संजय कनौजिया की कलम![]()
पृथ्वी के शिखर पर स्थापित तिब्बत, चीन द्वारा गुलामी की जिंदगी गुजर बसर करने वाला एक आध्यात्म एवं शांत चरित्र देश, सदैव आशा करता आया है कि “गुरु भारत” ही कोई रास्ता निकालेगा..आखिर तिब्बत की पीड़ा भारत भी ना समझे तो कौन समझेगा..जिसने स्वयं गुलामी का दंश झेला हो..लेकिन पडोसी की क्रूरता इस कदर बढ़ गई है कि रिश्तों की सभी मर्यादों की सीमा लांघकर, भारत के ही पेंगोंग, गलवान, डेपसांग..??? सोचिये जरा..

यदि भूमि दान में ही दे दी जाती तो गर्व होता, कोई छल से छीन ले जाए तो दर्द लाजमी है..आज भाजपा चीन के आगे चुप्पी साधे हुए है..”तिब्बत” की आजादी के मामले में”..कभी लड़ती थी..हमने RSS और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को तिब्बत की आज़ादी हेतू लड़ते हुए बोलते हुए सुना है..कई मंचो पर आवाज़ भी उठाई है..मनमोहन सरकार तक ही, तिब्बत आंदोलनकारी भारतीय भूमि पर रहकर अपनी आज़ादी की मांग उठाते रहे हैं..लेकिन 2014 के बाद से तिब्बत वासियों की ये लड़ाई भारतीय भूमि से गौण होकर रह गई है..वर्तमान प्रधानमंत्री के मुख से, मुद्दत हो गई चीन का नाम भी नहीं सुना..तिब्बत के धर्म गुरु दलाई लामा ने दुनियां के सभी देशों के दरवाज़ाओं को खटखटाया, लेकिन परिणाम शून्य..अंतराष्ट्रीय बिचौलिया संस्था UNO, केवल यूरोप पर आई परेशानियों को हल करने में ही सजग रहती है, लेकिन अफ्रीका महाद्वीप या एशिया महाद्वीप के प्रति उसका नजरिया सदैव ढुलमुल ही रहा है..आज यूरोप द्वारा थोपी गई नीतियों के कारण, स्वयं ऐसे मोड़ पर खड़ा हो गया है..जिसके सबसे ज्यादा घातक असर यूरोप पर ही पड़ेंगे, यह भी सत्य है कि इसके सामरिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक आदि मामलों पर विपरीत असर एशिया-अफ्रीका पर भी पड़ेंगे..युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं शायद दुनियां इस ओर गंभीर चिंतन कर हल ढूंढेगी तो मानवता के लिए देश दुनियां के उत्थान के लिए एक नवीन-स्वस्थ्य और उज्जवल दिशा उभर कर निकल सके, जैसे दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात मनुष्यता ने मानव कल्याण के लिए कुछ नियम कायदों का निर्माण किया था..शायद भारत का विद्वान वर्ग इस ओर चिंतन-मंथन कर ऐसी दिशा तैयार करे कि भारतीय सीमाएं तो सुरक्षित होय ही साथ ही तिब्बत की आज़ादी की भी मजबूत सफल पहल हो सके..हम समाजवादी, डॉ० लोहिया के विचारों के अनुयायी आज भी लड़ रहे है और मुखरता से “चीन से तिब्बत को आज़ाद कराने” के लिए लड़ते रहेंगे और लड़ेंगे जीतेंगे ![]()
(लेखक, राजनैतिक-सामाजिक चिंतक है)






