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कांग्रेस की कलह क्या नए सिंधियाओं को जन्म दे रही…..?

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सुसंस्कृति परिहार
लगता है कि पंजाब की कलह के बाद हुए परिवर्तनों का सिलसिला अब थमेगा नहीं ।इसका असर छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी जाएगा। पंजाब में लंबे अर्से से चल रही खींचतान के,  लोकतांत्रिक समाधान की कांग्रेस हाईकमान ने पुरजोर कोशिशें की़ पर दिल जब कहीं और आ जाए तो सब नक्कारखाने में तूती की आवाज हो जाता है। अमरिंदर का इतिहास कोई अच्छा नहीं कहा जा सकता है वे हमेशा अपने साथियों से उलझते रहे हैं,चाहे पंजाब प्रदेश के पूर्व कांग्रेस अध्यक्षों से उनका विवाद हो जब वे इस पद पर भी रहे तब भी उनके विवादों का सिलसिला जारी रहा है। जाहिर है लगभग साढ़े नौ साल का उनका कार्यकाल झमेलों के साथ ही रहा है । नवजोत सिद्धू को जब से यहां पार्टी अध्यक्ष बनाया गया तो उन्होंने पार्टीगत नीतियों की अवज्ञा की।सिद्धू चूंकि बड़बोले हैं उन्होंने बिना दुराव छिपाव के तमाम बातें सिर्फ उजागर ही नहीं की बल्कि हाईकमान तक अपने साथियों सहित उपस्थित होकर पहुंचाई।दो बार सुलह की कोशिशें कर आलाकमान ने अमरिंदर को मौका दिया लेकिन बात नहीं बनी।आज तीसरी बार विधायक दल की बैठक आहूत की गई थी पर इससे पहले अमरिंदर को शायद अंदेशा हो गया था कि उन्हें अब की बार हटाया जा रहा है इसलिए वे बैठक के पूर्व ही अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप आए।अपनी इज़्ज़त बचाई और प्रस्तावित बैठक को दूसरा ही रुख़ अख़्तियार करना पड़ा। हालांकि अमरिंदर कह रहे हैं कि वे तीसरी बार विधायक दल की बैठक बुलाए जाने से अपने को अपमानित महसूस कर रहे थे। इसलिए सुबह ही सोनिया गांधी को अपने इस्तीफे की खबर दे चुके थे।

Punjab Congress Dispute: Secret of highcommands neglect and silence of  Rahul Gandhi on Punjab Congress strife jagran special


अब सवाल यह उठने लगा है कि कांग्रेस की इस कलह का असर अन्य राज्यों को भी क्या ले डूबेगा और नये सिंधियाओं  के  कारण ये राज्य भाजपा की गोदी में बैठ जायेंगे। मध्यप्रदेश की बात बिल्कुल अलग थी सिंधिया के साथ बड़ी संख्या में मंत्रियों और विधायकों ने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा का थामा था वैसी स्थिति किसी कांग्रेसी प्रदेश में नहीं है। भाजपा की तरह मुख्यमंत्री बदलाव की बात ज़रूर नज़र आ रही है।जैसा कि सूत्ररूप बता रहे हैं कि इस बार हाईकमान ने सख्त निर्णय ले लिया था इसलिए अमरेंद्र ने इस्तीफा देकर फुर्ती दिखाई । कांग्रेस में इस निर्णय का स्वागत हुआ है और अपेक्षा की गई है कि तरह की सख्ती हाईकमान को बरतनी ही होगी। जब बातचीत और समझौते को कमज़ोरी माना  जाने लगा हो।प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू के सलाहकार मोहम्मद मुस्तफा ने ट्वीट कर लिखा, “2017 में पंजाब ने हमें 80 विधायक दिए थे, लेकिन यह दु:खद है कि कांग्रेस पार्टी एक अच्छा मुख्यमंत्री पंजाब को नहीं दे पाई. पंजाब के दुख और दर्द को समझते हुए साढ़े चार साल बाद अब समय आ गया है कि मुख्यमंत्री का चेहरा बदला जाए.” अमरिंदर के दबाव के कारण सिद्धू के एक सलाहकार मलविंदर सिंह माली को इस्‍तीफा देना पड़ा था। उसके बाद दोनों में तल्‍खी और बढ़ गई थी। सिद्धू ने एक सभा में यहां तक कह डाला था कि उन्‍हें निर्णय लेने की आजादी नहीं मिली तो वह ‘ईंट से ईंट’ बजा देंगे। 
बहरहाल, अमरिंदर का बहुत दिनों से अधिक तनाव ग्रस्त होने के पीछे सिर्फ सिद्धू ही नहीं थे।वे पंजाब में आप पार्टी की दस्तक से भी परेशान थे। सूत्रों की मानें तो इस ख़तरे से निपटने के लिए उन्होंने भाजपा से भी सहयोग यह कहकर लिया कि वे उससे निपट लेंगे।यह यारी क्यो? उनका इरादा बिल्कुल साफ़ था वे भाजपा में जाने की तैयारी कर चुके थे।हाल ही में उनका ये कहना कि भाजपा से कहकर कृषि कानून वापस करवा लेंगे मायने रखता है।हैं।जबकि ये हरगिज़ संभव नहीं है।देखना यह है मध्यप्रदेश में हुई भाजपा की वापसी के बाद यहां क्या और कैसे समीकरण बनते हैं। यहां चुनाव करीब है बड़ी उथल-पुथल की संभावना कम है लेकिन भाजपा का क्या ठिकाना सब ठीक नहीं रहा तो राष्ट्रपति शासन भी पंजाब को झेलना पड़ सकता है। अमरिंदर को यदि भाजपा में सम्मानजनक पद नहीं मिलता है तो वे अपनी कोई पार्टी भी बना सकते हैं।
फिर भी मध्यप्रदेश की जनता की तरह पंजाब की जनता फिलहाल कांग्रेस की पक्षधर है कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने वालों को जमकर सबक सिखाने की तैयारी में है। मध्यप्रदेश में होने वाले उपचुनावों में जिस तरह नाखुश आदिवासियों को अपने पक्ष में करने देश के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ने घोषणाओं की झड़ी लगाई है इसका सीधा मतलब है वे हार रहे हैं। क्योंकि गृहमंत्री की इतनी सख्त सुरक्षा इंतजामों के बाद भी आदिवासियों ने अपने नारे लगाकर आवाज बुलंद दी। जहां काले मास्क पर इसलिए प्रतिबंध लगाया गया कि शाह जी  कहीं काले झंडे ना समझ लें।ऊपरी तौर पर कांग्रेस में ऊपरी स्तर पर जो कुछ भी घटित हो रहा हो किन्तु मध्यप्रदेश और पंजाब में कांग्रेस की स्थिति मज़बूत है पंजाब के किसानों भाजपा की तस्वीर बेहद धुंधली कर दी है।

Ramswaroop Mantri

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