मुनेश त्यागी
पांच राज्यों में चुनाव सिर पर हैं। बीजेपी ने एक बार फिर विभाजनकारी और मुस्लिम विरोधी सांप्रदायिक एजेंडा उठाकर सिद्ध कर दिया है कि वह हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण की मुहिम को चलाकर ही चुनाव में अपनी जीत को पक्का करके सत्ता में बने रहना चाहती है। अबकी बार हिंदुत्ववादी ताकतों ने कर्नाटक को चुना है।
यहां पर हिंदुत्ववादी ताकतें एक तीर से दो निशाने साधना चाहती हैं। एक तो पांच राज्यों में चुनाव को प्रभावित करना और दूसरे एक साल बाद कर्नाटक में होने वाले चुनाव पर नजर रखकर हिंदू मुसलमानों के नाम पर वोट लेना और सत्ता में बने रहना। कर्नाटक के उदुप्पी में सरकारी प्री यूनिवर्सिटी की छ लड़कियां हिजाब पहनकर कॉलेज में आना चाहती थी। इसी को बहाना बनाकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और हिंदू जागरण वेदिके ने कुछ छात्रों के गले में केसरिया गमछा डाल कर विरोध प्रदर्शन के लिए खड़ा कर दिया।
यह विवाद 29 दिसंबर को शुरू होकर कर्नाटक में उसी जिले में कुंडापुर के दो कॉलेजों में हिजाब पहनकर आने वाली मुस्लिम छात्राओं को कालेज में आने से रोक दिया। जल्दी ही हिंदुत्ववादी संगठनों के केसरियाधारी छात्रों ने इसे सांप्रदायिक रंग दे दिया और "जय श्री राम" का नारा देकर छात्राओं से भिडना शुरू कर दिया। पहले इन छात्राओं के हिजाब पहनकर आने पर किसी को कोई समस्या नहीं थी।
मुस्लिम लड़कियां कॉलेज की तय पोशाक के रंग का हिजाब पहनकर कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में पढ़ने जाया करती थी। फिर हिजाब पहनकर कॉलेज में आने वाली लड़कियों को कालेज आने से रोक कर उनके साथ भारी अन्याय किया गया। इसको लेकर कॉलेज में विवाद फूट पड़े और सरकार को स्कूल कालेजों को बंद करना पड़ा। बाद में सरकार ने कालेजों स्कूलों के लिए पोशाकें तय कर दी और कहा गया कि कोई ऐसे कपड़े नहीं पहने जिससे समता, एकता और सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा ना पड़े।
हिंदुत्ववादी ताकतों का अल्पसंख्यकों के साथ यह ताजा तरीन मामला है। इसमें मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है। यह भाजपा की सोची समझी साजिश का हिस्सा है। कर्नाटक में पहले हर प्रकार के मवेशी काटे जाने पर कड़ा कानून बनाया गया क्योंकि इससे मुस्लिम जनसंख्या एक पेशे के रूप में अपनाकर अपनी गुजर-बसर कर रही थी, फिर अलग-अलग धर्मों के युवक-युवतियों के सामाजिक मेल मिलाप पर रोक लगाई गई। आज यह हिजाब को लेकर है, कल को सिक्ख लड़कों की पगड़ी पहनकर होगा। कल यह विवाद खाने-पीने, मिलने, जुलने और शादी को लेकर विवाद किया जा रहा था।
सरकार का यह हमला मुस्लिम छात्राओं को शिक्षा के बुनियादी अधिकार पर हमला है। सरकार का यह कदम एकदम भेदभावकारी है और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का एकदम घनघोर उलंघन है। अब यह मामला बडी अदालतों,,,, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे तक पहुंच गया है। हम उम्मीद करते हैं कि अदालतें संविधान द्वारा दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करेंगी।
हम यहां पर यह भी कहेंगे कि पहले धर्म संसद द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमले किए गए, उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की बात कही गयी। अब यह हिजाब को लेकर अल्पसंख्यकों पर ताजा हमला है। सांप्रदायिक ताकतों की सरकार है पिछले 5 सालों से जनता की बुनियादी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पाई हैं। अपनी समस्याओं को लेकर किसान, मजदूर, नौजवान सड़कों पर हैं, धरने दे रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं। हिंदुत्ववादी ताकतें उन मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाकर इस प्रकार के जनविरोधी और असंवैधानिक कदम उठा रही है।
हिंदुत्ववादी सरकारें लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं हैं, वे कुछ ना कुछ बहाने बना कर मामले को मुसलमानों के खिलाफ कर, उन्हें समाज में खलनायक दिखाना चाहती है और असली और बुनियादी समस्याओं से जनता का ध्यान भटका कर मुद्दों का ध्रुवीकरण कर रही है ताकि वे फिर से सत्ता में और सरकार में लौट सकें।
भारत की जनता को जनविरोधी और हिंदुत्ववादी ताकतों की इन जनविरोधी, विभाजनवादी और असंवैधानिक हरकतों का विरोध अपनी एकजुटता दिखाकर करना करना है और इन जनविरोधी हरकतों की मुहिम को परास्त करना होगा। हम यहां पर यही कहेंगे,,
, हम चाहते हैं रोटी कपड़ा और मकान, वे चाहते हैं हिंदू मुस्लिम पाकिस्तान।





