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बजट के साथ कबूलनामा?

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शशिकांत गुप्ते

आज सीतारामजी बहुत ही प्रसन्नचित्त हैं। उनके चेहरे पर खुशी झलक रही है।
मैने जिज्ञासावश प्रसन्नता का कारण पूछा?5
सीतारामजी कहने लगे आप ने इस वर्ष का बजट देखा,सुना,या पढ़ा नहीं?
मैने कहा बजट में ऐसा कुछ है ही नहीं जिससे मेरे जैसा आम आदमी खुश हो जाए?
सीतारामजी मुस्कुराते हुए कहने लगे बजट के आर्थिक पहलू को छोड़ दो। जो महत्वपूर्ण बात बजट में कही गई है वह है सन 2047 तक देश उन्नति के शिखर पर पहुँच जाएगा।
सन 2047 को इसलिए महत्व है कि, वर्तमान सत्ता ने यह सहर्ष स्वीकार कर लिया अपना देश सन 1947 में स्वतंत्र हुआ। सन 1947 से गणना करने पर वर्तमान वर्ष स्वतंत्रता का 75 वर्ष मतलब अमृतवर्षा चल रहा है।
मैने पूछा इसमें आश्चर्य और महत्वपूर्ण बात क्या है?
सीतारामजी कहने लगे आप समझे नहीं,जो लोग सन 2014 में सत्तासीन होने पर ढिंढोरा पीट कर कहतें थे कि, सन 2014 के पूर्व देश में कुछ हुआ ही नहीं?
यह सुनकर मै(सीतारामजी) असमजंस्यता में था कि सन 2014 के पूर्व अपना देश स्वतंत्र भी हुआ था या नहीं?
मेरा(सीतारामजी) तो जन्म ही स्वतंत्रता के बाद का है। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को मैने सिर्फ पढ़ा है। इतिहास में यह पढा है कि,आज जो लोग राष्ट्र के प्रति इतना प्रेम प्रदर्शित कर रहें हैं,उनका तो आजादी के आन्दोलन में कोई योगादान भी नहीं रहा है।
मैने कहा बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने वाली कहावत चरितार्थ हो गई है?
सीतारामजी ने मुझे टोकते कहा, ऐसे गम्भीर मुद्दे पर व्यंग्य करना उचित नहीं है।
यह कहते हुए सीतारामजी ने अपनी बात जारी रखी।
इस वर्ष के बजट में जब कहा गया कि, सन 2047 में देश को स्वतंत्र होकर सौ वर्ष हो जाएंगे,तब मुझे पक्का विश्वास हो गया कि, देश 15 अगस्त 1947 को ही आजाद हुआ है।
कभी कभी मेरे मन बहुत संशय पैदा होता है।सन 2014 के पूर्व कहीं मै स्वप्नलोक में तो विचरण नहीं कर रहा था। मै बचपन से लेकर अभीतक के 71वर्ष की अपनी जीवन का यात्रा का अवलोकन करता हूँ तो, स्कूल की पढ़ाई कॉलेज की पढ़ाई। इंजीनियरिंग तक पढ़ाई के बाद शासकीय नोकरी,पदोन्नति हुई।मेरा विवाह भी शासकीय सेवा में कार्यरत प्राध्यापिका से हुआ।
दो बच्चों में एक उच्चशिक्षा प्राप्त कर निजी कम्पनी में उच्च पद पर कार्य कर रहा है। उसकी पत्नी भी स्नातकोत्तर उतीर्ण कर कॉलेज में प्रोफेसर है।
बेटी चिकित्साविज्ञान की पढ़ाई पूरी कर स्वयं का अस्पताल संचालित कर रही है।दामाद भी डॉक्टर ही हैं।
नोकरी के दौरान बैंक से ऋण प्राप्त कर मैंने स्वयं का अपना घर भी बनाया।
सोच सोच कर आश्चर्य होता है कि,सन2014 के पूर्व उक्त सारी सुविधाएं उपलब्ध थी?
इसीलिए इस वर्ष के बजट को देख,सुन और पढ़ कर मै प्रसन्न हूँ।
वर्तमान सत्ता को धन्यवाद प्रेषित करता हूँ। सन 2022/23 के बजट के प्रस्तुत करने के साथ देश की वित्त मंत्री यह क़बूल किया कि,देश सन 1947 में ही स्वतंत्र हुआ।
इसीलिए मै(सीताराम) इस वर्ष के बजट के आर्थिक पहलू को नजरअंदाज कर रहा हूँ।
मैने कहा बजट में बेरोज़गारी,आमआदमी की घटती आमदनी,आसमान छूती महंगाई और गरीबी आदि मूलभूत समस्याओं का तो कोई जिक्र ही नहीं ऐसे बजट की प्रशंसा करना व्यर्थ है।
सीतारामजी ने कहा आप अपनी आदतों से बाज नहीं आओगे।
मेरी समझ में तो इसवर्ष का बजट का कबूलनाम है कि,देश सन 1947 में ही स्वतंत्र हुआ।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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