केदारनाथ, बद्रीनाथ सहित तमाम तीर्थस्थलों को नष्ट करने की योजना तैयार है. हिंदुत्ववाद के नाम पर इस पापकर्म को सही ठहराने वाले हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता भी तैयार हैं. जिनकी आत्मा बिक चुकी है.
दीपक कुमार केशरी
नरेंद्र मोदी और योगी ने काशी में जो किया है, वह औरंगजेब के ध्वंस से कई गुना बढ़कर है. इसे मूर्ख अनपढ rss/bjp भक्त मोदी योगी के समर्थक नही समझ सकते हैं.
काशी के स्वरूप को वो जानते नही है. काशी के मूल स्वरुप को समझना है तो स्कन्द पुराण के काशी खण्ड में काशी के स्वरूप को पढ़ो फिर उत्तर मिलेगा, की ये गलियों वाली काशी किसने बनाई थी. घर घर मे और एक एक कमरों में पौराणिक देवता कैसे प्रतिष्ठित थें. जिनमे अधिकांश को तोड़ दिया गया है.
भगवान् विश्वनाथ जिस महल में निवास करते हैं. उसका नाम मोक्षविलास महल है. जिसमे सैकड़ों कमरे हैं. हर कमरे में एक एक देवता निवास करते हैं. विश्वनाथ जी महल के मध्य में बैठें हैं. पूरा महल गंगा के किनारे तक हैं. समय के साथ भले बदलाव हो गया पर नरेंद्र मोदी के मंदिरों को तोड़वाने से पूर्व तक वो सभी देवता एक एक घरों के जिन एक एक कमरों में स्थापित थें. वो उस महल के कक्ष हैं. सभी देवता स्वयम्भू थें. इन्हें जानने के लिए स्कन्द पुराण में वर्णित काशी के राजा देवोदास की कथा और भगवान् शिव का हिमालय गमन फिर पुनः उन्हें वापस काशी में बुलाने के लिए भगवती देवी, भगवान् गणेश, भगवान् आदित्य, भगवान् केशव के अनेक रुप बनाकर काशी में आना. वही काशी में स्थापित हो जाना आदि सबकुछ पढ़ना पड़ेगा.

भगवान गणेश ने 56 रूप बनाकर काशी के 56 स्थानों पर स्थापित हुयें थें. जिनमे प्रथम पाँच जो विनायक हैं. जो सुमुख, दुर्मुख, मोद, प्रमोद आदि हैं. इनमें से मुख्य 3 विनायकों को नरेंद्र मोदी योगी सरकार ने तोड़ दिया है. इन्ही पाँच विनायकों के दर्शन करके काशी में परिक्रमा चलती थीं. मुख्य दो परिक्रमा जिसमे अन्तर्ग्रही और पंचक्रोसि परिक्रमा है. वो आज बन्द हो गयी है.
अन्तर्ग्रही परिक्रमा में काशी के भीतर घूम घूम कर देवताओं को ढूंढ ढूंढ कर दर्शन किया जाने की परंपरा है. पंचक्रोसि में काशी और उसके आस के 5 कोस में फैले सभी देवताओं का दर्शन किया जाता है. इन यात्राओं का वर्णन पुराणों में है इसका महात्म्य बहुत बड़ा है पर नरेन्द्र मोदी और योगी के कारण आज ये यात्रायें विलुप्त हो गयी है.
अन्तर्ग्रही में आने वाले लगभग सभी देवताओं को बंगाली मुसलमानो के द्वारा हथौड़ा और बुलडोजर से नास्तिक मोदी योगी विशाल सिंह ने तोड़वा दिया गया है.
काशी में केवल एक विश्वनाथ जी के मन्दिर का ही महत्व नही है. वैदिक शास्त्रों में शिव, विष्णु, गणेश, सूर्य और देवी इन पाँचों देवताओं में भेद नही है. सब एक ही हैं ऐसा बताया गया है.
विश्वनाथ जी के नाम पर काशी के अन्य प्राण प्रतिष्ठित देव विग्रहों को तोड़ना महापाप है. यह इस देश के पतन, महाविनाश का कारण बन चुका है. देवविग्रह बालक के समान बताया गया है. इस प्रकार नरेन्द्र मोदी और योगी के ऊपर हजारों बालको के हत्या का पाप लगा है. संघी नास्तिक गोलवरकर विचारधारा भले ही अवतारों एवं देवताओं को मान्यता नही देती है. पर इन हत्याओं का प्रकोप पूरे देश मे चल रहा है. शीघ्र बड़ा भयानक विनाश निकट है.
स्कन्द पुराण में वर्णित काशीखण्ड में एक विश्वनाथ जी के अतिरिक्त 1500 से ज्यादा देवता हैं. जो स्वयं प्रतिष्ठित है. कुछ अनेक ऋषियों ने देवताओं ने और पुर्व युगों राजाओं महापुरुषों ने स्थापित किया था.
