अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है भारत

Share

दा‌लें प्रोटीन का सबसे आसान और बेहतर जरिया है। इसीलिए आम नागरिकों को बेहतर पोषण देने की दिशा में लगातार
प्रयास कर रही केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गेहूं और चावल के साथ-साथ दालों की मुफ्त
उपलब्धता भी सुनिश्चित की। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2050 तक भारत में प्रति वर्ष दालों की खपत 320 लाख टन तक
पहुंच जाएगी। भारत अपनी जरूरत की ज्यादातर दालें विदेशों से आयात करता रहा है। लेकिन केंद्र सरकार ने जब
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ाए तो दलहन उत्पादन को भी बढ़ावा देने का फैसला किया। दो तरफा रणनीति बनाई
गई। एक तरफ दलहन की अच्छी वैरायटी की फसलों और बीजों को विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों से अपील की तो वहीं
दूसरी ओर, किसानों को दलहन उत्पादन के लिए प्रोत्साहित भी किया गया। देशभर में 150 दलहन बीज हब की स्थापना की
गई। दलहन की एमएसपी में 40 से 73% तक की बढ़ोतरी की गई। नतीजा, दलहन उत्पादन में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी हुई है।
2013-14 में जहां देश में दालों का उत्पादन 192.7 लाख टन था तो वहीं 2021-22 के चौथे अग्रिम अनुमान के मुताबिक यह
बढ़कर 257.2 लाख टन पहुंच गया है। आयात घटा तो देश को हर साल 15,000 कराेड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो रही है।

जॉब मार्केट में लौटा बूम! जनवरी में 41% बढ़ी नई नाैकरियां
महामारी से उबरते भारत के युवाओं के लिए अच्छी खबर है। विभिन्न सेक्टरों में बड़े स्तर पर भर्तियों के चलते 2022 का
शुरुआती महीना नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए शानदार रहा है। नौकरी जॉबस्पीक इंडेक्स के मुताबिक, जनवरी
में भर्तियों में सालाना आधार पर रिकॉर्ड 41 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जनवरी, 2021 के 1925 की तुलना में जनवरी,
2022 में इंडेक्स 2,716 के स्तर पर पहुंच गया। नई नौकरियों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से आईटी-सॉफ्टवेयर, रिटेल और
टेलिकॉम जैसे सेक्टरों में सबसे ज्यादा रही। कारण, कॉरपोरेट वर्ल्ड भविष्य की संभावनाओं को लेकर खासा उत्साहित था।
2021 की तुलना में ज्यादातर अहम सेक्टरों में मजबूत ग्रोथ के संकेत दिखे। टेलिकॉम(48 फीसदी), रिटेल(58 फीसदी),
आईटी-सॉफ्टवेयर (80 फीसदी), शिक्षा क्षेत्र (31 फीसदी), फार्मा (29 फीसदी), मेडिकल/हेल्थकेयर (10 फीसदी), ऑयल एंड
गैस/ पावर (8 फीसदी), इंश्योरेंस (8 फीसदी), एफएमसीजी (7 फीसदी) और मैन्युफैक्चरिंग (2 फीसदी) जैसे अन्य सेक्टर में
भी बीते साल की तुलना में भर्तियां बढ़ी हैं।

राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली से जुड़ने वाला जम्मू-कश्मीर पहला केंद्र शासित प्रदेश
अ‌नुच्छेद 370 से आजादी मिली तो जम्मू-कश्मीर अब विकास के नए पैमाने पर आगे बढ़ रहा है। वंचितों और जरूरतमंदों
को इसके बाद जहां केंद्र सरकार की अहम योजनाओं का लाभ मिला है तो अब यह केंद्र शासित प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग
बिजनेस’ के क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली
(एनएसडब्ल्यूएस) के साथ जुड़ने वाला देश का पहला केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में बजट के
दौरान इसकी घोषणा की थी। राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह निवेशकों को उनकी व्यवसायिक
आवश्यकताओं के मुताबिक अनुमोदन हेतु आवेदन करने और पहचानने के लिए एक गाइड के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रीय
एकल खिड़की प्रणाली, भारत औद्योगिक भूमि बैंक (आईआईएलबी) से जुड़ी है। इसमें जम्मू-कश्मीर के 45 औद्योगिक पार्क
शामिल हैं। इससे निवेशकों को जम्मू-कश्मीर में उपलब्ध भू-खंड खोजने में सहायता मिलेगी। इस कदम से निवेशकों को
जानकारी इकट्ठा करने और विभिन्न हितधारकों से मंजूरी प्राप्त करने के लिए प्लेटफार्मों पर जाने की आवश्यकता खत्म हो
जाएगी। इसके जरिए जहां जम्मू-कश्मीर में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे तो वहीं नए रोजगारों का सृजन भी होगा।

पहली बार बांग्लादेश के रास्ते पटना से गुवाहाटी के पांडु गया मालवाहक जहाज

न‌दियों के तट पर कई सभ्यताएं जन्मी हैं तो मानव सभ्यता के विकास में इनका अहम योगदान है। भारत जैसे विशाल
भूभाग वाले देश में यही नदियां अब कनेक्टिविटी का नया जरिया बनी हैं। हालांकि सस्ता और बेहतर विकल्प होने के
बावजूद 2014 तक जलमार्गों के विकास पर उतना ध्यान नहीं दिया गया था। 2016 में राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम के साथ
ही इस क्षेत्र की सूरत बदलने की शुरुआत हुई। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता वाले इस क्षेत्र पर विशेष फोकस
का नतीजा है कि पूर्वोत्तर जैसे भौगोलिक चुनौती से भरे क्षेत्र में भी अब जलमार्ग प्रगति का नया मार्ग तैयार कर रहे हैं।
इसकी शुरुआत हुई 5 फरवरी को जब बिहार की राजधानी पटना से 200 मीट्रिक टन खाद्यान्न लेकर मालवाहक कार्गो एमवी
लाल बहादुर शास्त्री गुवाहाटी स्थित पांडू के लिए रवाना हुआ। यह कार्गो राष्ट्रीय जलमार्ग -1 (गंगा नदी) के भागलपुर,
मनिहारी, साहिबगंज, फरक्का, ट्रिबेनी, कोलकाता, हल्दिया, हेमनगर के रास्ते बांग्लादेश से होकर राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या -2
के धुबरी व जोगीघोपा होते हुए 2,350 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इस पोत को अपनी यात्रा पूरा करने में लगभग 25
दिन लगेंगे और मार्च की शुरुआत में यह पांडु पहुंच जाएगा।

अटल टनल को दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग की मिली मान्यता
अ‌त्याधुनिक तकनीक से तैयार भारत की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक महत्व की अटल टनल रोहतांग का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ
रिकॉर्ड्स की ओर से प्रमाणित किया गया है। समुद्र तल से 10,044 फीट की ऊंचाई पर गुजरने वाली अटल टनल को वर्ल्ड बुक
ऑफ रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे लंबी यातायात टनल के रूप में प्रमाणित किया है। इस टनल की
लंबाई 9.02 किलोमीटर है। इसे हिमालय की पीरपंजाल की चोटियों को भेदकर करीब 10 साल की अवधि में सीमा सड़क
संगठन ने बनाया है। टनल निर्माण की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2002 में जनजातीय
जिला लाहौल-स्पीति के मुख्यालय केलांग में की थी। इसके बाद लंबे समय तक अटका रहा यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी की प्रतिबद्धता से 2020 में पूरा हुआ। इसके बनने से मनाली से लेह की दूरी करीब 45 किमी घट गई है। वहीं इस रूट
का सफर कम से कम पांच घंटे कम

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें