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निसर्ग के साथ अपराध है प्रेमी-प्रेमिका को पति-पत्नी के बंधन में बांधना

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आरती शर्मा (बोधगया)_

चेतना विकास मिशन के निदेशक डॉ
विकास मानवश्री के शब्दों में कहूं तो : “सत्य परिस्थितियों के अनुसार चेहरा नहीं बदलता। सत्य समाज के हिसाब से परिवर्तित होकर दोगलापन नहीं दिखाता। सत्य सिर्फ सत्य होता है। इसलिए सत्य की अभिव्यक्ति समाज के ठेकेदारों और उनके सामाजिक ढांचों पर क्या असर डालेगी : इसके हिसाब से सत्यशील व्यक्ति नहीं चलता।”
☄️प्रेमिका को पत्नी के रूप में परिवर्तित कर देना अपराध है। पत्नी यानी पति के नीचे रखी जाने वाली चीज। व्यवस्था निर्मित क़ानून तो इसकी सजा नही देगा, लेकिन प्रकृति खुद इसकी सजा दे देती है।

इसी प्रकार प्रेमी को पति बना देने से इस सम्बन्ध का सौंदर्य नष्ट हो जाता है। हसबैंड/हॉउसबैंड यानी घर का बाजा।
दूसरी तरफ हसबैंड शब्द उसी धातु से बना जिससे हस्बेंड्री कृषि कर्म शब्द बना है।हसबैंड पति वह है जो बीज बोने के लिए स्त्री का उपयोग खेत की तरह करता है।

प्रेमी- प्रेमिका शब्द परमात्मा की ओर इशारा करते हैं और प्रेम परमात्मा सावित भी होता है। विवाह बंधन :कोई भी बंधन क्यों?
मानव जीवन का लक्ष्य मुक्ति है– मोक्ष। प्रेम वास्तविक खुशी- तृप्ति देकर मोक्ष देता है। प्रेम बंधन नहीं, मुक्ति है।
इसलिए :
“न किसी अभाव में जीएं।
न किसी के प्रभाव में जीएं।
जो समझे- पूजे आपको ~
उस सङ्ग स्व’भाव में जीएं।।”

ऐसे नहीं जी पाएं तो व्हाट्सप्प 9997741245 पर हमें बताएं।
🥏चेतना विकास मिशन

Ramswaroop Mantri

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