राकेश श्रीवास्तव
गुरु की महत्ता का शिष्य के उत्थान में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहता है।वह उसे तराशता है,निखारता है और संवारता है।भारत में गुरु शिष्य परंपरा की बड़ी परंपरा है।धर्मशास्त्रों के अनुसार महर्षि सांदीपनि,गुरु वशिष्ठ,परशुराम,विश्वामित्र, द्रोणाचार्य जैसे यशस्वी गुरु हुए हैं जिनसे हमारे देवी-देवताओं और राजा महाराजाओं की संतानों ने शिक्षा प्राप्त की और पराक्रम की गाथाओं को जन्म दिया।वहीं रामानंद और समर्थ रामदास जैसे गुरुओं ने कबीर और शिवाजी को मार्ग दिखाया।पश्चिम मे सुकरात प्लेटो अरस्तु गुरु शिष्य परंपरा के अद्भुत उदाहरण हैं।सुकरात को जहर पीना पड़ा फिर भी शिष्य प्लेटो और उनके शिष्य अरस्तू उनके विचारों को ही आगे बढ़ाते रहें।इन्होंने ही पश्चिमी संस्कृति का दार्शनिक आधार तैयार किया। भारतीय अस्मिता के सबसे बड़े गुरु तो योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं। उनका जीवन के हर क्षेत्र में ज्ञान वास्तव में आज भी मनसा बचना कर्मणा के लिए ज्ञान के द्वार खोलता है।यह मनुष्य के ऊपर है कि वह उस सागर मे कितना डूबता उतराता है और अपने लिए किन मोतियों को चुन पाता है। आधुनिक भारत मे योगी रामकृष्ण परमहंस को बालक नरेंद्र को स्वामी विवेकानंद बनाने का यश प्राप्त है।स्वामी विवेकानंद ने सच्चे अर्थों मे आध्यात्मिक थे।गुरू रामकृष्ण परमहंस की स्मृति में धर्मों की सद्भावना,मानवता,शांति और समानता को बढ़ाने के उद्देश्य से रामकृष्ण मिशन की स्थापना की ओर इसको जन जन तक पहुंचाया। महात्मा गांधी ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति अनेक स्रोतों से प्राप्त की।गीता को तो वो अपनी मां कहते हैं जो उनको विभिन्न कठिनाइयों मे मार्ग दिखाती है।महावीर स्वामी और गौतमबुद्ध की शांति और अहिंसा के सिद्धांत तो उनके जीवन काआवश्यक अंग थे।गांधी जी गुरू श्रीमद रामचंद्र जी से आध्यात्मिक शंकाओं का समाधान प्राप्त करते हैं।गांधी स्वयं न केवल हिंदुस्तान वरन संपूर्ण विश्व के करोड़ों लोगों के अदृश्य गुरु थे।आज ना रहते हुए भी मार्गदर्शन करते हैं। उनके संघर्ष, जुनून और आचरण से अनौपचारिक दीक्षा प्राप्त कर चंपारण मे डॉ राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद,नौमी प्रसाद,मंजरूल हक आदि द्वारा अपनी सुख सुविधाओं और कैरियर को छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़ने का जो सिलसिला चला वह सरदार पटेल,मोतीलाल नेहर,सीएफ एंड्रयूज,मीरा बेन,पंडित नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस,आचार्य कृपलानी,आचार्य नरेंद्र देव,सरोजिनी नायडू, महादेव देसाई,जयप्रकाश नारायण,डॉक्टर लोहिया जैसे लोगों पर ही नहीं रुका वरन हिन्दुस्तान के कोने कोने मे जनसाधारण के बीच फैल गया।उनकी शिक्षा का सबसे बड़ा सूत्र था “मेरा जीवन ही मेरा संदेश है” आज शिक्षक दिवस पर अपने सभी गुरूजनों को नमन।
राकेश श्रीवास्तव





