गया था, उन तथ्यों को जब एक एक करके उजागर किया जाने लगा तो मनजीत ग्लोबल के वकील के पास कोई जवाब नहीं मिल रहा था।
सेंचुरी और मनजीत के बीच विक्रय के रजिस्ट्री में जिन गलत तथ्यों का सहारा लिया गया था, उसमें व्यावसायिक जमीन को कृषि भूमि बताया गया है। सभी भूमि नेशनल हाईवे ए बी रोड के किनारे स्थित है लेकिन अधिकांश भूमि सत्राटी-भोइन्दा मार्ग पर दिखाया गया है। जमीन का मूल्यांकन लगभग 100 करोड़ कम दिखाया गया है, जिससे स्टांप ड्यूटी की चोरी साबित हो रहा है और स्टांप ड्यूटी की चोरी सरकार के तिजोरी में चोरी माना जाता है। और भी बहुत सारे तथ्यों को उजागर करते हुए तहसीलदार से निवेदन किया गया कि रजिस्ट्री का नामांतरण रोके। क्योंकि रजिस्ट्री में यदि झूठ का सहारा लिया लिया गया है तो तहसीलदार महोदय के पास उस रजिस्ट्री का नामांतरण रोकने का पूरा अधिकार है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार यदि कोई दस्तावेज सही स्टांप ड्यूटी किए बिना रजिस्ट्री की गई हो तो उसकी आगे की प्रक्रिया प्रतिबद्ध करने अर्थात नामांतरण रोकने का अधिकार रेवेन्यू अधिकारी को है। यह बात भी तहसीलदार न्यायालय में रखी गई।श्रमिकों ने कहा कि स्टांप ड्यूटी का भुगतान कम किया गया है, इस पर मनजीत कंपनी के एडवोकेट गुप्ता जी ने कहां की सेंचुरी के मजदूरों का कोई मालिकाना हक नहीं है इसलिए सेंचुरी के मजदूरों को आपत्ति लगाने का कोई अधिकार नहीं है । इस बात का मेधा पाटकर जी ने करारा जवाब दिया। जबकि हम बता दें कि यही मजदूर 4 साल पहले वेयर इट ग्लोबल के साथ विक्रय पर आपत्ति लगाकर उस विक्रय को ट्रिब्यूनल कोर्ट और हाई कोर्ट में खारिज करा चुके हैं। राजकुमार दुबे 9109157188