कलियुग में अनेक मन्दिर आज से 100-200 -500 -1000 साल या उससे पूर्व तक के स्थापित किये गयें हैं.
तुलसी दास जी द्वारा स्थापित हनुमान मन्दिर भी तोड़ दिया गया है.
शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित सरस्वती जी का मंदिर तोड़ दिया गया है. भारत माता महालक्ष्मी मंदिर भी तोड़ दिया गया है.
शंकराचार्य जी की मूर्ति, मंडन मिश्र जी की मूर्ति, व्यास भवन, उसके भीतर के 3 मंदिर भी तोड़ दियें गयें है.
विश्वनाथ की कचहरी में अन्नपूर्णा जी सहित अनेक प्रतिष्ठित विग्रह मूर्ति और मंदिर तोड़ दियें गयें हैं. आज से 2 साल पहले मैंने काशी में लाइव वीडियो किया है जिसमे सैकड़ो शिवलिंग मन्दिर मूर्ति टूटा हुआ मैंने दिखाया था. उस वीडियो में भी जो मन्दिर नही टूटे थे. आज सब गायब हैं. सारे मन्दिर पौराणिक जीवित प्राणप्रतिष्ठित थें.
हिंदु लेबर.लोगो ने शिवलिंग तोड़ने से मना कर दिया था. तब बंगाली मुसलमान लेबर.लोगो को बुलाकर मन्दिर तोड़वाये गयें है. हथौड़े से शिवलिंग तोड़े गयें है. आपको ध्यान होगा कुछ दिन पहले एक बिल्डिंग गिरने से कई सारे बंगाली मुसलमान लेबर मर गयें थे. वो सब वही थें जो कॉरिडोर में काम कर रहे थें.
अविमुक्तेश्वर महादेव, गोविंदेश्वर महादेव, राधा कृष्ण मंदिर, सुमुख विनायक, दुर्मुख विनायक, प्रमोद विनायक, अक्षय वृक्ष आदि सैकड़ो महत्वपूर्ण विशेष मन्दिर भी तोड़ दियें गयें है.
काशी की गलियों के राजनैतिक मानसिकता के मूर्ख हिन्दू निन्दा करते हैं वो शिव जी के नागों के द्वारा टेढ़े मेढ़े चलने से बनी थी. शिव जी के साथ 64 योगिनी, 56 विनायक, 12 आदित्य इसी तरह 14 केशव और अनेक शिवलिङ्ग स्वयं देवताओं ऋषियों के द्वारा स्थापित मन्दिर थें.
काशी 3 खंड में बटी है. केदार खंड, विश्वेश्वर खंड, और केशव खंड. विश्वेश्वर खंड वो है जिसमे भगवान् विश्वनाथ रहते हैं. विश्वेश्वर खंड में मोक्ष विलास महल जिसके कई द्वार थें. जिसमे कई घर और उसमें कमरे थें. अनेकों देवता निवास करते थे. जिनकी पूजा परम्परा से हजारों वर्षों से चली आ रही है.
आज पूरा मोक्ष विलास महल उनके कमरे देवताओं सहित उखाड़ उखाड़ कर फेंक कर एकमात्र अहिल्याबाई द्वारा बनाये मन्दिर को दिखावे के लियें छोड़कर और उधर मूल काशी विश्वनाथ स्थल जो मस्जिद में हैं. उस पूरे मस्जिद को सुरक्षित बचा कर मीडिया, आई टी सेल, मूर्ख कार्यकर्ता और काशी विद्वत परिषद के नीच सदस्यों के साथ मिली भगत करके आम जनता को यह भले बता दिया है, की नरेंद्र मोदी और योगी ने बहुत बड़ा विकास कर दिया है. इससे स्कन्द पुराण और सैकड़ो प्राण प्रतिष्ठित विग्रहों के हत्या का सच छुप नही जायेंगा.
व्यास जी स्कन्द पुराण में कहते हैं, की 5 कोस में फैली पूरी काशी ही ज्योतिर्लिंग का स्वरुप है. काशी में टूटे हुए शिव प्रतिमा को भी नही हटाने का आदेश शास्त्र में लिखा है. यह भी लिखा है, की काशी में सुअर भी अपने स्वभाव के विपरीत जाकर जमीन को नही खोदता है. उसे भी पता है, यदि वो ऐसा करता है, तो न जाने काशी में कहाँ पर शिवलिंग स्थापित हो. जो उसके खोदने से अपने स्थान से उखड़ जायेंगा.
