सुसंस्कृति परिहार
पिछले दिनों दमोह के पूर्व कांग्रेस विधायक राहूल लोधी का भाजपा दलबदल के बाद प्रथम आगमन हुआ ।आम लोगों की राय थी कि शायद वे दमोह की जनता को मुंह दिखाने लायक नहीं थे इसीलिए वे वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष बनकर केबिनेट मंत्री और सुरक्षित लाव-लश्कर के साथ ही आए हैं ।जबकि उनके करीबियों का ये कहना है कि इस अंतराल में वे शिवराज से अपने लिए पद और जनता के लिए मेडीकल कॉलेज के लिए जूझते रहे ।उनके आगमन पर एक ओर जहां भाजपा में कुछ खासे कार्यकर्ताओं को छोड़कर ख़ुशी का माहौल था । वहीं आगामी विधानसभा चुनाव तथा मंत्री का दर्जा राहुल के साथ युवाओं को जोड़ रहा है ।
दिलचस्प बात ये है कि जयंत मलैया के पिताश्री के निधन के बाद जब शिवराज जी मलैया के निवास पर मातमपुर्सी के लिए आए तो एक बड़े जत्थे ने मुख्यमंत्री की गाड़ी को निवास पर ही घेरकर उन्हें प्रत्याशी बनाने पर ज़ोर दिया था नारे बाजी भी हुई थी ।कहा जा रहा है कि यह शिवराज जी को नागवार गुजरा था । लेकिन मलैया और भाजपा कार्यकर्ताओं ने तभी से जोश-खरोश के साथ प्रचार शुरू कर दिया । यहां तक कहा गया कि शिवराज वित्त मंत्रालय मलैया जी को सौंपने वाले हैं ।अब जब राहुल भैय्या मंत्री बनकर दमोह पधारे तो कुछ असंतुष्टों ने उन पर स्याही फेंकी तथा जूतों की माला पहनाने की असफल कोशिश की ।अब तक मिले संकेत ऐसे ही बताए जा रहे हैं कि यह भाजपा के असंतुष्ट एक धड़े का काम है । पुलिस ने दोनों युवकों को हिरासत में लिया है पूछताछ जारी है। इस बीच राहुल के आगमन पर कांग्रेस ने दुख ज़ाहिर करते हुए विरोध प्रर्दशन किया ।गिरफ्तारियां दीं और जिस मस्ती से थाना देहात प्रांगण में ढोल मंजीरे पर “राहुल तुमने गजब कर दऔ ” झूम झूम कर गाया ।यह लोकगीत मीडिया की मेहरबानी से सब तरफ गूंज रहा है यहां तक कि भाजपाइयों की जुबान पर भी चढ़ गया । यकीनन गीत की इस पंक्ति में राहुल भैय्या का सम्पूर्ण व्यक्तित्व समाया हुआ है ।आप कल्पना कीजिए दमोह विधानसभा से बाहर हिंडोरिया का एक नवजवान जिसकी पृष्ठभूमि भाजपा के खिलाफ आंदोलनकारी की रही हो तथा जिसने सिर्फ राजीव गांधी के चुनाव क्षेत्र अमेठी में युवा तुर्क बतौर शामिल होकर काम किया हो वह दमोह भाजपा के कद्दावर नेता 35 वर्ष से विधायक रहे, पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया से चुनाव लड़कर ,उन्हें परास्त कर इतिहास रचता तो है ही साथ ही फिर अपनी चतुराई से सत्ता में आई शिवराज सरकार में शामिल होकर ना केवल केबिनेट मंत्री बनता है बल्कि दमोह विधानसभा पर भाजपा की ओर से प्रत्याशी बनने का गहरा दंश दे कर ना केवल जयंत मलैया बल्कि पूरे परिवार को राजनैतिक रुप से समाप्त करने की ठान लेता है ।ऐसा गज़ब और किसने कभी किया है क्या ?ऐसी चर्चाएं भी चल रहीं हैं कि मलैया परिवार अपने पुरातन कांग्रेसी परिवार की दुहाई देकर अपने अचर्चित पुत्र को कांग्रेस का टिकट दिला सकते हैं ।अजय सिंह राहुल के मलैया करीबी माने जाते हैं वे भी मातमपुर्सी करने मलैया निवास पधारे थे ।क्योंकि दमोह विधानसभा के चार क्षेत्रों में से दो रिजर्व हैं ,पथरिया सामान्य है जहां रामबाई पहले से ही भाजपा से सांठगांठ कर चुकी हैं ।सारा दारोमदार दमोह सीट पर ही है ।
अतएव पहली कोशिश राहुल चुनाव ना लड़ें की होगी जो मुश्किल है ।क्योंकि राहुल का त्यागपत्र तब होता है जब पार्टी पूर्ण बहुमत में थी ।दूसरे शिवराज द्वारा उन्हें मंत्री का दर्जा देना तथा मेडीकल कॉलेज की मांग पर त्वरित कार्रवाई करना साफ़ तौर पर यह संदेश दे रहा है कि इस सबके पीछे शिवराज और संघ परिवार है वे नहीं चाहते कि जयंत मलैया और गोपाल भार्गव ,अजय विश्नोई जैसे वरिष्ठ लोग उनकी राह का कांटा बनें । राहुल की राह में अड़चनें होंगी ये तय है लेकिन शिवराज सरकार हार जाए ये कहना कठिन है । राहुल ने ना तब क्षेत्र में ज्यादा संपर्क किया था ना अब होगा क्योंकि ये सब जानते हैं कि दमोह का मतदाता कभी नहीं बदला है थोड़े थोड़े फासले से हमेशा जय पराजय हुई है।
कांग्रेस भी मस्त है । मतदाता प्रतिबद्ध हैं । भाजपा से ज़रूर मोहभंग की चर्चाएं गांवों में हैं आगे देखिए क्या समीकरण बनते हैं ? बहरहाल कांग्रेस के बैठे बिठाए जीतने के आसार बन रहे हैं ।मलैया जैसे राज्य स्तरीय ,कद्दावर नेता का सूर्य अस्ताचल गामी है शायद इसीलिए तो कांग्रेस अध्यक्ष भी मस्ती में मंजीरा उठाकर नाच उठते हैं बेशक ,राहुल तुमने गजब कर दऔ।





