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सत्यकथा : नफ़रत और घृणा

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मीना राजपूत

न्यायाधीश ने मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति अनवर सादात के हत्यारे से पूछा : “तुमने सादात को क्यों मारा?

 उसने उससे कहा: “क्योंकि वह एक धर्मनिरपेक्ष था!

 न्यायाधीश ने पूछा, “धर्मनिरपेक्ष का क्या अर्थ है?

 हत्यारे ने कहा, “मुझे नहीं पता!

 मिस्र के दिवंगत लेखक नागुइब महफौज की हत्या के प्रयास के मामले में, न्यायाधीश ने उस व्यक्ति से पूछा जिसने नागुइब महफौज को चाकू मारा था :

 “तुमने उसे चाकू क्यों मारा?

 आतंकवादी ने कहा: अपने उपन्यास – ”हमारे पड़ोस के बच्चे” की वजह से।

 जज ने उससे पूछा, “क्या आपने यह उपन्यास पढ़ा है?”  »

 अपराधी ने कहा, “नहीं!”

 एक अन्य जज ने मिस्र के लेखक “फराज फौदा” की हत्या करने वाले आतंकवादी से पूछा : “तुमने फराज फौदा की हत्या क्यों की? 

 आतंकवादी ने उत्तर दिया: “क्योंकि वह काफिर है!”  

 न्यायाधीश ने उससे पूछा, “तुम्हें कैसे पता चला कि वह काफिर था?”  

 आतंकवादी ने उत्तर दिया: “उसने लिखी किताबों के अनुसार”।

 जज ने कहा, “उनकी कौन सी किताब ने आपको यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि वह काफिर थे?”  

 आतंकवादी: “मैंने उसकी कोई किताब नहीं पढ़ी है!  

 जज: “क्या !?”

 आतंकवादी ने जवाब दिया, “मैं पढ़ या लिख ​​नहीं सकता! 

       _नफ़रत और घृणा कभी ज्ञान से नहीं जन्मती/फैलती। इसका आधार अज्ञानता है, जड़ता यानी मूढ़ता है._

   {चेतना विकास मिशन)

Ramswaroop Mantri

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