मुनेश त्यागी
कौन कहता है
अब द्रोणाचार्य नहीं रहे?
यह कहना झूठ है,
सच से परे है।
कल वे राजा महाराजाओं की सेवा करते थे
आज समय की मांग के अनुसार
पुराना चोला त्यागकर
अंगूठा काटना छोड़कर
आधुनिक मनुवादियों की शरण में चले गए हैं।
अब वे पुराने वस्त्र नहीं पहनते
आजकल वे सूट बूट पहनते हैं
टाई लगाकर रहते हैं
अब उन्होंने नई वेशभूषा धारण कर ली है।
द्रोणाचार्य आज भी मौजूद हैं,
अब वे स्कूलों, कालिजों,
पढ़ाई के क्षेत्रों, विश्वविद्यालयों,
ट्यूशन पाइंटों में मौजूद हैं।
अब वे अंगूठा नहीं काटते,
अब वे एडमिशन लेने से रोकते हैं,
अंक काटते हैं,
नंबर नहीं देते।
अब वे एडमिशन नहीं करते
वेकैंसी नही निकालते,
सीट नही भरते,
रोजगार छीनते हैं।
अब उन्होंने रूप रंग बदल लिया है
अब वे मिड डे मील बेचते हैं
स्कूलों में पढ़ाते नहीं
ड्यूटी के दौरान व्यापार करते हैं।
कौन कहता है द्रोणाचार्य
अब मौजूद नहीं हैं?
वे आज भी स्कूल और विद्यालयों में
महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में मौजूद हैं।





