पटना
जाने-माने पत्रकार जुगनू शारदेय का मंगलवार को दिल्ली के एक वृद्धाश्रम में निधन हो गया। बहुत कम उम्र में वे समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए थे। जेपी आंदोलन के समय उनकी रिपोर्ट ‘दिनमान’ में छपा करती थी। इन्हीं रिपोर्टों ने उनको खासा चर्चा में लाया। अपने समय की तीन चर्चित पत्रिकाओं धर्मयुग, दिनमान और रविवार में वे नियमित लिखते रहे।
फिल्मी दुनिया से भी जुड़े थे
उनकी पैठ राजनीति के साथ-साथ साहित्यिक हस्तियों के बीच भी रही। लेकिन स्वभाव अक्खड़ वाला ही रहा। बिहार में लालू प्रसाद और नीतीश कुमार की राजनीति को उन्होंने नजदीक से देखा। मैला आंचल के लेखक फणीश्वरनाथ रेणु से भी वे नजदीक रहे। रेणु रचनावली में रेणु ने उन्हें अपनी तरह से याद किया है। मुंबई में फिल्मी दुनिया से भी जुड़े और अच्छा समय वहां गुजारा। कई फिल्मी हस्तियों से भी वे नजदीक रहे।
कई शहरों में की थी पत्रकारिता
अपनी मुंहफट जुबान के कारण भी चर्चा में रहते थे जुगनू शारदेय। देश के कई शहरों में रहकर पत्रकारिता की। लेकिन बिहार हमेशा उन्हें खींचता रहा। उनके मित्रों ने उनके रहने की व्यवस्था कई बार करायी। लेकिन वे एक जगह टिक नहीं पाते। अंतिम दिनों में उन्हें लावारिश बता कर दिल्ली पुलिस ने वृद्धाश्रम में भर्ती कराया। यहां उन्हें निमोनिया हो गया और उन्होंने अंतिम सांस ले ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उनके निधन पर शोक प्रकट किया है।





