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अच्छे समाज की आधारशिला स्कूल में ही रखी जाती है — डा. जगदीश गाँधी

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लखनऊ, 28 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, कानपुर रोड कैम्पस द्वारा ‘डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स’ का भव्य आयोजन आज विद्यालय के ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत् शुभारम्भ किया। इस अवसर पर अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए
डा. गाँधी ने कहा कि अच्छे समाज की आधारशिला स्कूल में ही रखी जाती है। स्कूल का जैसा वातावरण होगा, वैसा ही प्रभाव बच्चे के मन-मस्तिष्क पर पड़ता है। डा. गाँधी ने आगे कहा कि वैसे तो बालक को समाज का प्रकाश बनाने की जिम्मेदारी घर, समाज व स्कूल तीनों की है, परन्तु स्कूल के वातावरण के बच्चों पर गहरा असर पड़ता है। डा. गाँधी ने आगे कहा कि इन्हीं विचारों के फलस्वरूप सी.एम.एस. में बच्चों को एकता, शान्ति व सौहार्द के विचार बचपन से ही दिये जाते हैं।
इससे पहले, अत्यन्त ही उल्लासपूर्ण वातावरण में बड़े ही शानदार ढंग से आयोजित ‘डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स’ में विद्यालय के छात्रों ने जमकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जहाँ एक ओर, छात्रों द्वारा समवेत स्वर में प्रस्तुत स्कूल प्रार्थना, सर्वधर्म प्रार्थना व विश्व एकता प्रार्थना ने आध्यात्मिक उल्लास प्रवाहित किया तो वहीं दूसरी ओर विश्व संसद की अनूठी प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया, जिसके माध्यम से छात्रों ने विश्व की ज्वलन्त समस्याओं के शान्तिपूर्ण समाधान सुझायें। इसके अलावा, गीत-संगीत, कव्वाली, लघु नाटिका आदि विभिन्न रंगारंग शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों की इन्द्रधनुषी छटा ने अभिभावकों को भावविभोर कर दिया और अभिभावकों ने जोरदार तालियां बजाकर छात्रों की हौसलाअफजाई की। इस समारोहों में छात्रों ने अपने अभिभावकों के समक्ष न सिर्फ अपने ज्ञान का अपितु विद्यालय द्वारा प्रदान की जा रही नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा से परिपूर्ण ज्ञान का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में सर्वोच्चता अर्जित करने वाले छात्रों व वार्षिक परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को भी पुरष्कृत कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सी.एम.एस. कानपुर रोड कैम्पस के की वरिष्ठ प्रधानाचार्या डा. विनीता कामरान ने कहा कि बालक के चरित्र निर्माण तथा बौद्धिक क्षमताओं के विकास की दोहरी जिम्मेदारी पूरे समाज की है जिसमें माता-पिता, दादा-दादी तथा पड़ोसी भी शामिल हैं। व्यापक परिवार तथा आत्मीयता से ओतप्रोत समाज को बालक के चरित्र निर्माण के लिए एक स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए।

Ramswaroop Mantri

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