*Satya Veer Singh
बजट में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी ख़ुफ़िया विभाग के बजट में हुई है, 125%!! हुकूमत भी मानती है कि जब लोगों से रोज़गार के नाम पर साल में 100 दिन की दिहाड़ी मिल जाने पर जैसे तैसे दो सूखी रोटी का जुगाड़ भी छीना जाएगा, 7 साल से किसानों की आय डबल करने के रसीले जुमले की हकीक़त वो लोग समझेंगे जो पहले ही तपे हुए हैं, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सरकारी शिक्षा का सम्पूर्ण रूप से भट्टा बिठाया जाएगा, मंहगाई आसमान को फाड़कर असहनीय हो जाएगी, मुफ़्त थैलियाँ बंटनी बंद हो जाएंगी, 10 मार्च के बाद पेट्रोल, डीज़ल, गैस के दामों में उबाल आएगा तो सिसकते, कराहते लोग विद्रोह करेंगे. ऐसे में उनके पीछे ‘काले जासूस’, पेगासस के बड़े भाई मेगासस को छोड़ा जाएगा, उन्हें डराया जाएगा. हर दमनकारी तानाशाह, फासिस्ट बिलकुल इसी तरह सोचता है. लोग डरना बंद भी कर सकते हैं ये हकीक़त वो अपने ज़हन में आने ही नहीं देता क्योंकि वो बहुत डरावनी होती है. वो चाहता है कि दबे कुचले लोग डर डर कर ‘शांति’ से मर जाएँ. हुकूमत इस हकीक़त को भी नहीं देखना चाह रही कि हर चुनाव से पहले ‘राजनीतिक वेश्यावृत्ति’ करने वाले दल-बदलू भी अब ई डी, इनकम टैक्स, सी बी आई से डरना बंद कर चुके हैं.

बेहद शर्मनाक, नंगे रूप से कॉर्पोरेट परस्त और घोर जन विरोधी बजट.
असल ताक़त सरकार के उस लाल रंग के बसते में नहीं, आक्रोशित जन मानस के हाथ में लहराते लाल झंडों में है, ये बात किसानों द्वारा एक बार समझाने से मोदी सरकार समझने वाली नहीं, बार-बार सिद्ध करनी पड़ेगी. सडकों पर रौनक बढ़ने वाली है. ये बजट शोषित-पीड़ित-मध्यम वर्ग को असल ‘अमृत काल’ लाने के लिए सडकों पर खींचकर लाएगा, ये बात पक्की है.
*Satya Veer Singh




