गरीबों बेरोजगारों को टुकड़े नहीं , रोजगार दे सरकार : सुशीला मिश्रा
रीवा . जीवन उपयोगी वस्तुओं के दामों में मनमानी वृद्धि को लेकर नारी चेतना मंच ने विरोध प्रकट किया है । संगठन की अध्यक्ष सुशीला मिश्रा ने कहा है कि बाजार पूरी तरह अनियंत्रित हो गया है । ऐसा लगता है कि सरकार नाम की कोई चीज नहीं है । यह भारी विडंबना है कि देश को चुने हुए जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि बड़ी निजी कंपनियां और बड़े पूंजीपति चला रहे हैं । इस हालात के चलते सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है । कोरोना काल में बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार से वंचित होना पड़ा है । यह काफी आक्रोश का विषय है कि सरकार ने आपदा को भी भुनाने का मौका दिया है । इसके चलते कोरोना काल में बड़े पैमाने पर पूंजीवादी लूट हुई है और बड़े लोगों ने काफी पैसे कमाए हैं वहीं आम आदमी बेहाल बेरोजगार हुआ है । फिलहाल नए रोजगार के अवसर कमोबेश खत्म है । ऐसी स्थिति में आम आदमी की क्रय शक्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है ।
नारी चेतना मंच की नेत्री श्रीमती मिश्रा ने कहा कि ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है , जिसके दामों पर नियंत्रण हो । आम आदमी के इस्तेमाल होने वाली हर वस्तु के दाम बढ़ गए हैं । रसोई गैस के दाम पिछले एक साल में ₹616 77 पैसे से बढ़कर ₹914 97 पैसे हो गए हैं । पेट्रोल डीजल के दामों में भी बहुत वृद्धि हो चुकी है । रसोई में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ गरम मसाला घी तेल आदि के दामों में भी काफी वृद्धि हो चुकी है । भारी महंगाई के चलते गरीबी में गीला आटा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है । खाद्य पदार्थों के नापतौल में गड़बड़ी बरकरार है , मिलावट का कारोबार भी बंद नहीं कराया जा सका है । नापतौल की कमी के चलते उपभोक्ता लूटा जा रहा है वहीं मिलावट के चलते उसका स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है । गैर बराबरी बढ़ती जा रही है । गरीबों को गुलामों की तरह चुग्गा दिया जा रहा है । अधिकार की बात करना अपराध बना दिया गया है ।
नारी चेतना मंच के अध्यक्ष सुशीला मिश्रा ने कहा है कि सरकार के पास झूठे वादों के अलावा लोगों को देने के लिए कुछ भी नहीं है । सरकार लोगों को धर्म और जाति के आधार पर लड़ाकर फूट डालो और शासन करो की नीति पर चल रही है । विधायक सांसदों मंत्रियों को अनाप-शनाप सुविधाएं और भारी भरकम वेतन दिया जा रहा है । गरीब लोगों के लिए उन्हें भिखारी वाली स्थिति में छोड़ दिया गया है । गरीबों को मिलने वाली सुविधाएं ऊंट के मुंह में जीरा जैसी हैं लेकिन उसका प्रचार इस तरह किया जाता है जैसे कि उन्हें मालामाल बना दिया गया है । कोई गरीब अपने बच्चे को अच्छी तरह खिलाने पिलाने पढ़ाने की स्थिति में नहीं है । देखने को मिल रहा है इस समय सरकार की सारी योजनाएं ऐन केन प्रकारेण वोट लेने के लिए बनी हुई है , लोक कल्याण के लिए नहीं । सरकार यदि लोगों का भला करना चाहती है तो लोगों को जीने के लिए सबसे पहले काम की व्यवस्था करे , न कि रेवड़ी बांटे . सरकार गरीबों को टुकड़े नहीं , उन्हें रोजगार दे .
साल भर में रसोई गैस दामों में ₹300 की वृद्धि महालूट





