बड़वानी।मध्य प्रदेश के बड़वानी में नर्मदा बचाओ अभियान से जुड़ीं मेधा पाटकर समेत 12 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। सभी पर नर्मदा नवनिर्माण अभियान एनजीओ को मिले 13.5 करोड़ रुपए के गबन करने का आरोप है। FIR में शिक्षा और जनजातीय बच्चों के नाम पर जुटाए गए फंड का देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। मेधा पाटकर समेत 12 लोगों पर एनजीओ को मिली करोड़ों की राशि गबन मामले में एफआईआर दर्ज हुई है। प्रीतम राज बड़ोले नामक युवक की शिकायत पर बड़वानी कोतवाली पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले को लेकर पूरी तरह चुप्पी साधी हुई है। वहीं मेधा पाटकर ने आरोपों को निराधार बताया है
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बड़वानी कोतवाली पुलिस ने एनजीओ की ट्रस्टी मेधा पाटकर, परवीन समी जहांगीर, विजया चौहान, कैलाश अवास्या, मोहन पाटीदार, आशीष मंडलोई, केवल सिंह वसावे, संजय जोशी, श्याम पाटिल, सुनीति एसआर, नुरजी पदवी और कौशल वसावे के खिलाफ केस दर्ज किया है
इन पर आरोप है कि नर्मदा नव निर्माण अभियान एनजीओ द्वारा आदिवासी बच्चों की शिक्षा और अन्य सामाजिक कार्यों के नाम पर साढ़े तेरह करोड़ की राशि एकत्र कर कथित तौर पर राजनीतिक गतिविधियों और विकास परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में दुरुपयोग किया गया है। एनजीओ को पिछले 14 वर्षों में 13.50 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है, जबकि इस राशि के स्त्रोत और व्यय का स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है। डेढ़ करोड़ से ज्यादा राशि बैंक से नगद निकासी की गई। निकासी का ऑडिट व खाता विवरण भी अस्पष्ट है। ट्रस्ट के 10 खातों में से 4 करोड़ से अधिक राशि नियमित और अज्ञात निकासी हुई है।
एफआईआर दर्ज कराने वाले प्रीतम बडोले का कहना है कि महाराष्ट्र के नंदूरबार जिले में ‘जीवनशाला’ (स्कूल) संचालित करना बताया गया था, लेकिन जब वहां पर जाकर वास्तविकता देखी गई, तो वहां कोई स्कूल नहीं है। साथ ही सीसेआर के तहत जो पैसा विकास कार्य में लगाना था, वह पैसा भोजन पर व्यव करना बताया है, जबकि वह पैसा भोजन में व्यय नहीं कर सकते। फरियादीका कहना है कि उसके पास इस मामले में पूरे सबूत हैं।
मेधा पाटकर ने आरोपों को बताया निराधार
मेधा पाटकर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अभी पुलिस की तरफ से कोई सूचना या नोटिस नहीं मिला है। हमारे पास आय और व्यय संबंधित सभी दस्तावेज और ऑडिट उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि विस्थापन बच्चों के लिए चलाई जाने वाली जीवनशालाएं 30 वर्षों से संचालित है। हर साल ऑडिट होता है। हमने पहले भी कई बार इसका जवाब दिया है और अब भी हम तैयार हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिसने किया है उसे किसी ने भ्रमित किया होगा। हम कानून का सहारा लेंगे।





