रजनीश भारती
हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने आंदोलनरत किसानों के खिलाफ अपने प्राइवेट गुण्डों को हिंसात्मक प्रेरणा देते हुए कहा कि ‘लट्ठ उठाओ, मारो, बहुत होगा दो-तीन महीने के लिए जेल जाओगे…. जेल से निकलोगे तो नेता बनकर निकलोगे…’ इसी प्रकार लखीमपुर खीरी से सांसद जो अब केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री बना अजय मिश्रा टैनी द्वारा किसानों को खुलेआम धमकी देना कि ‘दो मिनट में ठीक कर देंगे, गाड़ी से उतर गये होते तो कोई दिखाई नहीं देता…’,इसके बाद ही 3 अक्टूबर को उसी टैनी के गुँडे बेटे ने अपनी कारों के काफिले से 4 किसानों को रौंदकर मार डाला, दर्जनों किसानों को घायल कर दिया ! इस जघन्य नरसंहार के बावजूद गृहमंत्री राजनाथ सिंह का बयान कि कोई मंत्री इस्तीफा नहीं देगा ! और 10 महीनों से चल रहे शान्तिपूर्ण आन्दोलन में 600 से अधिक किसानों की शहादतों के बाद भी नरेन्द्र मोदी की चुप्पी ! हतप्रभ और अत्यंन्त दुःखी करता है ! और ये भी कि लखीमपुरखीरी वाली दुःखद घटना बीजेपी के शीर्ष के कर्णधारों के संरक्षण में हुआ है और इस घटना में बीजेपी के शीर्ष से नीचे तक के अजय मिश्रा जैसे स्थानीय स्तर के छुटभैय्ये नेता मिले हुए हैं ! और यह भी कि यह घटना पूर्व प्रायोजित व पूर्व नियोजित है !
असम की घटना से लेकर गाय, गोबर, गंगा, श्मशान, कब्रिस्तान के नाम पर तमाम दंगे-फसाद, इनकी आड़ में सरकारी संस्थानों को देशी व विदेशी बड़े पूंजीपतियों के हाथ बेचना, ऐसे ही ढेर सारे राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय तथ्यों से सिद्ध होता है कि हमारे देश में ‘देशद्रोही, किसान-विरोधी आतंकवादियों ‘ की सरकार चल रही है ! इन आतंकियों के सरगना मोदी और अमित शाह जैसे लोग दिख रहे हैं, इन आतंकियों को पालने वाले अडानी, अम्बानी, टाटा, बिड़ला जैसे देशी-विदेशी बड़े पूंजीपति हैं, अमेरिकी साम्राज्यवाद इन सबको संरक्षण दे रहा है ! किसानों के बेटे जो सेना और पुलिस में भर्ती हैं, वे इन आतंकवादियों को पहचानने लगे हैं, अधिकांश जवान तो किसानों के साथ खुलेआम हमदर्दी रखते हैं, वे किसानों के दुख दर्द को समझ रहे हैं, खट्टरों को आभास हो गया है कि किसानों के बेटे (सेना-पुलिस के जवान ) अब किसानों के आन्दोलन को कुचलने से इनकार कर सकते हैं ! इसीलिए हताश होकर खट्टर और टैनी जैसे आतंकवादी, अपनी प्राइवेट सेना मतलब पालतू गुण्डों की फौज को किसानों के खिलाफ हिंसा करने के लिए ललकार रहे हैं ! ये गुण्डे सत्ता की ऊंची कुर्सियों पर कैसे पहुंच जाते हैं ? यह स्पष्ट रूप से हरियाणा का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि का मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अपनी विडिओ में दे चुका है,जिसका उल्लेख इस लेख के प्रारम्भ में किया जा चुका है । इस सवाल का जो जवाब है, वही हमारे देश की बुनियादी समस्या है !
