पहले एक हिंदू गाँव या शहर में एक हिंदू कॉलोनी बनाकर और उसे चलाकर दिखाओ, जहां जातिवाद न हो, कोई ऊँचा और कोई नीचा न हो, जहां हर जाति का एक श्मशान हो, हर जाति के लोग पुजारी बनते हो, एक जाति का दूसरे जाति से ब्याह होता हो, कोई छुआ-छूत न हो ! हर जाति से मेहतर बनते हों, और मेहतर की बेटी पुजारी बन पाए!
किसी जाति के दूल्हे के घोड़ी चढ़ने पर दूसरी जाति को लेकर ग़ुस्सा न आता हो, वंचितों को आरक्षण देने पर प्रिविलेज वालों को जलन भी न होता हो
वे सब मिलकर रहते हों और उनके मिलकर रहने के लिए उनको ये डर न दिखाना पड़े कि मुसलमान आ जाएँगे!
डाक्टर अखिलेंद्र प्रताप सिंह,
संकलन – निर्मल कुमार शर्मा गाजियाबाद उप्र संपर्क -9910629632




