ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन मेरठ ने नानकचंद सभागार, कचहरी प्रांगण, मेरठ में संविधान दिवस मनाया। इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष अब्दुल जब्बार खान एडवोकेट ने कहा कि आज हमारे संविधान पर हमले हो रहे हैं, कानून के शासन को धता बताया जा रहा है, ऐसे में संविधान के मूल्यों की रक्षा करने के लिए वकीलों और जनता को एकजुट होना पड़ेगा और इस पर हो रहे हमलों का मुकाबला करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करने के लिए अगर हमें सड़कों पर आना पड़ा तो हम सड़कों पर भी आएंगे। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता ही कानून के शासन और भारतीय संविधान की रक्षा कर सकते हैं, इसको नए आयाम प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन का धन्यवाद किया कि यूनियन ऐसे मौकों पर विचार गोष्ठी आयोजित करती रहती है और वकीलों की एकता कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने को तैयार रहती है।

इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष और जनवादी लेखक संघ मेरठ के जिला सचिव मुनेश त्यागी एडवोकेट ने कहा कि यह संविदा बाबासाहेब के सपनों का संविधान नही रह गया है। इस संविधान पर संप्रदायवादी, जातिवादी और पूंजीवादी ताकतें लगातार हमला कर रही हैैं और इसे कमजोर कर रही हैं और इसके दर्शन और चेतना को मार रही हैैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के रहते आर्थिक असमानता बढ़ रही है। यहां अमीरों और गरीबों की संख्या लगातार बढ़ी है। आज हमारे देश में 77 फ़ीसदी यानी लगभग एक करोड़ लोगों की आमदनी ₹20 प्रतिदिन है, आज हमारे देश में दुनिया में सबसे ज्यादा गरीब हैं, सबसे ज्यादा अनपढ़ हैं, सबसे ज्यादा बेरोजगार हैं और सबसे ज्यादा यानी साढ़े 4 करोड़ मुकदमे अदालतों में पेंडिंग हैं और सरकार का जनता को संस्था सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने में कोई रुचि नहीं रह गई है यहां मुकदमों के अनुपात में जज नहीं है, न्यायालय नहीं है और बाबू और पेशकार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने ऐसे संविधान की कल्पना नहीं की थी। वर्तमान सरकार, देश और दुनिया के पूंजीपतियों से मिलकर संविधान पर हमला कर रही है, इसकी प्रस्तावना संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, समाजवाद, गणतंत्र, आजादी और हिंदू मुस्लिम भाईचारे को खारिज कर रही है और इसकी प्रस्तावना और आदर्श और सिद्धांतों के विपरीत काम कर रही है जिससे जनता में बैचेनी बढी है। किसान और मजदूरों को आधुनिक गुलाम बनाया जा रहा है और यह सब देसी विदेशी पूंजीपतियों को खुश करने के लिए और उनकी शह पर किया जा रहा है।
बाबा साहब ने सोचा था कि इस संविधान के लागू होने पर सबको शिक्षा मिलेगी, सब को रोजगार मिलेंगे, सब को रोटी मिलेगी, सबको स्वास्थ्य मिलेगा, मगर आजादी के 74 साल बाद भी ऐसा नहीं हुआ और लोग परेशान हैं। यह बाबा साहब के सपनों का संविधान नहीं रह गया है बल्कि बल्कि यह पूंजीपतियों के हितों को बढ़ाने वाला संविधान बन गया है। इस संविधान में बुनियादी परिवर्तन करने की जरूरत है ताकि किसानों मजदूरों और आम जनता की बुनियादी समस्याओं का हल हो सके।
इस अवसर पर देवेंद्र सिंह, सतीश राजबल, नेपाल सागर, विशाल अहमद, शेर जमा खान, राशिद अंसारी ने अपने विचार व्यक्त किए और संविधान को और इसके प्रावधानों को मजबूत करने की अपील की।
इस अवसर पर गोष्ठी में श्याम सिंह, वत्स जी, विशाल, हेमचंद निमेष, शीशपालसिंह,सैफुल इस्लाम, मेहताब, जावेद गाजी, जुल्फिकार, धर्मेंद्र मीवा अयाज अहमद, अब्दुल वहाब सतेंद्र सिंह सुशील कुमार शिमला सागर अशोक कंसल राकेश शर्मा धर्मवीर चंदेल आदि अधिवक्ता उपस्थित थे सभा का संचालन जीपी सलोनी या और अध्यक्षता अब्दुल जब्बार खान ने की।
,,,, मुनेश त्यागी




