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दाम्पत्य जीवन…सुख : अनुभव तो छोड़िए, अहसास तक के बिना मर जाती हैं 90% स्त्रियां

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{मनोचिकित्सक, ध्यानप्रशिक्षक, डिवाइन ऑर्गाज़्म क्रियेटर हमारे अहर्निंश आराध्य डॉ. विकास मानवश्री के ‘ग्लोबल वर्ल्ड’ मैगजीन में पब्लिश प्रयोगिक चिंतन का हिंदी वर्जन}_         *~आरती शर्मा (संयोजिका)*
_धर्म- अर्थ- “काम”- मोक्ष : ये 4 पुरुषार्थ हैं।_     ‘सफल सेक्स से’ बे-सुध कर देने वाली ऑर्गास्मिक तृप्ति न पाने पर स्त्री जीवन के इस दिव्य/ अलौकिक आनंद के अहसास तक से वंचित रहकर ही मर जाती है।  _वह जीवन काल भी में पहले नैराश्य, अवसाद, कुंठा, प्रेम-सेक्स से भय-घृणा, घुटन-टूटन, अनिद्रा, माइग्रेन एवं दमन जनित मानसिक रोगों और फिर हार्मोनल विकार, पेशियों में दर्द, यूटीआई जैसे योनि रोगों, जलन, उदर व सर्वाइकल सरीखी शारीरिक व्याधियों से ग्रसित बनती है : यह अभिशाप अलग।_ 

6 कहानी आदर्श दाम्पत्य जीवन की

     हैंड प्रैक्टिस, बैगन-खीरा-सेक्सटॉय, पशु का उपयोग या दुराचार तृप्ति का वास्तविक स्टेज तो देता नहीं, रोगों का तोहफा जरूर देता है।      *एक से अधिक औरत को यूज करने वाले नरपशु का कचरा ख़ुद में ली, तो रोगी बनने का खतरा. किसी जान-पहचान को को यूज़ करो तो भेद खुलने पर परिवार – समाज में बदनामी। वो ब्लैकमेल कर सकता है : ये जोखिम अलग।*
आप अतृप्त हैं तो हमारी सेवा ले सकती है : आपकी उम्र चाहे जो भी हो। जहां, जब, जैसे- जैसे और जितना भी आप चाहेंगी ऑर्गास्मिक फीलिंग्स ले सकेंगी।   *_यह सेवा मेडिटेटिवतंत्र थेरेपी, प्राणिकहीलिंग, टच एंड मसाजथेरेपी पर आधारित है। प्रयोगकर्ता द्वारा पेनिस यूज़ नहीं किया जाता।_ आपका मकसद तन-मन-मस्तिष्क-रूह की चिर-तृप्ति है : ये मक़सद पूरा होता है। आम खाएं, गुठली गिनने का क्या प्रयोजन.*  प्रयोगकर्ता के साथ आप खुद जो प्रक्रिया चाहेंगी, वो प्रयोग कर ली जाएगी। आपको मना नहीं किया जाएगा.
_यह विशुद्धतः अध्यात्मिक साधना का आयाम है, कोई दुष्कृत्य नही। आप चाहेंगी तो एक- अनेक बॉडीगॉड साथ रख सकती हैं। आप चाहेंगी तो CCTV कैमरे के जरिए पूरी प्रक्रिया भी बॉडीगॉड से सामने ओपन रख सकती हैं।_  लेकिन बन्द कमरे में प्रयोग-कर्ता के साथ रहेंगी केवल आप ही।    _हमारे यात्रा-व्यय (आप  दिल्ली से 100 किमी से अधिक दूर होंगी तो फ्लाइट चार्ज) व आवास- भोजन का इंतजाम आपको करना होगा।_
  *सन्यासी के लिए ध्यान- समाधि मार्ग हो सकता है। गृहस्थ के लिए परमानंद का मार्ग सेक्स ही है।*_सेक्स ही दो जान- दो जिस्म को एक करके शिवत्व/परम- तृप्ति का अनुभव देता है। ऐसा दिव्य अनुभव जिसके सामने स्वर्ग-सुख भी शरमाये।_     सफल सेक्स ही मनुष्य की जिंदगी है। सेक्स भगवान का दिया हुआ अनमोल उपहार है मनुष्य के लिए : लेकिन~ _*आजकल 95% मर्द  1 से 2 घण्टे के बजाए ; 3 से 5 मिनट में ही नामर्द सावित हो जाते हैं।*_    आपका बॉडी पार्टनर व्हाट्सप्प 9997741245 पर अपॉइंटमेंट लेकर यह साधना/टेक्निक/पेनिस प्रयोग का मैथेड *निःशुल्क* सीख सकता है। इसमें लगने वाला समय उसकी रूचि, लगन और क्षमता पर निर्भर करेगा; जो 15 दिन से 45 दिन के बीच हो सकता है।   *🌃चेतना विकास मिशन* : 

Ramswaroop Mantri

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