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श्रद्धांजलि : चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत की दुःखद मृत्यु

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-निर्मल कुमार शर्मा,

चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत नहीं रहे ! भारत के पहले चीफ डिफेंस स्टॉफ बने भूतपूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत कल एक आधुनिकतम् रूस निर्मित हेलीकॉप्टर Mi-17V5,जिसे भारतीय वायुसेना का सबसे फुलप्रूफ और सुरक्षित माने जानेवाला हेलीकॉप्टर माना जाता है,जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तक जैसे अतिविशिष्ट लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है,से कोयम्बटूर के पास सुलूर में स्थित भारतीय सेना के एक अड्डे से वेलिंगटन डिफेंस सर्विस स्टॉफ कॉलेज में लेक्चर देने के लिए जा रहे थे,परन्तु मिडिया की रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक खराब मौसम और धुंध की वजह से उनका हेलीकॉप्टर नीलगिरी के कुन्नूर चाय बागान क्षेत्र की पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया ! जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर में आग लग गई है,जिसमें उसमें सवार सेना के सभी अधिकारी बुरी तरह जल गये हैं ! सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के साथ उस हेलीकॉप्टर में सेना के कई उच्च अधिकारी यथा ब्रिगेडियर एल एस लिद्दर,लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह,नायक गुरसेवक सिंह,नायक जितेंद्र कुमार, लांसनायक विवेक कुमार, लांसनायक बी साई तेजा,व हवदार सतपाल आदि 11अन्य लोग भी सवार थे।

CDS General Bipin Rawat, wife, 11 others dead in helicopter crash in Tamil  Nadu's Coonoor


उनको थलसेना के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी 1916 में दी गई थी,वे भारतीय थलसेना के 27 वें सेनाध्यक्ष थे,भूतपूर्व थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ की जिम्मेदारी 31 दिसम्बर 2019 को सौंपी गई थी,वे इंडियन मिलिट्री और डिफेंस सर्विसेज स्टॉफ कॉलेज में पढ़े हुए थे,वे मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस सर्विसेज में एमफिल किए थे,उसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए, लेकिन वे विदेश की सुविधासम्पन्न जिंदगी छोड़कर भारत में रहकर देश सेवा करने का संकल्प लिए। जनरल बिपिन रावत को अशांत क्षेत्रों में काम करने का लम्बा अनुभव था।
इस लेख में इस कटुसच्चाई को लिखना भी अत्यावश्यक है कि भारतीय संविधान के अनुसार भारतीय सेना के तीनों अंगों मसलन थलसेना, वायुसेना और जलसेना का सुप्रीम कंमाडर भारतीय गणराज्य का राष्ट्रपति होता है, परंतु यह चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ या सीडीएस का पद श्रीमान नरेन्द्र मोदी ऐंड कंपनी द्वारा इसलिए सृजित किया गया ताकि संवैधानिक रूप से नियुक्त सुप्रीम कंमाडर भारतीय गणराज्य का राष्ट्रपति की शक्ति को कमतर किया जा सके ! हालांकि इस राजनैतिक कुटिलता भरी नीतियों से जनरल बिपिन रावत की बहादुरी और युद्धकौशल से कोई अंतर्संबंध नहीं है !
भारतीय सेना में उभरते चुनौतियों से निपटने, नॉर्थ में मिलिट्री फोर्स के पुनर्गठन, पश्चिमी फ्रंट पर लगातार जारी आतंवादी गतिविधियों तथा प्राक्सी वार और पूर्वोत्तर में जारी संघर्ष के लिए उन्हें सबसे जरूरी विकल्प के तौर पर माना जाता था,सन् 1987 में चीन से हुए एक छोटे से युद्ध में जनरल बिपिन रावत के नेतृत्व में भारतीय सेना की बटालियन चीनी सेना के सामने खड़ी थी,उन्होंने भारत ही नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रौशन किया था वे कांगो के संयुक्त राष्ट्र संघ मिशन के भी हिस्सा थे,उस समय हुए एक बड़े हादसे से बचाने में लगभग 7000 लोगों के अमूल्य जीवन को बचाने में वे अपना अतुलनीय योगदान किए थे,वे अपने जीवन के बहुमूल्य 43 वर्ष भारतीय मातृभूमि और जनता की ढाल भारतीय सेना को दिए ! इन वर्षों में उन्हें परम् विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल और अतिविशिष्ट सेवा मेडल सहित कुल 18 पदकों और सम्मानों से देश ने उनकी बहादुरी और गहरी सूझ-बूझ के लिए पुरस्कृत किया। अंत में इस देश की अरबों जनता की तरफ से भारत के उस बहादुर लाडले सपूत को अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि ।

-निर्मल कुमार शर्मा,

‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में बेखौफ, निष्पृह,सशक्त व स्वतंत्र लेखन ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र,

Ramswaroop Mantri

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