अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

भारत में भूखमरी बनाम अन्न की बर्बादी !

Share

निर्मल कुमार शर्मा

अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में स्थित चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित ‘क्लाइमेट चेंज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट आफ हार्टिकल्चर ‘ विषय पर चार दिन के लिए आयोजित नेशनल कांफ्रेंस में सुप्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक एवम् चयन बोर्ड के चेयरमैन डाक्टर ए के श्रीवास्तव ने बताया कि ‘हमारा देश पूरे विश्व में फल एवम् सब्जी उत्पादन में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है !’लेकिन सबसे ज्यादे दु:ख की बात है कि इसी देश में इनकी उचित देखभाल,ट्रान्सपोरेशन,उचित भंडारण और कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने के कारण हर साल लगभग 20 खरब मूल्य की फल और सब्जियां सड़-गलकर नष्ट हो जाती हैं ! 

        भारत सरकार के कृषि मंत्रालय की फसल अनुसंधान इकाई सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी या सीफैट या Central Institute of Post Harvest Engineering and Technology or CFAT,की रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 67 लाख टन खाद्य पदार्थों की बर्बादी हर साल होती है।सीफैट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल करीब 16.2 करोड़ टन सब्जियों और 8.1 करोड़ टन फलों का उत्पादन होता है। लेकिन कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण के अभाव में इनमें से लगभग 20 से 22 फीसदी तक फल और सब्जियां कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण के अभाव में खराब हो जाते हैं। 

                भारतीय उद्योग संगठन एसौचेम के एक अध्ययन के अनुसार फलों और सब्जियों के तैयार होने के बाद होने वाले नुकसान का आकलन राज्यों में इसके उत्पादन और थोक बाजार मूल्य के आधार पर किया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि फलों और सब्जियों के कुल उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा नष्ट हो जाता है। राज्यनुसार हर साल फलों, सब्जियों और अन्न की बर्बादी के निम्न आंकड़े हैं-पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 13657 करोड़ रुपयों का,गुजरात में 11398 करोड़ रूपयों का,बिहार में 10744 करोड़ रूपयों का और उत्तर प्रदेश में 10312 करोड़ रुपये मूल्य की फल-सब्जियां नष्ट हो जाती हैं। इसी प्रकार महाराष्ट्र में 10100 करोड़, तमिलनाडु में 8170 करोड़, कर्नाटक में 7415 करोड़, आंध्र प्रदेश में 5633 और मध्य प्रदेश में 5332 करोड़ रुपये मूल्य के फलों और सब्जियों के नष्ट होने का अनुमान है।

सीफैट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में फिलहाल 6500 कोल्ड स्टोरेज हैं,जिनकी कुल भंडारण क्षमता 3.1करोड़ टन है। जबकि भारत में इससे दोगुने कोल्डस्टोरेज की जरूरत है,क्योंकि भारत की फल-सब्जियों का कुल उत्पादन लगभग 6.1 करोड़ टन है, इसलिए कोल्ड स्टोरेज की वर्तमान उपलब्धता से दोगुने कोल्ड स्टोरेज की और जरुरत है,ताकि बड़ी संख्या में फल,अनाज के साथ खाद्यान्न खराब न हो।

भारत में कुपोषण और भूखमरी आखिर क्यों है ?

संयुक्त राष्ट्र के भोजन व कृषि संगठन की रिपोर्ट ‘दुनिया में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति – 2019’के अनुसार, दुनियाभर में सबसे ज्यादा 14.5 प्रतिशत यानी 19.44 करोड़ कुपोषित और भूखे लोग भारत में ही हैं। ये वे लोग हैं जिन्हें दोनों वक्त का भोजन नसीब ही नहीं है, इनमें से ज्यादातर को रात में भूखे ही सो जाना पड़ता है !संयुक्त राष्ट्र के ही वैश्विक पोषण रिपोर्ट-2018 बताती है कि देश में हर दिन 3000 बच्चों की कुपोषण से जुड़ी बीमारियों के कारण मौत हो जाती है। यहां हर दूसरा बच्चा समुचित भोजन न मिलने से कुपोषित हैं ! यह स्थिति तब है जबकि दुनिया में भारत भैंस का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सब्जी, फल व मछली उत्पादक देश भी है। 

संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक पोषण रिपोर्ट-2018 बताती है कि देश में हर दिन 3000 बच्चों की कुपोषण से जुड़ी बीमारियों के कारण मौत हो जाती है । यह स्थिति तब है जबकि दुनिया में भारत भैंस का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सब्जी, फल व मछली उत्पादक देश है। लेकिन दूसरी तरफ भारत में 40% अन्न बर्बाद हो जाता  है, हर दूसरा बच्चा कुपोषित भारत में है ! हर दूसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है। यूनिसेफ की जारी हुई रिपोर्ट यह चौंकाने वाले आंकड़े पेश करती है। यह हालात तब हैं जबकि देश में हर साल 1 लाख करोड़ का अनाज बर्बाद हो जाता है !