काशी विद्वत परिषद के सुअरों के साथ मिलकर समस्त शास्त्रों के विरुद्ध जाकर प्राण प्रतिष्ठित निरंतर पूजित देव विग्रहों को फर्जी चालन पद्धति के बहाने तोड़ तोड़ कर फेंकवा देने वाले सनातन धर्म विरोधी हिंदुत्ववादी संघी विचारधारा ने पूरा मोक्ष विलास महल नष्ट करके, उसमें विराजमान स्वयम्भू हजारों प्राण प्रतिष्ठित देवताओं की हत्या करके, उन देव मंदिरों के स्थान पर शॉपिंग मॉल, शौचालय, पार्किंग, दुकानें आदि बनाकर जो महापाप इस सत्ता ने किया है. उसका प्रायश्चित rss/bjp की हिंदुत्ववादी विचारधारा देने वाले उसको पोषित करने वाले उसको आज तक समर्थन करने वाले एवं तमाम कुतर्कों से काशी को उजाड़ने वालों भोगना ही पडेगा.
काशी मे स्वयं देवताओं ने भीड़ लगाई है. वहाँ मनुष्यों को भीड़ से मुक्ति और सुविधा देने के लियें, एक मन्दिर को छोड़कर हजारों मंदिरों को तोड़ना कौन से सिद्धान्त से सही मान लिया जायेंगा.?
आज पूरा विश्वेश्वर खंड नरेंद्र मोदी और योगी ने साफ कर दिया है. जिसमें सैकड़ो महत्वपूर्ण मन्दिर, गुप्त साधना के लिए बनायें गुप्त मन्दिर, अनेकों पौराणिक कुएं जिनका वर्णन पुराणों में भी है. सबको जड़ से उखाड़ उखाड़ के फीकवा दिया है. सैकड़ो शिवलिंग तो अस्सी नाले में से लिकाले गयें थें.
rss/bjp के हिंदुत्ववादीयों ने मस्जिद को पूरी तरह सुरक्षित करके अलग थलग कर दिया है. काशी के सैकड़ो मन्दिरो को तोड़कर कह रहे हैं. मंदिर का विस्तार कर दिया है. जब.की पूरा विश्वेश्वर खंड ही एक महल है. जिसके अनेकों कमरों में एक एक देवता रहते हैं. काशी ने क्या खो दिया है. यह जानने के लियें स्कन्द पुराण काशी खंड पढो, तब पता चलेगा की काशी का कितना विनाश कर दिया गया है.
सैकड़ो हजारों प्राण प्रतिष्ठित जीवित देवमूर्तियों की हत्या करके यह चमचमाती मोटी मोटी दिवालो का जो ढाँचा काशी के विनाश का कारण बनेगा.
आज अनेकों मन्दिरों को तोड़कर वहां टॉयलेट, पार्किंग, और मॉल बन गया है. लोग समझ रहे हैं, की बहुत बड़ा काशी का विकास हो रहा है.
rss/bjp की आई टी सेल और व्हाट्सअप नें बहोत झूठ फैलाया है. जब की सच्चाई यें है.👇
1) काशी में किसी भी मुसलमान का घर नही तोड़ा गया है. सब हिन्दुओं का घर तोड़ा गया है. जिसमें 80% ब्राह्मणों का घर है.
2) काशी मे कई लोगों का घर जबरदस्ती गुंडागर्दी करके खरीदा गया है.
3) काशी में केवल एक घर मे मन्दिर के पास शौचालय था. जिसके नाम पर संघी भाजपाइयों ने मंदिरों को तोड़ने को सही ठहरायां हैं. जब की काशी में सैकड़ों पौराणिक, स्वतंत्र मन्दिर तोड़े के फेकें गयें हैं.
4) व्यासजी का घर आज भी बेचा नही गया है. उनका घर जबरदस्ती छीन कर तोड़ा गया है. जिसमें व्यासपीठ उसके मन्दिर उनके कई दुर्लभ ग्रंथ एवं वस्तुएं नष्ट कर दी गयी हैं.
5) काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को व्यापार के दृष्टि से संचालित करने की योजना पर बनाया गया है.
देश के तमाम हिंदु तीर्थ स्थलों के मूल स्वरूप को नष्ट कर उसे व्यापारिक दृष्टि से पयर्टन का केंद्र बनाया जा रहा है.
rss/bjp द्वारा हिंदुत्ववाद.की स्थापना के लिये सनातन धर्म सनातन संस्कृति की परम्परा को नष्ट किया जा रहा है.
केदारनाथ, बद्रीनाथ सहित तमाम तीर्थस्थलों को नष्ट करने की योजना तैयार है. हिंदुत्ववाद के नाम पर इस पापकर्म को सही ठहराने वाले हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता भी तैयार हैं. जिनकी आत्मा बिक चुकी है.✍️ © दीपक कुमार केशरी की रचना..
विजय गौतम




