शशिकांत गुप्ते
एक कहावत है, “अधजल गगरी छलकत जाए“ जिसका ज्ञान अधूरा होता है,वह पूर्ण ज्ञानी होने का ढोंग रचता है।गगरी जल से आधी भरी हो उसमें से पानी छलकता है।इनदिनों हर क्षेत्र यही सब हो रहा है।
अधजल गगरी छलक रही है और सर्वत्र कीचड़ फैला रही है।किसी विशेष नस्ल के फूल को फलने फूलने के लिए कीचड़ ही रास आता है।जब सर्वत्र कीचड़ ही कीचड़ फैलता है तो,यह कहावत भी चरितार्थ होती है।
अंधा बगुला कीचड़ खाय
मजबूरी में इंसान को बहुत कुछ सहन करना पड़ता है.अंधा बगुला मछली नहीं पकड़ सकता है, इसलिए बेचारा कीचड़ खाने पर मजबूर हो जाता है।
इस कहावत से यकायक बगुला भगत की कहानी याद आ गई।
एक गाँव की पहाडी पर एक साधु रहा करता था।उस गाँव के लोग अति धार्मिक और आस्थावान लोग थे।लोगों को पता चला कि साधु के पास सभी समस्याओं का समाधान है।लोग साधु से मिलने के लिए जाने लगे।
असल में ऐसा कुछ नहीं था।वह एक ढोंगी था।इस बारे में गाँव के लोगों को पता नहीं था।जब साधु के पास लोग आने लगे और उसे भोजन, राशन और पैसे देने लगे तो वह समझ गया उसकी कमाई का यही साधन है ।
गाँव का समझदार आदमी समझ गया कि, यह साधु नहीं कोई बगुला भगत है।
समझदार आदमी ने साधु के पास जाकर देखा,साधु लोगों को समस्या दूर करने का मार्ग बता रहा है।
एक दिन उस आदमी ने साधु से कहा की महाराज,मैं आपको गलत समझता था,आप तो इस जग के महान पुरुष हो। उस आदमी ने साधु से पूछ लिया,आप किस समय ध्यान करने बैठतें हो?
साधु ने लोगों के सामने ही उस आदमी से कहा, मैं सुबह चार बजे ध्यान करने के लिए बैंठ जाता हूँ,और मुझे उस समय यह पता चल जाता है, कौन मेरे बारे मै क्या सोच रहा है।यह सुनकर उस आदमी को यकिन हो गया कि, साधु पूरा ढोंगी है।
उस समझदार आदमी ने लोगों को समझाया और कहा, जब साधु ध्यान करता है।तब उस समय जो भी उसके पास जाकर ध्यान करता है,तो उसे परमात्मा का दर्शन होता है। साथ ही उसके सभी दुःख भी दूर हो जातें हैं।
गाँव के सभी लोग वहाँ पहुंचे तो लोगों ने देखा की साधू तो गहरी नींद में सो रहा है।तब वे लोग साधु के जागने का इंतजार करने लगे। साधु नींद से जागा।अपने सामने लोगों को देखकर साधु हैरान हो गया। तब लोगों ने साधु से पूछा आप तो कहते हो कि, मैं चार बजे से ध्यान करता हूँ?साधु अपनी सफाई देने लगा।
तब वह समझदार आदमी लोगों से कहने लगा कि, यह साधु तो ढोंगी है। यह लोगों से धन बटौर लेता है, और इसे अपनी पत्नी को देकर आ जाता है।उस आदमी की बात सुनकर साधु घबरा गया, और वहाँ से भागने लगा था।गाँव के लोग साधु की अच्छी कुटाई कर दी।
इस कहानी में एक खास बात ध्यान में आई,वह साधु शादी शुदा है और उसकी पत्नी भी है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





