इंदौर
शहर की सरकार (नगरीय निकाय) चुनने के लिए विभिन्न राजनीतिक 15 दिनों से जिस तरह से शहर में माहौल बना रखा था और जिस तरह से सरकार द्वारा अपने राष्ट्रीय अधिकारी मताधिकार की अपील की जा रही थी, उसका असर यह रहा कि दिनभर मौसम खुला होने के बावजूद इस बार मतदान को लेकर माहौल का सुस्त रहा। स्थिति यह रही कि शुुरुआती दो घंटे में सिर्फ 9.84 प्रतिशत वोटिंग हुई। इसके बाद धीरे-धीरे मतदान कुछ तेज हुआ और शाम 5 बजे जितनी उम्मीद थी, उसने निराश किया। शहर में 18.50 लाख लोगों को वोट देना थे जिनमें में 11.17 लाख लोगों (60.88 प्रतिशत) ने ही वोट दिए। दूसरी ओर जिस तरह से वोटिंग हुई है और माहौल रहा उससे संभव है कि 17 जुलाई को चौंकाने परिणाम आएंगे।
नगरीय निकाय चुनाव में यह पहला मौका है जब चुनाव की तैयारियों को लेकर काफी कम समय मिला। इसमें भी मंगलवार हुई जोरदार बारिश से प्रत्याशियों व वरिष्ठ नेताओं को चिंता थी कि कहीं मतदान वाले दिन ऐसी बारिश न हो। बुधवार अलसुबह ही मौसम साफ था, इसके बावजूद शहरी क्षेत्र में काफी सुस्ती रही। इस दौरान मतदान केंद्रों पर राजनीतिक दलों से जुड़े नेता, कार्यकर्ता व उनके परिवार के लोग ही देखे गए। खास बात यह कि प्रशासन ने एक दिन पहले ही इसके लिए स्थानीय अवकाश रखा था और औद्योगिक क्षेत्रों व प्राइवेट संस्थाओं को भी अवकाश के निर्देश दिए थे लेकिन इंदौरी इस बार इतने उत्साहित नहीं दिखे।

मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में उत्साह।
मुस्लिम बाहुल्य वार्डों जबर्दस्त वोटिंग
इस बार मुस्लिम बाहुल्य वार्डों में जबर्दस्त वोटिंग के प्रति जबर्दस्त उत्साह देखा गया। विधानसभा 5 के श्रीनगर कांकड़, अनूप नगर, मूसाखेड़ी, आजाद नगर, खजराना, मूसाखेड़ी आजाद नगर, विधानसभा 3 के दौलतगंज, हाथीपाला, रानीपुरा तथा विधानसभा- 1 के चंदन नगर, नंदन नगर, ग्रीन पार्क कॉलोनी आदि क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर दोपहर बाद मतदान में काफी तेजी रही। इसमें महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। दूसरी ओर पॉश एरिया रेसीडेंसी जैसे क्षेत्र के मतदान केंद्र में मतदान काफी धीमा रहा।
ऐसा रहा मतदान का रुख
- सुबह 7 बजे से 9 बजे तक 9.85 प्रतिशत।
- सुबह 7 बजे से 11 बजे तक 24.41 प्रतिशत।
- सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक 38.93 प्रतिशत।
- सुबह 7 बजे से 3 बजे तक 51.26 प्रतिशत।
- सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक 60.88 प्रतिशत।
सबसे कम विधानसभा 5 में वोटिंग
इस बार सबसे ज्यादा वोटिंग विधायक संजय शुक्ला की विधानसभा-1 में 63.88 प्रतिशत वोटिंग हुई। विधानसभा-2 (विधायक रमेश मेंदोला व इस बार के चुनाव संचालक) के क्षेत्र में 58.31 प्रतिशत, विधानसभा-3 (विधायक आकाश विजयवर्गीय) में 61.65 प्रतिशत, विधानसभा-4 (विधायक मालिनी गौड) में 63.79 प्रतिशत, विधानसभा-5 में 58.06 प्रतिशत तथा विधानसभा राऊ (विधायक जीतू पटवारी) में 60.88 प्रतिशत मतदान हुआ। सबसे कम वोटिंग विधानसभा-5 में हुई।
पिछली बार 62.35 प्रतिशत हुई थी वोटिंग
2015 में नगरीय निकाय चुनाव में 16.62 लाख वोटर्स थे जिनमें से 10.36 लाख लोगों ने वोट दिए थे। इनमें से 65.30 प्रतिशत पुरुष व 59.35 प्रतिशत महिलाएं थी। तब 5 प्रत्याथी थर्ड जेंटर थे और उनका 1 प्रतिशत मतदान था। इस तरह तब 62.35 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। उस दौरान काफी पहले ही चुनाव की घोषणा हो गई थी। इस बार दो साल कोरोना काल रहा। फिर आरक्षण को लेकर भाजपा व कांग्रेस के बीच खींचतान व कोर्ट तक मामला पहुंचा। इसके बाद दोनों दलों में पार्षद प्रत्याशियों की घोषणा काफी देर से की। भाजपा ने 17 जून को अपना महापौर प्रत्याशी घोषित किया और इसके बाद चुनावी मुकाबले की सही तस्वीर सामने आई। इस तरह सही मायने चुनाव प्रचार के 16 दिन ही रहे जबकि वोटिंग 60.88 प्रतिशत रही।
6.30 बजे से पोलिंग टीम स्टेडियम पहुंचना शुरू, स्वागत

स्टेडियम पहुंचे पोलिंग टीम का स्वागत।
उधर, मतदान के बाद शाम 6.30 बजे पोलिंग टीम ईवीएम मशीनें लेकर स्टेडियम पहुंचना शुरू हो गई। सबसे पहले विधानसभा 5 से अलकापुरा की एक पोलिंग टीम स्टेडियम पहुंची। इस दौरान स्टेडियम में मौजूद अधिकारियों की टीम ने उनका स्वागत किया तो उत्साहित मतदान कर्मी खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। बहरहाल इस बार ईवीएम रखने के लिए तीन स्ट्रांग रूम बनाए गए हैं। यहां निगम चुनाव संबंधी सारी ईवीएम रखी गई है जबकि सभी 8 नगर परिषदों की ईवीएम संबंधित परिषदों में रखवाई गई है। स्टेडियम के प्रत्येक हिस्से में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ऐसे ही लोकल पुलिस के अलावा एसएएफ की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा स्टेडियम परिसर में बड़ी एलईईी लगाने की तैयारी है ताकि अंदर की सुरक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग भी की जा सके।
352 प्रत्याशियों का भाग्य 17 जुलाई तक ईवीएम में कैद
इस बार महापौर के लिए 19 तथा 85 वार्ड पार्षदों सहित कुल 352 प्रत्याशी मैदान में हैं। चुनाव परिणाम 17 जुलाई को घोषित होंगे तब तक इन प्रत्याशियों का भाग्य इन ईवीएम में है। दूसरी ओर अधिकांश प्रत्याशी अब खुमारी उतारने के साथ मतदान के प्रतिशत, फीड बैक व अन्य सूत्रों के माध्यम से हार-जीत के समीकरण में लग गए हैं।





