मुनेश त्यागी
नाम लेते गरीबों का, अमीरों की बोलियां,
वन्देमातरम बोलकर, लूट रहे है खलिहान,
साथ दिया अंग्रेजों का, अब बता रहे कुर्बान,
वन्देमातरम बोलकर, हुए सेठों पर मेहरबान।
हिंसा तो जारी रही, जख्मी किये। घरबार,
वन्देमातरम बोलकर, अब सजा रहे दरबार।
बंदेमातरमी कह रहे, किसान-मज़दूरों से दूर,
वंदेमातरम् बोलकर, पैसे वालों पर कुरबान,
नोटबन्दी के नाम पर ,जनता कर दी बेहाल,
बंदेमातरम बोलकर, लूट लिया धन माल।