           भारत में हर दूसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है। यूनिसेफ की सोमवार को जारी हुई रिपोर्ट यह चौंकाने वाले आंकड़े पेश करती है। यह हालात तब हैं जबकि देश में हर साल 1 लाख करोड़ का अनाज बर्बाद हो जाता है। पूरी दुनिया को 2030 तक भुखमरी से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत को उक्त वर्णित भयावह स्थिति से निपटने के लिए ऐसी नीति को अपनाया जाना चाहिए ताकि देश में गरीब-अमीर के बीच की खायी पटे और भोजन का एक-एक दाना तक भी व्यर्थ न हो।

            कितने दु:ख और हतप्रभ करने वाली बात है कि ऑक्सफेम इंडिया ने कहा कि वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में भारत का 101वां स्थान भारतीय राजनैतिक कुव्यवस्था के यथार्थ को दर्शाता है जहां कोविड-19 महामारी के बाद से भारत में भुखमरी और बढ़ी है। भारत 116 देशों के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में 101वें स्थान पर फिसलकर पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी पीछे चला गया है। इस सूचकांक में 2020 में भारत 94वें स्थान पर था !

भारत में इतने बंपर उत्पादन के बावजूद भूखमरी और कुपोषण क्यों ?

                     ___________

            ऑक्सफेम इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ बेहर ने कहा कि ‘कुपोषण की यह स्थिति वर्तमान सरकार के कर्णधारों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, क्योंकि इसका अंतर-पीढ़ीगत प्रभाव पड़ेगा ! इसे सीधे शब्दों में कहें तो नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के कई हिस्सों में 2015 और 2019 के बीच पैदा हुए बच्चे पिछली पीढ़ी की तुलना में अधिक कुपोषित हैं !’

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में स्थित चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित ‘क्लाइमेट चेंज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट आफ हार्टिकल्चर ‘ विषय पर चार दिन के लिए आयोजित नेशनल कांफ्रेंस में ही डाक्टर वाईएसआर हार्टिकल्चर विश्वविद्यालय आंध्रप्रदेश के वाइसचांसलर डाक्टर टी जानकीराम ने कहा कि ‘ हमारे देश में फसलों,फलों और सब्जियों पर रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक सेवन तथा प्रतिकूल मौसम के प्रभाव से इनकी सेहत,गुणवत्ता,सुंदरता और उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है,इनका स्वाद,सुगंध और पोषण पर भी भारी विकृति आ रही है ! वातावरण में आ रहे भारी बदलाव मतलब ग्लोबल वार्मिंग का सबसे ज्यादा बुरा असर फलों, सब्जियों के कटने के बाद मतलब हार्टिकल्चर की फसलों पर पड़ रहा है ! अब समय आ गया है कि हमारे देश में भी सूचना प्रौद्योगिकी या आईटी की मदद से मौसम की सटीक भविष्यवाणी करके उस मौसम के अनुरूप फलों, सब्जियों और अन्य फसलों की प्रजातियों को विकसित किया जाय,इससे फलों,सब्जियों और अन्य फसलों का भी नुकसान न्यूनतम् होगा और साथ-साथ किसानों की भी आय बढ़ेगी ‘

लेकिन कितने दु:ख की बात है कि तमाम राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय अध्ययनों और रिपोर्टों में भारत की गरीबी,भुखमरी, बेरोज़गारी,अशिक्षा आदि की उक्त वर्णित भयावह तस्वीरों के आने के बाद भी वर्तमान समय के सरकार के कर्णधारों को उन भयावह स्थिति को सुलझाने की कतई चिंता नहीं है ! वे अभी भी इस देश को,यहां के समाज को दु:खदरूप से धार्मिक व जातीय वैमनस्यता की आग में झोंकने को सदैव उद्यत हैं !

  -निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक, सामाजिक,आर्थिक,पर्यावरण तथा राजनैतिक विषयों पर सशक्त व निष्पृह लेखन ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र,      

ReplyForward

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें