सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशद्रोह क़ानून पर फ़ौरी रोक लगाने के आदेश के बाद भारत सरकार के विधि मंत्री किरन रिजीजू ने सुप्रीम कोर्ट को लक्ष्मण रेखा की याद दिलाई है. लेकिन उनकी भाषा में सुप्रीम कोर्ट के लिए धमकी की ध्वनि है. यह चिंता का विषय है.
देश की आज़ादी के तत्काल बाद ही अंग्रेजों द्वारा बनाये गये इस क़ानून को समाप्त कर दिया जाना चाहिए था. लेकिन दुर्भाग्य है कि लोकतंत्र विरोधी इस क़ानून के दुरुपयोग की प्रवृत्ति दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. मौजूदा समय में तो इसका सारा रेकाड टूट गया है. अस्सी नब्बे वर्ष की उम्र वाले लोग भी इस क़ानून के अंतर्गत जेलों में बंद है. राँची के 83 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी तो क़ैद में ही मर गए.
लोकतंत्र और संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों में यक़ीन रखने वाले तमाम लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का स्वागत किया है. इस क़ानून को रखा जाना चाहिए या हटा दिया जाना चाहिए इस पर सुप्रीम कोर्ट जुलाई में सुनवाई करेगा. आज़ादी की लड़ाई में यह वादा था कि आज़ाद देश में ऐसे क़ानूनों का कोई स्थान नहीं रहेगा. आज़ादी के बाद अब तक की कोई सरकार उस वादे को पुरा नहीं कर पाई. हम उम्मीद करते हैं उस वादा को सुप्रीम कोर्ट ज़रूर पुरा करेगा. शिवानन्द तिवारी,पूर्व सांसद
विधि मंत्री किरन रिजीजू की भाषा में सुप्रीम कोर्ट के लिए धमकी की ध्वनि-शिवानन्द तिवारी,पूर्व सांसद





