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इन 3 वजहों से असदुद्दीन ओवैसी लेना चाहते हैं राजस्थान में लॉन्चिंग

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जयपुर. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम अब यूपी के बाद अगले साल जनवरी में राजस्थान में लॉन्चिंग की तैयारी कर रही है. ओवैसी का प्लान 2023 में विधानसभा चुनाव में राजस्थान में तीसरी ताकत बनना है. उनका फोकस मुस्लिम वोटों पर है. राजस्थान में एंट्री से पहले ही औवेसी राजस्थान की जमीनी हकीकत खासकर राज्य के मुस्लिमों की नब्ज टटोल रहे हैं. राज्यभर में पार्टी सर्वे करा रही है. सर्वे में पूछा जा रहा है कि क्या मुस्लिम समुदाय ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन की जरुरत महसूस करता है ? क्या मुस्लिमों की कांग्रेस शासन में उपेक्षा हो रही है? क्या विकास में उनके साथ भेदभाव हो रहा है?

राजस्थान में एआईएमआईएम का बतौर समर्थक काम देख रहे एडवोकेट मुजाहिद नकवी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी मुस्लिम तबके को अपना गुलाम समझती है. कोई विकल्प नहीं होने के वजह से कांग्रेस का चुनाव इस समुदाय की मजबूरी बन चुका है. नकवी ने कहा कि हमारे सर्वे में लोगों ने कहा कि कैसे मुस्लिम इलाकों में विकास के काम नहीं हो रहे हैं. लोग एआईएमआईएम को चाहते हैं. नकवी ने कहा कि एआईएमआईएम का फोकस सिर्फ मुस्लिम नहीं है. वह दलितों और आदिवासियों और अन्य वंचित वर्गों को साधकर राजस्थान में तीसरा मोर्चा खड़ा करना चाहती है.

समान विचार वाले दलों से संपर्क किया जा रहा है
इसलिए आदिवासी इलाकों में प्रभाव रखने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी, हनुमान बेनीवाल की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी समेत अन्य समान विचार वाले दलों से संपर्क किया जा रहा है. नकवी ने कहा कि जनवरी में राजस्थान में पार्टी लॉन्च कर दी जाएगी तभी संगठन खड़ा होगा. अब सवाल ये है कि औवेसी की निगाहें राजस्थान पर क्यों है ? इसकी तीन खास वजह है.

राजस्थान में मुस्लिम कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता है
पहली तो ये कि राजस्थान में दो ही प्रमुख दल प्रभावी हैं बीजेपी और कांग्रेस. अन्य छोटी पार्टी पार्टियां है लेकिन उनका जनाधान नहीं है. राजस्थान में करीब 09 फीसदी मुस्लिम वोट बैंक है. लेकिन बीजेपी के मुकाबले के लिए बड़ी पार्टी सिर्फ कांग्रेस है. इसलिए राजस्थान में मुस्लिम कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता है. सर्वे और फीडबैक के बाद औवेसी समर्थकों का मानना है कि मुस्लिम समुदाय में कांग्रेस को लेकर खासी नाराजगी है. लेकिन विकल्प नहीं होने से कांग्रेस को वोट देना उनकी मजबूरी है.

एआईएमआईएम इसका उठाना चाहती है फायदा
औवेसी समर्थकों का कहना है कि जैसे ही एआईएमआईएम के रूप में विकल्प मिलेगा मुस्लिम वोट बैंक एकतरफा कांग्रेस की तरफ नहीं जाएगा. वह एआईएमआईएम को वोट करेगा. एआईएमआईएम समर्थकों को लगता है कि कांग्रेस जिस तरह सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ बढ़ रही है. वह खुद पर लग रहे अल्पसंख्यक हिमायती का टैग हटाने की कोशिश में जुटी है इसका सीधा फायदा एआईएमआईएम को राजस्थान में मिल सकता है.

