इंदौर
साइबर क्राइम सेल ने देशभर के ज्वेलर्स के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाली गैंग के दो गुर्गों को गिरफ्तार किया है, जबकि सरगना सहित इनके अन्य साथी फरार हैं। ये नामी ज्वेलर्स के नाम व फोटो का दुरुपयोग कर अन्य शहरों के ज्वेलर्स से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। ठगी के लिए इन्होंने ज्वेलर्स के परिजनों की जानकारी सामाजिक पत्रिकाओं से एकत्रित कर रखी थी। ये सहयोग के नाम पर पीड़ित ज्वेलर्स के शहर में अपने लाखों रुपए अटके होना बताकर अन्य स्थान पर रुपयों की व्यवस्था करने की मांग करते थे। रुपए आते ही मोबाइल बंद कर गायब हो जाते थे। इतना ही नहीं, आरोपियों द्वारा मोबाइल में ट्रू कॉलर सेटिंग में व्यापारी का ही नाम आए, इस तरह सेव किया जाता था। साथ ही डीपी पर फोटो भी उसी व्यापारी का लगा लेते थे, जिसके नाम से फर्जी कॉल किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार 4 दिसंबर को पंजाबी सर्राफ ज्वेलर्स के मैनेजर ने शिकायत की थी कि किसी व्यक्ति ने उन्हें मुंबई के नामी ज्वेलर्स के मालिक के नाम से काल किया। नंबर के साथ उसका फोटो भी दिख रहा है। वह इंदौर में अपना 4 लाख रुपया अटका होने पर इस रकम को दिल्ली में पेमेंट करने की गुजारिश कर रहा था। उसने कहा कि दिल्ली में फंसा हूं, 4 लाख कैश दिलवा दो, मेरा बंदा पेमेंट दे जाएगा। उसके फोटो को देखकर मैनेजर विश्वास में आ गया कि यह काॅल उन्हीं की लिंक का है। फिर उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के जरिए दिल्ली में पेमेंट करवा दिया। कुछ घंटे बाद जब फरियादी को इंदौर में अपना पेमेंट प्राप्त नहीं हुआ तो उसे धोखाधड़ी का पता चला। इसके बाद उसने थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच में लिया और टीमों को सूरत, जयपुर, दिल्ली, जालौर आदि स्थानों पर भेजा। यहां मुखबिर और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली करोलबाग से आरोपी रामकृष्ण राजपुरोहित निवासी ग्राम नून जिला जालौर राजस्थान को पकड़ा। उसने कबूला कि वह और उसका साथी शैतान सिंह उर्फ प्रदीप राठौर जालौर से जयपुर होते हुए दिल्ली एक पेमेंट उठाने आए थे। यह पेमेंट लेने के लिए उन्हें सरगना नरेन्द्र उर्फ दशरथ सिंह ने भेजा था। फिर पुलिस ने शैतान सिंह को पकड़ा। अब पुलिस को मुख्य आरोपी नरेन्द्र सिंह उर्फ दशरथ सिंह और उसकी गैंग की तलाश है।
ऐसे करते थे वारदात
आरोपियों ने बताया कि नरेन्द्र सिंह देशभर के नामचीन ज्वेलर्स को किसी दूसरे नामी ज्वेलर्स के मालिक की हैसियत से फोन काॅल करता था। फिर उनके शहर में पेमेंट अटकने तथा किसी लोकेशन पर पेमेंट करवाने के सहयोग की गुजारिश करता था। नरेन्द्र सिंह के साथ गैंग के अन्य सदस्य दूसरे मोबाइल के मार्फत पेमेंट लेकर निकल जाते थे। फिर पेमेंट कहीं अटकने का बोलकर उसे जाल में फंसा लेते। फिर अपना मोबाइल बंद कर लेते थे। पुलिस को इस गैंग के नरेन्द्र उर्फ दशरथ सिंह, मोहर सिंह, विजय सिंह, रज्जाक खान, कमलेश राजपुरोहित और अन्य साथी की तलाश है।





