,मुनेश त्यागी

भाजपा पिछले चुनाव में बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, विकास, सस्ता पानी बिजली खाद और कीटनाशक दवाइयां, सस्ता एवं सुलभ न्याय वादी के दरवाजे पर और सुशासन के नारे देकर सत्ता में आई थी और जनता ने उसे भरपूर वोट देकर सत्ता में बिठाया था और सत्ता सौंपी थी और भी बहुत से नारे दिए गए थे और वादे किए गए थे। तब जनता ने सरकार से आस लगाई थी कि वह जनता की समस्याओं का निदान करेगी उसकी समस्याओं को हल करेगी और एक नया शासन प्रशासन जनता को देगी।
मगर पांच साल बाद, वर्तमान चुनाव आते-आते उपरोक्त नारे, वायदे, मुद्दे और कार्यक्रम हवा हवाई हो गए हैं। योगी सरकार अपने चुनावी नारों वादों को जैसे भूल गई है। हकीकत यह है कि उपरोक्त मुद्दों को लेकर जनता परेशान है और उसमें त्राहिमाम मचा हुआ है उपरोक्त मुद्दों के अलावा योगी सरकार ने कई समस्याएं भी खड़ी की हैं जैसे संवैधानिक मूल्यों को धूल धूसरित करना, समता समानता धर्मनिरपेक्षता जनतंत्र आजादी भाईचारा और समाजवादी मूल्यों पर लगातार हमले हो रहे हैं और भारतीय संविधान की जगह मनुस्मृति को स्थापित करने की चालें चलना और यह काम धर्म संसद के नाम पर तथाकथित साधु-संतों से कराना और उन्हें शह और सहयोग प्रदान करना और उनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्यवाही न करना। विपक्षियों और सरकार से मतभेद रखने वालों को देशद्रोही तक कहा जा रहा है।
इसके अतिरिक्त समाज में बेहद आर्थिक असमानता बढ़ी है, हिंदू मुसलमान की खाई को बढ़ाया गया है और गहरा किया गया है। समाज में भाईचारे की भावना को तोड़ा गया है। किसानों पर गाय सांड और आवारा पशुओं के रूप में एक नई त्रासदी आ गई है। ये आवारा पशु किसानों की फसलों को नेशनाबूद और बर्बाद कर रहे हैं। किसान बेहद परेशान हैं पर सरकार इस ओर से आंखें मिली हुई है और किसानों की कोई मदद नहीं कर रही है। बेरोजगारी का आलम यह है कि यूपी में 30 लाख बेरोजगार काम ढूंढते ढूंढते थक गए हैं। बेरोजगारी में यूपी पूरे देश में टॉप पर है। उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों में कई लाख पद पिछले कई सालों से खाली पड़े हुए हैं मगर सरकार उन्हें भरकर नौजवानों को नौकरी देने को तैयार नहीं है। बेरोजगार हद से ज्यादा हताश और निराश हैं, जैसे वे जिंदगी की जंग हार गए हों।
जनता को कोई भी निजात न मिलने के कारण और उपरोक्त सब समस्याओं के कारण इस बार का चुनावी माहौल बदला हुआ है। बीजेपी मुद्दा विहीन है, जनता के सामने रखने के लिए उसके पास कोई मुद्दा नहीं है। हां साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण और खौफ के अलावा, उसके पास जनता को दिखाने, देने के लिए कुछ भी नहीं है। वह नकारात्मक मुद्दों के सहारे चुनावी मैदान में हैं इस माहौल में गोदी मीडिया और अधिकांश अखबार उसकी भरपूर मदद कर रहे हैं।
इसके विपरीत समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल सकारात्मक मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में है। बिजली की बढ़ी हुई दरों को घटाना, महंगाई पर रोक लगाना, पुरानी पेंशन बहाल करना, किसानों को समय से भुगतान करना, फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देना, बेरोजगारों को काम देना आदि आदि मुद्दे उनके चुनावी कार्यक्रम में है जिन्हें जनता का समर्थन मिल रहा है और इस गठबंधन ने चुनाव में बढ़त बनाई हुई है।
किसान आंदोलन ने भी जनता को बहुत से मुद्दों के जवाब मुहैया कराए हैं। गूंगी जनता को जबान और वाणी प्रदान की है। जनता सरकार से सवाल पूछ रही है जिनका जवाब सरकार के पास नहीं है। इसी के साथ बहुत सारे लोग और नौजवान सही जवाबों के साथ जनता के बीच में है और जनता में अपनी बात कह रहे हैं और जनता को सही राह दिखा रहे हैं। किसान आंदोलन ने हिंदू मुस्लिम भाईचारे को पुनर्स्थापित किया है। लोग अपनी भूलों की गलतियां मान रहे हैं और अपनी एकता को और ज्यादा पुख्ता कर रहे हैं। अब लोग हिंदू मुसलमान के नाम पर बंटने को तैयार नहीं है।
रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दों पर छात्र, नौजवान, किसान, मजदूर, सरकारी नीतियों के खिलाफ बहुत मुखर हैं और बीजेपी से अलग होकर सपा रालोद की जानिब जा रहे हैं। सरकारी विभागों में फैले आकंठ भ्रष्टाचार से बहुत परेशान हैं। सरकार का कोई भी विभाग भ्रष्टाचार से अछूता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, तहसील, कचहरी में भ्रष्टाचार ने तबाही मचा रखी है, वहां जनता की कोई सुनने वाला नहीं है और वहां पर भ्रष्टाचार के बिना कोई कार्य नहीं होता।
आज संयुक्त किसान मोर्चा के हनान मौल्ला, योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत ने मेरठ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें भारी संख्या में पत्रकार मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान मोर्चा के नेताओं ने घोषित किया की भाजपा को सजा दो क्योंकि यह सरकार झूठी, विभाजन करने वाली, किसान विरोधी, मजदूर विरोधी, जन विरोधी दुकानदार विरोधी और नौजवान विरोधी है। यह झूठ बोल कर वोट लेती है और सत्ता में आकर अपने वायदे और नारे भूल जाती है और अपने पूंजीपति दोस्तों की मदद करती है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किसान आंदोलन खत्म करते समय जो समझौता किया था, आज तक उसकी एक भी शर्त पूरी नहीं की है और वह समझौता अधर में लटका हुआ है सरकार की इन नीतियों के खिलाफ जनता में भारी रोष है। अतः उसे सजा देना जरूरी है और सत्ता से बाहर करना भी सबसे ज्यादा जरूरी है।
अब लोग इस सरकार से इस जनविरोधी सरकार से निजात पाना चाहते हैं अब जनता ने अखिलेश और जयंत के गठबंधन से जनसमस्याओं से मुक्ति की उम्मीद लगा ली है। चुनाव के माहौल को देखते हुए सपा रालोद का पलड़ा भारी है, लोग उनकी चुनावी सभाओं, गोष्ठियों में उमड़ रहे हैं। बीजेपी को कई विधायकों को लोगों के बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है कई स्थानों पर ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। बीजेपी के विधायक बीजेपी को छोड़कर गठबंधन का दामन थाम रहे हैं और चुनावी बयार को प्रभावित कर रहे हैं।
यूपी के चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भाजपा को सजा देने और सत्ता से बाहर करने की अपील की है। इससे भी चुनाव में अखिलेश और जयंत के नेतृत्व में गठबंधन को बढ़त और मदद जरूर मिलेगी। संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने सोने में सुहागे का काम किया है। चुनाव परिणाम बीजेपी के खिलाफ जाते दिख रहे हैं और सपा और रालोद के गठबंधन को बढ़त मिल रही है।




