कैसा होता है भूखा रहना
भूख जो अंतड़ियों से गले और नस नस में फ़ैल जाती है।
भूख इंसान को पागल बना सकती है।
मधु अब फिर कभी यहाँ जन्म मत लेना।
भंवरलाल जैन तुम भी अब कभी भारत में जन्म न लेना,

अमिताभ शुक्ला की वाल से….
पांच साल पहले केरल का मधु एक अर्ध विक्षिप्त युवक था जिसे दो मुठ्ठी चावल चुराने के इल्ज़ाम में कुछ युवकों ने नारियल के पेड़ से बांधकर तब तक बेरहमी से मारा जब तक वह मर नहीं गया
कल एक अर्ध विक्षिप्त बुजुर्ग को नीमच में ऐसे ही मजाक मजाक में मार दिया,
सोचता हूं किसी को जान से मार देने के लिए कितने घूंसे तमाचे लगाने पड़ते होंगे,
भारत के एक शहर में एक उठाईगीर एक विदेशी लड़की का बैग लेकर भागा।
उस लड़की के शोर मचाने पर कुछ लोगों ने उस चोर का पीछा किया और उसे पकड़ लिया।
फिर क्या था,उसे लोगों ने मारना शुरू किया,हाथ पैर डंडे जूते जो मिला उसी से मारा।लहूलुहान कर दिया।
वो विदेशी लड़की और उसके मित्र बहुत ज्यादा डर गए,वो विदेशी लड़की रोने लगी लोगों से हाथ जोड़कर विनती करने लगी कि उस चोर को न मारें।उसे बैग भी नहीं चाहिये,
वो लड़की उस चोर के ऊपर लेट गई तब लोगो ने मारना बंद किया।
वो यूरोपियन लड़की थी,
उसकी संवेदना जीवित थी,वो ऐसे समाज से आई थी जहां इतनी क्रूरता कल्पना से परे होगी।
भारत में ये कुछ नया नहीं।
क्यों आता है हम लोगों को इतना गुस्सा?
लोग जब एक भीड़ या मॉब में बदल जाते हैं तो क्या सामूहिक क्रोध व्यक्तिगत चेतना पर हावी हो जाता है?
क्या भारत में संवेदना मरती जा रही है?
आजकल लोग मारते हैं और उसका वीडियो बनाकर साझा करते हैं, बहुत लोग उसे देखते हैं।।
दो साल पहले मधु नामके युवक को केरल चावल चोरी के लिए पीट पीट कर मार डाला?
बेरहमी से मार डालना
वो भी अर्ध विक्षिप्त का?
कैसा होता है भूखा रहना
भूख जो अंतड़ियों से गले और नस नस में फ़ैल जाती है।
भूख इंसान को पागल बना सकती है।
मधु अब फिर कभी यहाँ जन्म मत लेना।
भंवरलाल जैन तुम भी अब कभी भारत में जन्म न लेना,
बहुत बहुत निराशाजनक और दुखद है।
मानवता से विश्वास थोड़ा हिल जाता है।
क्या वजह है कि हम सब में इतना क्रोध भरा हुआ है।पीट पीट कर मार डालना। आदमी की जान सख्त होती है ।जल्दी मरता नहीं,सोचिये कितना मारा होगा,कितनी देर तक मारा होगा।वो भी केरल जैसे शिक्षित प्रदेश में।
नीमच जैसी जगह में,
कोई नेता का भाषण हो वो व्यंग्य,झूठे वादे उलाहने पर होता है, नेगेटिव।लोगों को भड़काने वाला,नफरत फैलाने वाला चाहे किसी पार्टी,व्यक्ति या धर्म से हो।
कोई टीवी बहस हो तो लगता है कि एक दूसरे को गाली देने लगेंगे या मार पीट कर लेंगे।
कोई तब्दीली की सूरत नजर नहीं आती।
क्या इस अंधेरी सुरंग के आखिर में कोई रौशनी की किरण झलकेगी?
दुष्यंत ने कहा
जरखेज ज़मीनों में बीमार फसल होगी।
जिस बात का खतरा था सोचो के वो कल होगी।
तफ्सील में जाने से ऐसा तो नहीं लगता।
हालात के नक्शे में अब रद्दो-बदल होगी।।





