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 *उदयपुर में कांग्रेस चिंतन शिविर के मौके परराजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा का बयान

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उदयपुर शहर में  जब इस समय कांग्रेस चिंतन शिविर के मौके पर कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व मौजूद हैं और देश के सामने सांप्रदायिक फासीवादी राजनीति के चलते बनी स्थिति और जनतंत्र पर खतरे  पर चिंतन कर रहा है,  राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा यह  मांग करता है   कि कांग्रेस पार्टी बिहार विधानसभा  में पारित संकल्प की तर्ज पर जाति आधारित जनगणना  के पक्ष में राजस्थान विधानसभा में भी प्रस्ताव पारित करवाए और मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के आरक्षण को कमजोर/ व्यवहारत:समाप्त करने की कुटिल मुहिम से  बचाने के लिए मजबूत संदेश दे । ऐसे दौर में जब केंद्र की भाजपा सरकार निजीकरण की नीतियों के माध्यम से सामाजिक न्याय और आरक्षण पर लगातार हमला कर रही है  आरक्षण को बचाने के लिए यह कदम  लिया जाना एक अहम जरूरत  है। हम लोग यह भी मांग करते हैं कांग्रेस पार्टी और अशोक गहलोत  ने 2018 चुनाव प्रचार के समय जो जन पक्षीय  वादे  जनता से किए उनको ईमानदारी से लागू करके यह बताएं कि वह किस तरह से केंद्र की भाजपा की जुमलेबाज सरकार से अलग हैं। 
कांग्रेस पार्टी ने वादा किया था कि किसानों के सब तरह के कर्ज माफ होंगे, लेकिन आज भी राज्य का किसान राष्ट्रकृत बैंको के  रु 52000 करोड से ज्यादा के कर्ज के माफी का इंतजार कर रहा है । राज्य में सब तरह के कृषि कर्जों को तुरन्त माफ किया जाए।  मोर्चे की मांग है की दक्षिण राजस्थान  के आदिवासी बहुल इलाके के आदिवासी किसानों के जंगलात और बिलानाम सरकारी जमीनों पर उनके कब्जे की ज़मीनों के पट्टों के दावे  अभी तक भी  बड़ी संख्या  में जारी नहीं हुए हैं और आदिवासियों को कब्जे के बराबर जमीन के पट्टे वन अधिकार कानून के तहत  नहीं मिले है, इसकी तरफ राज्य सरकार ध्यान देकर अविलंब पट्टे स्वीकृत कर जारी करें और इस मसले को तकनीकी बिंदुओं पर नहीं लटकाये। 
पूर्व में वसुंधरा सरकार ने श्रम कानूनों में राज्य स्तर पर मजदूर विरोधी संशोधन पास किए। तत्कालीन कांग्रेस सरकार का 3 साल से ज्यादा का कार्यकाल निकलने के बाद भी उन संशोधनों को वापस नहीं लेना यह दिखाता है कि उसका रुक भाजपा की सरकारों से मजदूरों के मामले में कुछ अलग नहीं है । हम यह मांग करते हैं कि राज्य स्तर पर इन मजदूर विरोधी श्रम कानूनों में संशोधनों को वापस लिया जाए और मजदूरों के पक्ष में केंद्र सरकार जो चार श्रम कोड लायी है  उनको राज्य सरकार राजस्थान में लागू न करे, क्योंकि श्रम विषय  संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत आता है। 
इस मौके पर मोर्चा कांग्रेस नेतृत्व का ध्यान इस तरफ दिलाना चाहता है की उदयपुर शहर जहां यह चिंतन शिविर आयोजित किया जा रहा है,  अर्बन इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (UIT) के फैसले के तहत पेरीफेरी में आ रहे 66 गांवों के हजारों बाशिंदों को भू – माफियाओं को फायदा पहुंचाने वाले फैसले के चलते लंबे समय से काबिज होने के बाद भी उन पर बेदखली की तलवार लटका दी है । हम मांग करते हैं की तुरंत इन गांवों में सर्वे कराकर बिलानाम और चरणोट और तमाम किस्म की ज़मीनों  पर काबिज काश्तकारों और आमजन के अधिकारों को रिकॉर्ड करने के बाद ही किसी तरह के मास्टर प्लान को लागू किया जाए । 
मोर्चा यह भी मांग करता हैं की राजस्थान में खाद्य सुरक्षा के बंद पोर्टल को खोला जाए जिसका बंद होना भोजन के संवैधानिक अधिकार पर हमला हैं और राज्य  सरकार के विभिन्न विभागों में ठेके पर काम कर रहे सब कर्मचारियों को नियमित किया जाए ।
भाजपा राज्य में आगामी चुनावो को देखते हुए अपने करीबी दक्षिणपंथी संगठनों की मदद से लगातर सांप्रदायिक घटनाओं को अंजाम दे रहीं हैं। राजस्थान की राज्य सरकार इनको रोकने में असफल रही हैं। हम मांग करते हैं की साम्प्रदायिक घटनाओं को अंजाम देने वाले तत्वों के खिलाफ राज्य में सख्त कार्यवाही की जाए और कानून व्यवस्था को बहाल किया जाए। 
मोर्चा राज्य सरकार का OPS लागू करने के फैसले का स्वागत करते हुए केन्द्र का PFRDA के माध्यम से NPS के तहत राज्य के कर्मचारियों का रु 39,000 करोड़ नहीं लौटाने के फैसले का पुरजोर विरोध करता हैं।
*यह बयान राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा के घटक दलों माकपा, भाकपा, भाकपा (माले), जनता दल (सेक्युलर) के द्वारा सयुक्त रूप से जारी किया गया हैं*। 
*अर्जुन देथा*(प्रदेशाध्यक्ष, जनता दल (सेक्युलर))  *राजेश सिंघवी* (जिला सचिव, उदयपुर, माकपा) *सुभाष श्रीमाली* (जिला सचिव, उदयपुर
, भाकपा), *शंकरलाल चौधरी*, राज्य कमिटी सदस्य (भाकपा (माले) )

Ramswaroop Mantri

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