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चीन को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में मप्र के मोहासा गांव से मिलेगी चुनौती

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भोपाल। जीवनदायनी नर्मदा तट पर बसे होशंगाबाद जिले के मोहासा से अब चीन को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में पूरी तरह से चुनौती देने की तैयारी कर ली गई है। इसकी तैयारी मप्र सरकार द्वारा अपने स्तर पर की जा रही है। इसके तहत प्रदेश सरकार ने मोहासा में फार्मास्युटिकल हब खोलने की तैयारी कर ली है। इसको लेकर प्रस्ताव भी केन्द्र सरकार को भेजा जा चुका है।

गौरतलब है कि पूर्व में इस पार्क को इंदौर में शुरू करने की तैयारी की गई थी। इस पार्क के माध्यम से मप्र अब फार्मास्युटिकल क्षेत्र में विशेष रूप से मेडिकल उपकरणों के मामले में चीन के प्रभाव को पूरी तरह से समाप्त कर सकेगा। इसके लिए चिकित्सा निर्माण के लिए उद्यमियों को निवेश के लिए पूरी तरह से प्रोत्साहित किया जाएगा। खास बात यह है कि यह उपकरण विश्व स्तर के गुणवत्ता वाले मानकों पर खरा उतरने वाले होंगे। यह काम शुरू होने पर इन उपकरणों के मामले में देश की चीन पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। फिलहाल इस सेक्टर मेंअभी कोई पार्क नहीं है। यह बात अलग है कि मप्र में राज्य सरकार द्वारा आईटी पार्क से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक के कई तरह के पार्क बना चुकी है। फिलहाल प्रदेश में फार्मा से जुड़ा कारोबार अलग-अलग हिस्सों में होता है। अब इस पार्क के लिये राज्य सरकार द्वारा केंद्र के पास प्रस्ताव भेजा गया है। इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिये भी कई बड़ी घोषणाएं की जा चुकी हैं। यह बात अलग है कि इस क्षेत्र में देश का नाम बड़े कारोबारी देशों में शामिल है। इसके बाद भी देश में मेडिकल उपकरणों का बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है। यहां तक कि अस्पतालों के पलंग भी आयात किए जाते हैं। इनमें से भी खासतौर पर आईसीयू और सीसीयू में लगने वाले अधिकांश पलंग आयात करने पड़ते हैं। इसमें भी सबसे बड़ी हिस्सेदारी चीन की है। कोरोना संकट और चीन के साथ हुए विवाद ने देश में एक अलग माहौल बना दिया है। यही वजह है कि अब फार्मास्युटिकल में कच्चे माल और मेडिकल उपकरणों को लेकर आत्म निर्भरता के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
की जाएगी कंसल्टेंट की नियुक्ति
प्रदेश की शिव सरकार द्वारा केंद्र की गाइडलाइन के हिसाब से फार्मास्युटिकल पार्क की स्थापना के लिये कंसल्टेंट की नियुक्ति की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। यह फार्मास्युटिकल क्षेत्र के विशेषज्ञ होंगे, जो कि राज्य सरकार को पार्क की स्थापना में मार्गदर्शन देंगे। यह कंसल्टेंट फार्मास्युटिकल, ड्रग और उपकरणों के निर्माताओं को मप्र में निवेश के लिये प्रोत्साहित भी करेंगे।
देश के सबसे बड़े पार्कों में से एक होगा
फार्मास्युटिकल पार्क की स्थापना 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में करने की योजना तैयार की गई है। इसकी वजह से यह देश के बड़े पार्क में से एक हो जाएगा। पहले इसकी स्थापना इंदौर के आसपास बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से करने की थी, लेकिन इतनी जमीन की उपलब्धता न होने की वजह से इसके लिए होशंगाबाद जिले के बाबई स्थित मोहासा का चयन कर राज्य औद्यागिक विकास निगम ने बुनियादी सुविधाएं जुटाने की तैयारी कर ली है।
50 हजार लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
इस पार्क की स्थापना होने से प्रदेश में 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेंगे। सरकार शुरूआत में न्यूनतम फार्मास्युटिकल से जुड़े 50 उत्पादकों को मप्र में निवेश के लिये प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रही है।

Ramswaroop Mantri

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