भोपाल
ग्वालियर में पिछले साल क्रैश हुए सुपरकिंग विमान हादसे से राज्य सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है। हादसे में 65 करोड़ रुपए का यह जहाज पूरी तरह नष्ट हो गया था। इसके बाद भी सरकार ने अपने इकलौते बचे हेलीकाप्टर का बीमा नहीं कराया है। यह हेलीकाप्टर अक्टूबर 2011 में 59 करोड़ रुपए में खरीदा गया है। हाल ही में इस हेलीकॉप्टर की 3000 घंटे की उड़ान पूरी हो चुकी है। अब इसकी सर्विसिंग होना है। इस पर डेढ़ करोड़ रुपए का खर्च जाएगा।
ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार अपने जहाजों का बीमा नहीं कराती है, 2003 में खरीदे गए हेलीकॉप्टर का एक साल के लिए बीमा कराया गया था। लेकिन अब लगभग 125 करोड़ रुपए में खरीदे जा रहे नए विमान का बीमा कराने के बारे में भी कोई फैसला नहीं लिया गया है। विमानन विभाग के अफसरों का कहना है कि राज्य सरकार नीतिगत निर्णय लेकर बीमा कराएगी।
नियमों को ताक पर रखकर वीआईपी एयरक्राफ्ट में ढोए जा रहे थे बक्से
7 मई को ग्वालियर हवाई अड्डे के रनवे पर क्रेश हुए जहाज की जांच अभी जारी है। दुर्घटना की असल वजह की जानकारी एयर क्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन बोर्ड (एएआईबी) की जांच रिपोर्ट में होगा जो एक दो महीने में आ जाएगी। लेकिन महानिदेशक नागर विमानन (डीजीसीए) ने राज्य सरकार को शोकॉज नोटिस जारी कर पूछा है कि वीआईपी एयरक्रॉफ्ट में बक्से कैसे ढोए जा रहे थे, जो दुर्घटना का बड़ी वजह माना जा रहा है। बगैर डीजीसीए की परमिशन लिए यह कार्य मप्र सरकार के तत्कालीन विमानन संचालक बी. विजयदत्ता की उपस्थिति में हुआ। इससे विमान दुर्घटना के प्रथम दृष्टयत: पायलट को दोषी मानते हुए उनका विमान उड़ाने का लाइसेंस एक साल के लिए केंसिल कर दिया है जो 5 मई 2022 को बहाल हो जाएगा।
हालांकि सरकार की ओर से सीनियर पायलट कैप्टन माजिद अख्तर को दिए गए आरोप पत्र में कहा है कि दिनांक 6 मई 2021 को सरकारी बेड़े में शामिल शासकीय विमान इंदौर से ग्वालियर की उड़ान के दौरान आपकी गंभीर लापरवाही के कारण ग्वालियर विमानतल पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिससे सरकार को लगभग 60 करोड़ रुपए की क्षति होने का अनुमान है। नियुक्ति की सेवाशर्तों में उल्लेखानुसार प्रत्येक समय लाइसेंस को वैध रखने की जिम्मेदारी आपकी स्वयं की है, लेकिन डीजीसीए ने आपका लाइसेंस प्रत्येक समय वैध रखने में सफल नहीं रहे। शासकीय विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से उड़ान योग्य नहीं होने से अति आवश्यक एवं जनहित के कार्यों के लिए किराए का विमान लेने पर 25 करोड़ रुपए का व्यय सरकार को करना पड़ा।
नए जेट प्लेन खरीदे जाने को सरकार की सैद्धांतिक सहमति
राज्य सरकार नया जेट प्लेन खरीदे जाने को लेकर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गई है। इसका प्रस्ताव टेक्निकल कमेटी को भेजा गया है, जिसकी मंजूरी के बाद नए जहाज खरीदे जाने के टेंडर जारी किए जाएंगे। राज्य सरकार पिछले साल मई से ही सरकार किराए के जहाज से काम चला रही है। इस पर हर महीने 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। पिछले 10 महीने में किराए के विमान पर 25 करोड़ रुपए खर्च हो गए हैं।
जेट विमान के हिसाब से प्रदेश की हवाई पटि्टयों की लंबाई 6 हजार फीट की जा रही है, अभी प्रदेश के पांचों हवाई अड्डों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और खजुराहो की हवाई पट्टी ही छोटे और बड़े जेट विमान उतर सकते हैं। इसके अलावा नागदा, मंदसौर, छिंदवाड़ा, सिवनी, उमरिया, सतना की हवाई पटि्टयों पर छोटे जेट प्लेन उतर सकते हैं।
पायलट का 1 करोड़ और विमान में बैठे छह वीवीआईपी का 5-5 लाख का बीमा होता है, लेकिन हेलीकॉप्टर का नहीं
- विमानन विभाग के सचिव एम सेलवेंद्रन का कहना है कि यह प्रक्रिया विचाराधीन है। वहीं, राज्य सरकार की विमानन नीति के हिसाब से हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज का संचालन करने वाले पायलट का 1 करोड़ रुपए और उसमें यात्रा कर रहे 6 अतिविशिष्ट व्यक्तियों (राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री समेत अन्य) का 5-5 लाख रुपए का बीमा कराया जाता है। यानी मानवक्षति होने पर 5 लाख रुपए दिए जाने का ही प्रावधान है। इसमें 1 करोड़ रुपए की प्रीमियम राशि 40 हजार रुपए जमा होती है। यहां ताज्जुब की बात यह है कि विमान या हेलीकॉप्टर में बैठने वाले व्यक्यितों का तो बीमा होता है, लेकिन विमान के ढांचे (एचयूएलएल) का बीमा नहीं होता।
- देश में गुजरात के हवाई बेड़े में शामिल जहाज और हेलीकाप्टर का बीमा कराए जाने का प्रावधान है। विमानन कंपनियां भी उनके हर एक जहाज और उसमें सवार होेने वाले यात्रियों का बीमा कराती हैं।
इन हवाई पटि्टयों की बढ़ेगी लंबाई
राज्य सरकार ने सैद्धांतिक रूप से जेट प्लेन खरीदने का फैसला लिया है, जिसके अनुसार सागर, शिवपुरी, खंडवा, सीधी, रीवा, झाबुआ, खरगौन की हवाई पटि्टयों की लंबाई बढ़ाए जाने के लिए कह दिया गया है। इन जिलों की हवाई पटि्टयों की लंबाई फिलहाल 3 हजार फीट है, जिन्हें वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से बढ़ाकर 6 हजार फीट किया जा रहा है।
टेक्निकल कमेटी तय करेगी कौन सा जेट प्लेन खरीदा जाए
राज्य सरकार के विमानन विभाग की टेक्निकल कमेटी यह तय करेगी कि प्रदेश के हिसाब से कौन सा जेट प्लेन उपयुक्त रहेगा। इसके बाद रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएसपी) टेंडर प्रक्रिया जारी की जाएगी। जेट प्लेन की कीमत राज्य सरकार को 125 करोड़ रुपए से 175 करोड़ रुपए के बीच है।





