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मिक जनता संघ की चेतावनी सही साबित होगी ?……मनजीत सिंह की कंपनियां कपड़ा मिलों को क्या गोदाम बनाएंगी ?

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श्रमिकों के हक कुचलकर निमाड़ के युवाओं को ठेका मजदूर बनाकर कमा रही है लाभ ?
       सेंचुरी यार्न और डेनिम के 1,000 से अधिक श्रमिक और स्टाफ कर्मचारियों में से 874 की संख्या है, उनकी जिन्होंने मिल चलाने की, रोजगार पाने की चाहत और आग्रह रखा तथा VRS को नकारा। मनजीत सिंह की दोनों कंपनियों ने ग्लोबल और काॅटन, सेंचुरी से प्रशिक्षित, सेंचुरी में वर्षों तक काम किए अनुभवी श्रमिकों को काम पर लेना नकारा और इस बेबुनियाद चौकानेवाली शर्त को सेंचुरी कंपनी ने स्वीकार किया। इस पर सवाल उठाते हुए श्रमिक जनता संघ जैसी इमानदारी से श्रमिकों के हित में वर्षों से लड़ती आई हमारी यूनियन ने शंका और सवाल खड़े किए, जो आज सच साबित हो रहे हैं। श्रमिक जनता संघ ने माना था कि मनजीत कॉटन किंग है। उनकी दो कपड़ा मिल चलाने की तैयारी नहीं है और मनसा भी नहीं है। उन्होंने बंद मिल खरीदी है, जबकि खरीदी करते वक्त बनी रजिस्ट्री के तहत मिल्स में उत्पादन एवं बिक्री का कार्य चालू होने का झूठा दावा सेंचुरी और मनजीत सिंह दोनों ने किया है। इसी से अंदरूनी सांठगांठ भी साबित हो रही है।     

    अब 14 जुलाई 2021 को खरीदी और बिक्री नामा होने से आज तक जो हकीकत सामने आई है, उससे कई बातें साबित होती हैं, जिसमें मनजीत सिंह मिल्स चलाना नहीं चाहते। उन्होंने संपत्ति की खरीदी की है, उद्योग की नहीं। यह हमारा अंदाज भी सही साबित होता है।   

  जुलाई से नवंबर साढ़े चार महीनों तक डेनिम मील में 1% भी कपड़ा नहीं बनाया गया है। उस मील में कोई बुनाई नहीं हो रही है। यार्न मे भी मात्र दो तिहाई मशीनें ही चला पाये हैं। उसमें भी बहुत ही कम श्रमिक रखकर धीमी गति से उत्पादन तो अंदाजन मूल मात्रा के 40% से भी कम हो रहा है और श्रमिकों की पूर्व की संख्या वर्ष 2016 तक करीबन 1300 और 300 श्रमिकों की छटनी के बाद भी 2017 अक्टूबर तक करीबन एक हजार श्रमिक तथा तीन सौ ठेका मजदूर कार्य कर रहे थे। आज मनजीत सिंह दोनों मिल्स मिलकर 250 श्रमिक बाहर से आने-जाने वालों और कंपनी परिसर में ही डटे हुए 150 यानी कुल मिलकर 400 से आगे बढ़ने नहीं दे पाए हैं। ये सभी बगैर प्रशिक्षण के हैं और सभी के सभी ठेका मजदूर हो कर पूर्व में सेंचुरी कंपनी दे रही थी वैसा न्यूनतम वेतन भी उन्हें नहीं दिया जा रहा है। जो श्रमिक और कर्मचारी VRS लेकर चले गए थे, उनमें से भी 15- 20 को वापस बुलाकर उन्हें पूर्व की तनख्वाह न देते हुए, अनिश्चित तनख्वाह पर ही उनसे काम करवा लिया है।       
      मनजीत मैनेजमेंट निमाड़ के युवकों को जिस वेतन का आश्वासन देकर कंपनी में काम करने के लिए बुलाती है, उस आश्वासन को पूरा ना करने पर कई बार उन श्रमिकों से विवाद हुआ है और वे श्रमिक 1 महीने के अंदर ही कंपनी छोड़ कर चले जाते हैं। जो श्रमिक न्यूनतम वेतन की बात करते हैं उन्हें तत्काल कंपनी से निकाल दिया जाता है।      श्रमिकों को जो नियुक्ति करते वक्त सबूत के कागजात दिए जाते थे, उसके बदले अब ऐसे कार्ड्स जिन पर ना तो  कंपनी का नाम लिखा गया है ना ही नियोक्ता के नाम पर किसी संस्था या व्यक्ति का नाम लिखा गया है ना श्रमिक का कार्य विभाग दर्ज है। ऐसी स्थिति में आज लिए जा रहे श्रमिक भी कब तक रहेंगे? यह कौन बता सकता है, सीने पर हाथ रखकर? ठेका मजदूर भी तो सेंचुरी कंपनी से पूर्व में 8 घंटे काम का न्यूनतम वेतन ले रहे थे आज 12 घंटे काम लेकर भी वह नहीं दिया जा रहा है। इसीलिए तो मंजीत सिंह कंपनियों द्वारा सेंचुरी के प्रशिक्षित और अनुभवी श्रमिकों को काम पर रखने से इंकार है ।*क्या गोदाम बनेगी सेंचुरी की दोनों मिल्स?        अब तो और एक हकीकत सामने आई है। कपास अंदर जाकर यार्न तथा डेनिम का कपड़ा बाहर आता, तो ही कपड़ा मिल चलने का सबूत होता, लेकिन अभी कपास का बीज याने काकडे ही नहीं, मकई भी ट्रकों में कंपनी के अंदर जा रहा है। सेंधवा में काॅटन का ही व्यवसाय चलाने वाले मंजीत सिंह ने यह प्रॉपर्टी खरीदी है, तो क्या इसमें गोदाम भी बनाएंगे?   

   श्रजसं के द्वारा हम श्रमिक जबकि मिल चलाने के पक्ष में और रोजगार सुनिश्चित करने के पक्ष में ही 4 साल से संघर्ष किए हैं, तो रोजगार की परवाह न करने मिल भी बंद कराने के पक्ष में रही चार यूनियन के भी कई सदस्यों ने (जिनकी संख्या ही कुल मिलाकर 10% भी नहीं थी तो प्रतिनिधित्व का उनका कानूनी अधिकार नहीं रहा था।)  VRS का पक्ष लिया, जिससे सेंचुरी कंपनी ने उसी का मौका लेकर श्रमिक संस्था को चलाने देने का ट्रिब्यूनल कोर्ट में शपथ पत्र द्वारा दिया प्रस्ताव वापस लेना एक  खेल था।    श्रजसं आज भी चाहती है कि कानूनी कार्यवाही, गलत आधार पर हुई बिक्री और रजिस्ट्री की जांच से तथा VRS थोपने की और रोजगार छीनने की अवैध और अन्याय पूर्ण कार्य पर उठे विवाद पर न्याय पूर्ण फैसला हो।
संजय चौहान 9098662253,                              सुखेंद्र मड़ैया                                  विकास गिरासे     

Ramswaroop Mantri

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