दरअसल हमारे देश के 60% किसान भूमिहीन व गरीब हैं, जबकि हर जिले में टैनी जैसे दो-चार आतंकवादी मौजूद हैं, जिनके पास सैकड़ों से लेकर हजारों एकड़ तक जमीन है.वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं, इनमें कुछ हिन्दू तो कुछ मुस्लिम नाम वाले नेता भी हैं, कुछ नेता तो कुछ बड़े-बड़े मठों के मालिक हैं ! इनमें प्रत्येक के कब्जे में 100 से लेकर हजार-हजार एकड़ से ज्यादा तक जो जमीन है, इसी जमीन की हैसियत के आधार पर वे देशी-विदेशी पूंजीपतियों से ठेका, पट्टा, कोटा, परमिट, लाइसेंस एजेंसी, कर्ज, अनुदान आदि हासिल कर लेते हैं; और इन सबकी आड़ में मिलावटखोरी, जमाखोरी, सूदखोरी आदि करते रहते हैं.आमदनी के इन्हीं सारे स्रोतों की बुनियाद पर ये स्थानीय रसूखदार सैकड़ों गुण्डे पालते हैं, इन पालतू गुण्डों का समूह ही इनकी प्राइवेट सेना हैं, इसी सेना के बल पर वे अपने पूरे क्षेत्र की जनता को दबाकर रखते हैं.
दबे कुचले लोगों में से कोई प्रतिभावान विरोधी उभरने लगता है तो वे उसे भी अपनी प्राइवेट सेना में शामिल कर लेते हैं.अगर वो शामिल होने की बजाय उनके विरोध में खड़ा होता है तो उसे अपने शूटरों द्वारा उत्तर प्रदेश के मठाधीश मुख्यमंत्री कथित योगी के शब्दों में स्थानीय दारोगा जी को पूर्वसूचना देकर उसे अपनी सुविधानुसार और समयानुसार ठोक देते हैं ! प्राय: ये गुण्डे ही अपनी जाति-विरादरी के नेता भी बन जाते हैं. इस तरह जाति-विरादरी के आधार पर इन्हें बिना किसी लागत के, मुफ्त मे कुछ अंधभक्त मिल जाते हैं.इस तरह इनके द्वारा किये जा रहे सारे अत्याचारों का बुनियादी कारण है ‘सैकड़ों से लेकर हजारों एकड़ जमीन ‘जो इनके कब्जे में है !
सिर्फ गोरखपुर के मठाधीश कथित योगी के मठ की सभी शाखाओं के कब्जे की जमीन कुल मिलाकर कई हजार एकड़ में होगी. ऐसे ही हजारों मठाधीश, बड़े अधिकारी, बड़े नेता, अभिनेता और खिलाड़ी हैं, जिनके पास 2 सौ एकड़ से ज्यादा जमीन है, कईयों के पास तो हजारों एकड़ जमीन है. इन सबकी कुल जमीन मिला दीजिए तो कई करोड़ एकड़ हो जाएगी.अब ये ही लोग तीन काले कानून बनाकर हम छोटे-छोटे किसानों की जमीन भी छीन लेने पर आमादा हैं. और जब हम अपनी जमीन बचाने के लिए सिर्फ काले झंडे दिखाए देते हैं तो ये लोग हमें गोली मारते हैं और अपनी मंहगी कारों से रौंद देते हैं !
जब तक इन सामंती गुण्डों से जमीन छीनकर भूमिहीन व गरीब किसानों में नहीं बांटी जायेगी, तब तक न तो हमारी जमीन बचेगी, न ही लखीमपुर-खीरी जैसी घटनाएं रुकेंगी, न ही किसानों के खिलाफ शोषण, दमन, अत्याचार रुकेगा ! जमीन ही इन दरिन्दों की नाभि का अमृत है.जब तक इनके कब्जे में जमीन रहेगी तब तक ऐसे दरिन्दे पैदा होते रहेंगे !
रजनीश भारती,जनवादी किसान सभा,





