सुसंस्कृति परिहार
कहते हैं कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक का प्रमुखतम हथियार उनकी लाठी होती है ।लाठी उनके प्रशिक्षण का भी हिस्सा होती है।जब वे अपनी लाठी का प्रर्दशन करते हुए पथ संचलन करते हैं तब लाठी की करामातें देखकर ऐसा नहीं लगता था कि ये एक जघन्यतम हथियार भी हो सकता है। हां,पुलिस की लाठियों का दर्द हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने किस कदर झेला उसकी मिसाल लाला लाजपत राय को मारी गई लाठियों से मौत के रूप में, इतिहास में दर्ज है ।अब भी पुलिस लाठीचार्ज करती है हाल ही में हरियाणा के करनाल में किसानों के सिर इस तरह फोड़े गए कि एक किसान मौके पर ही चल बसा । पुलिस का लाठीचार्ज जब तब सुनने में आता रहता है। इन्हें तो अधिकारियों के आदेश से लाठी चलानी होती है।संघ ने ऐसा लगता है अंग्रेजी शासन काल में उनसे रही मित्रता के वशीभूत लाठी को अपने तंत्र के रूप में अपना लिया है।
जहां तक किसानों का सवाल है वे खेतों पर जाने में साथ लाठी रखते रहे हैं।जिसकी ठक ठक आवाज से उनकी पगडंडी सांप आदि से सुरक्षित रहती है और खेत में जब किसी ढोर डांगर की आहट मिलती तो लाठी उसे खदेड़ने के काम करती है। पहले लाठी के एक सिरे पर लालटेन भी टंग जाती थी।आजकल तो टार्च या मोबाइल रोशनी दिखाने लगे हैं।यदा यदा यह लाठी खेतों में घुसे चोर भगाने के काम आती रही । बुजुर्ग व्यक्ति खेतों की टेढ़ी मेढ़ी ज़मीन पर बेलेंस बनाने के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं।
और, बापू की लाठी तो उनके बुढ़ापे का सहारा थी और वे उसे अहिंसा का अस्त्र मानते थे जिसकी गोडसे वादी अपनी लाठी से तुलना करने में लग गए हैं।याद करिए अधिकांश माबलिंचिंग के मामलों में लाठियों का इस्तेमाल किसने किया ?कितने लोग लाठियों से मार दिए गए। लखीमपुर खीरी की घटना में गाड़ी से कुचलकर मारे गए दो किसानों को छोड़कर जो अन्य किसान मारे गए वे लाठियों से ही घायल हुए थे। आश्चर्यजनक यह है कि वह पुलिस की लाठी नहीं थी ये उन लोगों की लाठियां थीं जिन्हें खट्टर जैसी टे्निंग देकर यहां भेजा गया था ताकि आंदोलनकारी किसानों पर जुर्म आरोपित किया जा सके। विचारणीय बात यह है कि किसान अपने साथियों को क्यों मारेंगे?
विदित हो चंडीगढ़ में किसान मोर्चा के एक कार्यक्रम में सीएम खट्टर ने विवादित बयान दिया. उन्होंने कहा कि हर इलाके से 1 हजार लट्ठ वाले किसानों का इलाज करेंगे ।सीएम खट्टर ने कहा- उठालो लठ ! उग्र किसानों को तुम भी जवाब दो ! देख लेंगे। दो चार महीने जेल में रह आओगे तो बड़े नेता बन जाओगे ! इसके अलावा सीएम खट्टर ने कहा कि जमानत की परवाह मत करो ।खट्टर के ये विचार और केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा का किसानों को दो मिनट में निपटाने की बात पर सुको को संज्ञान लेने की ज़रूरत है।क्योंकि लाठीधारियों की फौज बनाने का खुलासा खट्टर स्पष्ट तौर पर कर ही रहे हैं और दो मिनिट में केंद्रीय मंत्री जी के इशारे पर उनके पुत्र तथा उनके लठैत साथियों ने किसानों को क्रूर तरीके से मार कर दिखा ही दिया।
इस तरह का विचार चुनी हुई सरकार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री खुले तौर पर दें ।जिनकी जिम्मेदारी देश और राज्य में शांति और नागरिकों की सुरक्षा करना है।उन पर त्वरित ऐक्शन लेकर पार्टी को इन्हें हटा देना चाहिए लेकिन ये मुमकिन नज़र नहीं आता इसलिए अदालत का हस्तक्षेप ज़रूरी है क्योंकि यह जनहित में ली शपथ की घोर अवज्ञा भी है।यह भी विचारणीय है कि यदि इन पर कार्रवाई नहीं होती है तो देश का हाल बद से बदतर होने से कोई नहीं रोक पाएगा ।पनपता लाठीतंत्र हमारे गणतंत्र के लिए बड़ी चुनौती होगा।