असदुद्दीन औवेसी इस समुदाय में काफी लोकप्रिय हैं
एक और वजह देख रहे हैं औवेसी समर्थक और वह है मुस्लिम समुदाय में औवेसी की लोकप्रियता. एआईएमआईएम समर्थकों को मानना है कि मुस्लिम समुदाय चाहे किसी पार्टी को वोट करे लेकिन असदुद्दीन औवेसी इस समुदाय में काफी लोकप्रिय हैं. मुस्लिम समुदाय को लग रहा है कि औवेसी बिना हिचक के मुसलमानों के मुद्दे उठा रहे हैं. औवेसी पिछले दो साल से वैसे कई जलसों में शिरकत कर और मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रमों में शामिल होकर राजस्थान में मुस्लिम समुदाय की नब्ज टटोल रहे हैं.

औवेसी मानते हैं कि मुस्लिम कांग्रेस सरकार के रवैए से खुश नहीं है
सूत्रों का दावा है कि औवेसी भी ये मान रहे है कि गोपालगढ़ में मस्जिद से जुड़ा विवाद हो या सांप्रदायिक तनाव. मुस्लिम समुदाय कांग्रेस सरकार के रवैए से खुश नहीं है. जयपुर में 12 दिसंबर को कांग्रेस ने मंहगाई के खिलाफ रैली की. इस रैली से पहले गहलोत सरकार की खुफिया एजेंसी ने पुलिस को एक रिपोर्ट देकर आशंका जताई थी कि मुस्लिम समुदाय को एआईएमआईएम भड़का रहा है. रैली में इस समुदाय के लोग हंगामा कर सकते हैं.

सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक से सियासी ताकत बनना आसान नहीं
हालांकि रैली में हंगामा तो नहीं हुआ, लेकिन एआईएमआईएम से जुड़े लोगों का दावा है कि रिपोर्ट का ये पत्र मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई ग्रुप में वारयल होने के बाद इस समुदाय का एक तबका खफा है कि समर्थन के बावजूद कांग्रेस उन पर भरोसा नहीं कर रही है. रैली में राहुल गांधी के हिंदू और हिंदुत्व को लेकर भाषण को भी एआईएमआईएम से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे मुस्लिम समुदाय में कांग्रेस को लेकर नाराजगी बढ़ेगी. लेकिन औवेसी अच्छी तरह से जानते हैं कि राजस्थान में सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक से सियासी ताकत बनना आसान नहीं है. फिर राजस्थान के अलग अलग इलाकों में मुस्लिमों के मसले और सोच में फर्क है.

मुस्लिम जाट गठजोड़ पर भी उनकी नजर है
ऐसे में औवेसी मुस्लिम-दलित-आदिवासी गठजोड़ की कोशिश में है. औवेसी डूंगरपुर बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और उदयपुर के ग्रामीण अंचल में असर रखने वाली बीटीपी से भी गठजोड़ की कोशिश में है. वहीं पश्चिम राजस्थान में कांग्रेस की ताकत रहे मुस्लिम जाट गठजोड़ पर भी उनकी नजर है. औवेसी जाटलैंड में असर रखने वाली हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी के भी संपर्क में भी है.

औवेसी के सामने ये भी बड़ी चुनौती है
2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में ताकत बनने से पहले औवेसी की चुनौती है राजस्थान में पार्टी का सगंठन खड़ा करना और पार्टी से असरदार लोगों को जोड़ना. खासकर मुस्लिम समुदाय में असर रखने वाले लोगों को जोड़ना. दूसरी चुनौती औवेसी के सामने मुस्लिमों को ये भरोसा दिलाना कि वे बीजेपी की बी टीम नहीं है. अब तक औवेसी बिहार से लेकर बंगाल और यूपी में इसी टैग से जूझते रहे हैं. यही वजह है कि औवेसी की पार्टी अभी तक वोट कटुआ पार्टी से अलग ताकत नहीं दिखा पा रही है.

Ramswaroop Mantri

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