नागेश चौधरी**
भारत में कितने राजनीतिक दलों ने अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका को परिभाषित किया है? भाजपा की सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका क्या है? वह पार्टी रा. स्व. संघ. द्वारा निर्धारित सामाजिक, सांस्कृतिक भूमिका का वहन करती है ।

संघ भाजपा के इशारे और मदद से राज ठाकरे द्वारा जो भोंगा प्रकार उठाया उसके कारण आज महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दलवाले हिंदुत्व को शरण जा रहे मंदिर मंदिर जा रहे हैं और खुद को जोर से हिंदूवादी दिखाने की जैसी होड़ लगी हैं? यह एक तरह से हिंदुत्व की,संघ की शरण में जाना है।
गैर भाजपी दलों ने संघ भाजपा की जैसी सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका तय नहीं की है।
जब तक यहां के राजनीतिक दल सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका निश्चित नहीं करते, तब तक वे संघ की राष्ट्रीय भूमिका सामने गौण स्थिति मेंही रहेंगे। इसलिए उनकी राजनीतिक सत्ता ब्राह्मणी व्यवस्था को ही चलानी वाली सत्ता होगी। जैसे कांग्रेस, कम्युनिस्ट, समाजवादी, राष्ट्रवादी, रिपब्लिकन आदि। कहा जाता है कि कांग्रेस पार्टी सामाजिक सम्मेलनों का आयोजन करती थी। यह अतीत में हुआ। आज कोई भी दल सामाजिक सम्मेलनों का आयोजन नहीं करता है।
तमिलनाडु में द्रविड़ दलों द्वारा चलाई जा रही भूमिका के कारण, संघ भाजपा की वहां दाल नहीं पक रही है। क्योंकि उन पार्टियों ने द्रविड़ कड़गम की यानी पेरियार रामासामी की सामाजिक-सांस्कृतिक भूमिका को अपनाया है। यहां महाराष्ट्र में भी हो सकता था अगर फुले साहू अंबेडकर का नारा लगाने वाले वास्तव में उस विचार को लागू करने के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक भूमिका का राजनीतिकरण करते। आज भी समय नहीं बीता। अगर सत्ता सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र को महत्व देती है और उसके लिए कार्रवाई करने का फैसला करती है, तभी वह भाजपा और संघ को रोक पाएगी।
इस संबंध में हमने लिखा है ” आरएसएस मुक्त भारत क्यों और कैसे ?” यह पुस्तिका न्याय. कोलसे पाटिल द्वारा पुणे से प्रकाशित की है। इसे पढ़ भी लेगी, तो भी यह बहुत स्पष्ट होगा। न्या. कोलसे पाटिल द्वारा निभाई जा रही भूमिका और बहुजन संघर्ष की वैचारिक भूमिका भी इस संबंध में मार्गदर्शक होगी।
लेकिन सत्ताधारी दल और बहुजन समाज भाजपा के चंगुल से तभी मुक्त होगा जब राजनेता लोगों की यह मानसिकता छोड़ देंगे कि वे ब्राह्मणों के अलावा किसी की नहीं सुनेंगे। ‘ मनु के दास शासक ‘ यह हमारी और एक किताब हैं।
कृपया यह न मानें कि हमारी किताब प्रचारित करते है। यह जनता की मुक्ति की अपील है।




