मुनेश त्यागी
बेटी मारी, बहु जलाई
औरत को भी रौंद दिया,
भारत के महान बेटों
यह क्या तुमको हो गया?
हो गया भगवान अंधा
खुदा भी बहरा हो गया,
गोड को अधरंग मारा
देवलोक भी सो गया।
कसमें तो खाई थीं तुमने
साथ जीने मरने की,
दुश्मनी और नफरत के फिर
बीज कौन बो गया?
कहां गई वो ईद-दिवाली
होली मिलन का क्या हुआ?
ढूंढो तो वह प्यार-मोहब्बत
भाईचारा कहां खो गया।
बस्ती फूंकी, हिंसा बोई
धर्म का कारोबार किया,
होना था हिंदुस्तानी तुझको
तू हिंदू-मुसलमां हो गया।





