राधेश्यामजी अल सुबह दशहरे की राम राम करने आ गए। अतिथि देवो भव इस उपदेशक श्लोक रूपी सूक्ति के भावार्थ का पालन करते हुए, राधेश्यामजी का स्वागत किया।
राधेश्यामजी ने अपनी बात यूँ शुरू की,अंतः रावण के पुतलों का दहन हो ही गया।यह बुराई भी गजब क्रिया है।बुराई को खत्म करने के लिए जनसमूह के समक्ष बुराई के प्रतीक का दहन करने की परंपरा का निर्वाह किया जाता है।यह बुराई को जलाकर मिटाने का सांकेतिक संदेश है।
प्रति वर्ष मानव द्वारा स्वयं के हाथों रावणों के पुतलों को निर्मित करना और स्वयं के हाथों ही जलाने की क्रिया सम्पन्न करना गजब क्रिया होती है।यह कहते हुए राधेश्यामजी ने दशहरे की चर्चा को विराम दिया।
राधेश्यामजी ने रावण दहन की चर्चा के बाद यकायक अनपढ़ता पर चर्चा शुरू कर दी।
मैने कहा रावण तो बहुत विद्वान था।रावण की चर्चा के तुरंत बाद अनपढ़ता की चर्चा शुरू करना भी अजब ही लगता है। मैने राधेश्यामजी से कहा आप तो अनपढ़ता की चर्चा शुरू करके सीधे देश के गृहमंत्रालय पहुँच गए हो?
राधेश्यामजी ने कहा मै तो विषयांतर कर रहा हूँ।रावणों की चर्चा बहुत हो गई?देश की प्रगति में बाधक अनपढ़ता पर चर्चा करना अनिवार्य हो गया है।
मैने कहा अनपढ़ता की चर्चा प्रारम्भ करने पूर्व शिक्षित बेरोजगारों की समस्या पर ध्यान कौन देगा?
मैने कहा इनदिनों देश की मूलभूत समस्याओं से ध्यान हटाने की एक साजिश चल रही है।अनपढ़ता की बहस भी वही साज़िश है।
जो लोग हर मौर्चे पर असफल होतें हैं,वही लोग आमजन और विपक्ष का ध्यान भटकाने की साज़िश रचतें हैं?
अनपढ़ शब्द पर गम्भीरता से विचार करने पर लेखक यकायक छः दशक पूर्व प्रदर्शित फ़िल्म अनपढ़ का स्मरण हुआ।
इस फ़िल्म में गीतकार राजा मेहंदी अली खान के इस गीत का स्मरण हुआ।गीत की कुछ पंक्तियां वर्तमान संदर्भ में एकदम सटीक बैठती है।
सिंकदर ने पोरस से कीथी लड़ाई
जो की थी लड़ाई तो मैं क्या करूं
ये बी.ए. है लेकिन चलायें ये ठेला
ये एम.ए. है लेकिन ये बेचें करेला
छः दशक पूर्व पढ़ालिखा युवा उक्त कार्य करने के लिए बाध्य था।
आज की व्यवस्था तो वर्तमान में शिक्षित युवाओं को सीधे सड़क किनारे नाली… की गैस से ईंधन तैयार कर स्वरोज़गार योजना पर अमल करने की सलाह दे रहीं हैं।
इसतरह की योजना की सलाह देने वाली व्यवस्था में सर्वोच्च पद विराजित व्यक्ति अनपढ़ता को कोस रहें हैं?
राधेश्यामजी मेरी बात सुनकर मानसिक रूप से संजीदा हुए और कहने लगे आप हमेशा कहतें हो वही सही है कि, literacy और Education के अंतर को समझना बहुत जरूरी है।
वर्तमान में पढेलिखों की संख्या बहुत बढ़ गई है।शिक्षित बहुत कम है।हरएक क्षेत्र में जो विकृति आ रही है वह इसीकारण आरही है।
When literat people will become educatet than only we can think for revolution and change
अर्थात जब पढलिखे लोग शिक्षित हो जाएंगे तब हम क्रांति और परिवर्तन की कल्पना कर सकतें हैं।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





