
डॉ. प्रिया
_एंगेल्स का मत था कि द्वंद्ववाद की कसौटी प्रकृति है और आधुनिक प्रकृति विज्ञान के बारे में यह स्वीकार करना पड़ता है कि उसने इस कसौटी के लिए अत्यंत मूल्यवान सामग्री दी है जो प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
इस प्रकार उसने सिद्ध कर दिया है कि अंततोगत्वा प्राकृतिक घटनाक्रम द्वंद्वात्मक है, न कि पराभौतिक (या ईश्वरीय या आध्यात्मिक). यहाँ पर सबसे पहले डार्विन का उल्लेख करना चाहिए जिसने प्रकृति के पराभौतिक (या दैवीय ) कल्पना पर दुःसह प्रहार किया था और सिद्ध किया था कि आज का चराचर विश्व-वनस्पति, जीव और फलतः मनुष्य भी सभी कुछ उस विकास-क्रम का परिणाम है जो करोड़ों वर्षों से लगातार होता चला आ रहा है।
_संसार में अज्ञेय कहकर कोई वस्तु नहीं है;अज्ञात वस्तुएँ अवश्य हैं जो विज्ञान और अभ्यास द्वारा प्रकट होंगी और तब ज्ञेय हो जाएंगी। भौतिक विज्ञान में जिन “अज्ञात” चीज़ों को “ज्ञेय” बनाने के लिए ब्रिटेन के रोज़रपेन रोज़, ज़र्मनी के रेनहर्ड गेंज़ेल और अमरीका की सुश्री आन्द्रिया ग़ेज़ को नोबेल पुरस्कार दिया गया है वे सभी डार्विन की ही परंपरा में द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के लिए नवीनतम मूल्यवान सामग्री प्रदान करते हैं।_
नोबेल कमेटी ने कहा है इन वैज्ञानिकों ने “ब्रह्मांड के सबसे असाधारण घटनाक्रम ब्लैक होल के विषय में जबरदस्त शोध दुनिया के सामने पेश किया है “। पेनरोज़ को जहाँ उनके शोध “सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत ब्लैक होल के निर्माण तक ले जाते हैं” के लिए सम्मानित जाएगा, वहीं गेंज़ल और सुश्री गेज़ को संयुक्त रूप से उनके इस खोज के लिए पुरस्कार प्रदान किया जाएगा जिसमें कहा गया है कि ” सितारों की कक्षा को शासित करने के लिए हामारे तारामंडल के केंद्र में एक ओझल एवं अत्यंत भारी वस्तु विद्यमान है “।
सुश्री ग़ेज़ चौथी महिला हैं जिन्हें 1901 में मैडम क्यूरी को मिले पुरस्कार के बाद चुना गया है। ग़ेज़ कहती हैं कि “इस रूप में अपने को पहचाने जाने के लिए मैं बेहद प्रसन्नता का अनुभव कर रही हूँ क्योंकि मैं सोचती हूँ कि मेरा प्रस्तुत रोल मॉडल उन युवतियों पर बहुत बड़ा प्रभाव डालेगा जो वैज्ञानिक बनने की सोच और इच्छा रखतीं हैं।”
_”ब्लैक होल” शब्द अंतरिक्ष में उस विंदु के लिए इस्तेमाल होता है जहाँ पदार्थ या वस्तु इतना संकुचित हे जाता है कि गुरुत्व का ऐसा क्षेत्र बन जाता है जिससे होकर प्रकाश तक पास नहीं कर सकता। वर्षों से भौतिकशास्त्री सवाल करते रहे हैं कि क्या वास्तव में ब्लैकहोल अस्तित्व रखता है भी कि नहीं ?_
इसी सवाल के समाधान की तलाश करते हुए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर पेनरोज़ ने 1965 में ही गणितीय पद्धति से यह साबित कर दिया था कि ब्लैकहोल बन सकता है। उनका आकलन सिद्ध करता था कि ब्लैकहोल (जब कोई भारी तारा अपनी गुरुत्व के भार से विस्फोटित होता है तो अत्यधिक सघन वस्तु का निर्माण करता है।
यह आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत का सीधा परिणाम था । रॉयल साइंस स्वीडिश एकेडमी ने पेनरोज़ के चयन पर कहा कि 89 वर्षीय इस वैज्ञानिक की 1965 की आर्टिक्ल को अाज भी आइंस्टीन के बाद से सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत में सबसे महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जाता है।
_पेनरोज़ लब्धप्रतिष्ठ वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिन्स के साथ गहरे जुड़े थे और उनके घनिष्ठ सान्निध्य में काम करते रहे थे।_
जर्मनी के ग़ेंज़ेल और अमेरिका की सुश्री ग़ेज़ 1990 से ही अंतरिक्ष के उस क्षेत्र में काम कर रहीं थीं जिसे आकाश गंगा के केंद्र में स्थापित सैगिटैरस ए* (यानि धनु राशि ए*) कहा जाता है। इसके लिए उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी दूरबीन का इस्तेमाल किया.
इसके ज़रिए उन्होंने एक अत्यंत भारी ओझल वस्तु का पता लगाया जो सूर्य के पिंड से लगभग चालीस लाख गुना बड़ा है –जो तारामंडल में एक ख़ास क़िस्म का चक्करदार छल्ला बनाते हुएअपने आसपास के तारों को खींचता है।
_तीन ब्लैक होल वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड में सबसे विलक्षण घटनाक्रमों में से एक पर खोज के नोबेल पुरस्कार से नवाज़े जाने का मतलब है चाहे अनचाहे अंततोगत्वा उस तथ्य या सत्य को स्वीकार करना कि ब्रह्मांड में या चरारचर विश्व में कोई भी अज्ञात चीज़ें ज्ञेय हैं, उन्हें आज न कल देर सबेर मनुष्य के द्वारा जाना जा सकता है ।_
{चेतना विकास मिशन}





