ज्योतिषाचार्य पवन कुमार
_क्या क़ुदरती रूप से हर पौधे पर फ़ूल लगते हैं ? नहीं, लेकिन जब उन्हें खाद दी जाती है तो निश्चित रूप से ही उस पौधे में फ़ूल लगते हैं।_
जब एक पौधे को खाद के ज़रिये उसकी सामान्य ताक़त से अतिरिक्त ताक़त दी जाती है तब एक उसकी अतिरिक्त ताक़त की वज़ह से एक फ़ूल का जन्म होता है। सुन्दर फ़ूल का खिल जाना अतिरिक्त ऊर्जा का परिणाम है। यही बात हमारे वीर्य पर भी लागू होता है।
शरीर में वीर्य के बने रहने का अर्थ है
शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा (खाद) देना।
इसी वीर्य (खाद) के जमाव से
शरीर को महान काम करने की ऊर्जा मिलती है। जितनी ऊर्जा बढ़ती है व्यक्ति उतने महान कार्य करता है।
_*अब समझते हैं कैसे ?*_सबसे पहले बहुत लोगों के मन में सवाल आयेगा कि विज्ञान का कहना है कि शरीर में वीर्य रुके रहने से बहुत सी बीमारी हो सकती है।
तो उन्हें बता दूँ –
जी हाँ वीर्य रोक लेने से हमको बीमारी हो सकती है लेकिन जो ज़बरदस्ती रोक लेते हैं औऱ उनकी ऊर्जा किसी काम में नहीं लगेगी तो निश्चित रूप से ही उनके शरीर में समस्याएँ हो सकती हैं।
ज़रूरत से ज़्यादा खाद पौधे को दे दी जाए औऱ पौधा उसका उपयोग न कर पाये, उसकी शक्ति को सम्भाल न पाये तो निश्चित ही पौधे को इसका नुक़सान होगा। उसी तरह अग़र हमारे शरीर में वीर्य जमा हो रहा है और हम उसे नष्ट नहीं कर रहे हैं तो हमारी ऊर्जा सही दिशा में प्रयोग होना चाहिए।
चलिए जानते हैं कैसे?
गुरुकुल पद्धति के अनुसार पहले 25 सालों तक बच्चे को कड़े रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करवाया जाता था, ताकि वो अपने वीर्य को बरबाद न कर पायें औऱ उसके वीर्य की शक्ति की वज़ह से पूर्ण रूप से उसकी बुद्धि औऱ जीवन का विकास हो पाये।
फ़िर 25 साल बाद जिसकी मर्ज़ी हो वो शादी कर सकता था औऱ जो शादी नहीं करता वो अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल महान कार्यों में करता था।
मैं आपसे यह नहीं कहूँगा कि
आप वीर्य को बाहर आने से रोक दें।
या सम्भोग क्रिया या हस्त मैथुन न करे. जानने की कोशिश करें कि आख़िर 24 घण्टे यौन गतिविधि के लिए अधिक पागलपन क्यों ?
हमारा दिमाग़ घूम फ़िर कर लगभग 24 घण्टे सम्भोग के आस पास ही घूमता रहता है। आप इससे भागें नहीं या उसे छोड़ें नहीं। इसे जानने की कोशिश करें, क्योंकि जिन चीज़ों के बारे में हमारी सही जानकारी बढ़ती जाती है उतना ही हम उससे ऊपर उठते जाते हैं औऱ पागलपन कम होता जाता है।
कम औऱ ग़लत जानकारी की वज़ह से हमारे दिमाग़ में पागलपन बना रहता है। जैसे ही हम अपने आपसे पूछते हैं औऱ ध्यान से देखना शुरू करते हैं कि आख़िर इस चीज़ के प्रति मैं इतना पागल क्यों हूँ। वैसे ही हमें ज़वाब मिलने शुरू हो जाते हैं औऱ
उन चीज़ों से हम ऊपर उठने लगते हैं।
*कुछ लोग कहते हैं :*वीर्य का बाहर आना एक साधारण बात है। जी हाँ वो सही हैं, लेकिन मैं ऐसा सोचता हूँ कि अग़र वीर्य का बाहर आना एक साधारण बात है तो वीर्य का रुक जाना एक असाधारण बात होगी औऱ महानता का जन्म असाधारण चीज़ों की वज़ह से ही होता है।
चलिए, मेरे कहने पर आप वीर्य को न रोकें, लेकिन याद रखें वीर्य की ऊर्जा ही परिवर्तित हो कर हमारे शरीर की ऊर्जा की बढ़ाती है औऱ उसी ऊर्जा से महान घटनाएँ घटती हैं।
इसलिए सम्भोग के प्रति बार बार मन में उत्सुकता आने वाली प्रवित्तियों क़ौ समझें कि आख़िर ऐसा क्यूँ होता है। जितने गहरे में हम जान लेंगे उतनी ही तेजी से हम इससे ऊपर उठ जायेंगे। इससे डरें या लड़ें नहीं बल्कि इसे जानें। हमारा मार्ग, खोजी का मार्ग होना चाहिए।
{चेतना विकास मिशन}





