एस पी मित्तल, अजमेर
एमबीए की पढ़ाई करने का यही मतलब होता कि अच्छा पैसा कमाया जाए। भारत के युवा विदेशों तक एमबीए की पढ़ाई करते हैं। लेकिन अजमेर जिले के दाता गांव निवासी 25 वर्षीय और मात्र 12वीं पास युवक सेठा सिंह रावत अपने कार्य से बड़े बड़े एमबीए को पीछे छोड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के नारे पर अमल करते हुए सेठा सिंह अब पूरे भारत में अजमेर की पहचान बना रहा है। सेठा सिंह रावत ने अजमेर के पुलिस लाइन क्षेत्र में किराए पर एक परिसर लेकर टी शर्ट, केरिबेग, लैपटॉप बैग, गर्म जैकेट आदि बनाने का काम कर रहा है। इसके लिए महिलाओं को तीन माह का नि:शुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षित महिलाओं को न्यूनतम 6 हजार रुपए प्रतिमाह के वेतन पर रोजगार भी उपलब्ध करवाया जाता है।
आज सेठा सिंह के डिजिटल जनरेशन संस्थान में करीब 50 महिलाएं एवं युवक काम कर रहे हैं और उनके संस्थान का वार्षिक कारोबार एक करोड़ रुपए के पार हो गया है। सेठा सिंह चाहता है कि वह एक हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाए। देश के लाखों 12वीं पास युवक जब पांच हजार रुपए की नौकरी के लिए भटक रहे हैं, तब 25 वर्षीय सेठा सिंह कम पढ़े युवकों को प्रेरणा देने वाला काम किया है। सेठा सिंह ने बताया कि डिजिटल क्षेत्र में सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटर से जुड़ कर अपने उत्पाद देशभर में बेच रहा है। चूंकि कॉमन सर्विस सेंटर देश के हर गांव में है, इसलिए उनके उत्पादों की मांग हमेशा बनी रहती है। 200 रुपए वाली टी शर्ट पर संबंधित संस्थान का मोनोग्राम छाप कर दिया जाता है। चूंकि संस्थान का उद्देश्य सेवा का भी है, इसलिए ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी 200 रुपए में ही शामिल है। 200 रुपए वाली टी शर्ट बड़े शो रूम में 2 हजार रुपए तक की मिलती है। बाजार में कपड़े के जिस मास्क के 100 रुपए तक वसूले जा रहे हैं, उसी क्वालिटी का मास्क सेठा सिंह का संस्थान मात्र 10 रुपए में दे रहा है। महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि मास्क पर संबंधित संस्थान का मोनोग्राम भी अंकित किया जाता है। देश के किसी भी कोने में 10 रुपए वाले मास्क की सुपुर्दगी ली जा सकती है। सेठा सिंह ने अपने छोटे से संस्थान के माध्यम से कोरोना काल में पांच लाख मास्क बेचे हैं। तीसरी लहर को देखते हुए मास्क की मांग लगातार बढ़ रही है। सीएससी का राष्ट्रीय नेतृत्व भी सेठा सिंह की लगन और मेहनत से खुश है, इसलिए कपडे के उत्पाद के लिए सेठा सिंह से अनुबंध कर रखा है। सेठा सिंह का मानना है कि डिजिटल क्रांति की वजह से अजमेर के उत्पाद देशभर में बेचना आसान हो गया है। अब तो हैड ब्लॉक प्रिंटिंग शर्ट भी तैयार की जा रही है। उत्पादक की सामग्री खरीदने में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। सेठा सिंह ने कहा कि जो युवक स्कूल े बाद कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ाई नहीं कर सके हैं, उन्हें निराश होने की जरुरत नहीं है। मेरी तरह वे भी अन्य को रोजगार देने वाला बन सकते हैं। कॉमन सर्विस सेंटर के जिला प्रबंधक भवानी सिंह बुनकर ने बताया कि सेठा सिंह ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से मुकाम हासिल किया है। मोबाइल नंबर 9610088970 पर सेठा सिंह रावत की हौंसला अफजाई की जा सकती है।





