प्रवीण आजमेरा
साडे 7 साल से लगातार किसानों, छोटे दुकानदारों, उद्योगपतियों व्यापारिक संगठनों, शासकीय संस्थानों रेल, भेल, सेल, तेल, गेल, हाल, बैंकों, बीमा, विद्युत कंपनियों, व अन्य सरकारी विभागों संस्थानों और निजी क्षेत्र के सारे कारोबारियों को लगातार बोल रहा था देखो यह धूर्त चांडाल मोदी, अमित शाह, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रखेले, पूरे देश को धीरे धीरे उलझा कर बेंच मारेंगे नोटबंदी के समय, जीएसटी, महामारी के पाखंड की आड़ में तालाबंदी, पर हर समय में लगातार जनता को जागरूक करने का प्रयास करता रहा तब यही मक्कार सूकर बैंक कर्मी, बीमा कर्मी, बिजली कंपनियां इनको तो 20 साल से लगातार बोल व लिख रहा हूं। श्रमिक संगठनों को लगातार जगाता रहा कि देखो ये जाहिल भुखेरे अपराधियों का गिरोह सब कुछ सब कुछ नीलाम कर देगा तब बिजली वाला बोल रहा था।
रेलवे जा रही है, मुझे क्या करना? रेलवे बाला बोल रहा था कि अभी तो बैंकों के खिलाफ चल रहा है, जबकि मैं सभी को जगा रहा था और मेरा सत्य मेरी साइट samaymaya.com पर पड़ा और देखा जा सकता है।
अभी भी वक्त है हरामखोर जंगली जानवरों रूपी 130 करोड़ भेड़ों, सरकारी भी आपका अपना है। सारी बैंक्स मैं पैसा आपका ही जमा है इसलिए वह बैंकस भी आपकी अपनी है बीमा कंपनियां भी आपकी अपनी है। यह मत सोचो कि वह किसानों के खेत और किसानी, बाजार, मंडिया दुकाने उद्योग फैक्ट्रियां सब, खत्म कर रहा है बैंक खत्म कर रहा है सब आपके अपने हैं जिस दिन ये खत्म हो जाएंगे, तो दो वक्त की रोटी के लाले पड़ जाएंगे, और फिर सम्मान अपमान रोजगार तो गया भाड़ में, सरेआम भूख से मरता क्या न करता लूटपाट चोरी डकैती आगजनी हिंसा बलात्कार सब कुछ करके भी दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करेगा? तो फिर कब कौन लपेटे में आ जाएगा, अभी भी कोरोनावायरस के पाखंड की आड़ में एक तरफ 5 करोड लोगों को मौत के घाट देकर पहले डॉक्टरों से उनकी जमीन जा जात धंधा पानी खेती किसानी सब को लूट वाकर भी उन्हें अकाल मोदी दी गई दूसरी तरफ जो बच गए उनको 24 घंटे तक बांटकर ही टीका लगाया जबरदस्ती टीका लगाया गया। पहले एक लगवा लो फिर दूसरा लगवा लो फिर तीसरा बूस्टर डोज आएगा फिर चौथा कैटालाइजर डोज आ जाएगा। आप जब तक जिंदगी से अपाहिज होकर या तो मर जाए या बीमार लाचार होकर अस्पतालों में भर्ती रहकर अपनी जमीन ज्यादा बेचकर अपना इलाज करवाते रहें का पाखंड है। मैं बराबर लिख रहा हूं और जनता समझने को तैयार नहीं है हिंदुओं आकर बुक हो अपने अधिकारों को समझो और उनको छीन लो। कोई यहां अमर फल खाकर नहीं आया कुत्तों की मौत भूख बेरोजगारी से मरने की अपेक्षा 25-50 को भी अकाल अंतिम यात्रा करवा कर। उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए मौत ही बाटनी है।
हकोऔर अधिकारों की लड़ाई के लिए बाहर निकलिए धन्यवाद
निवेदक लेखक एवं प्रस्तुति
प्रवीण आजमेरा
समय में समाचार पत्र
इंदौर





