मनीष आज़ाद
कटघरे में खड़े सुकरात को
जब ज़हर पिलाने का आदेश दिया जा रहा था,
तो कई ‘समझदार ‘ लोगों ने न्यायधीशों को समझाया-
‘यह ठीक नहीं है,
इससे न्याय पर लोगों का विश्वास उठ जाएगा !’
न्यायधीशों का तर्क था,हमें “नंगे राजा की इज़्ज़त ” की हर हाल में रक्षा करनी है !
यही आज का कानून है !
हमे कल की नहीं, अपितु आज की चिंता है !
न्यायाधीशों का अड़ियल रुख देखकर,‘समझदार ‘ लोग सुकरात की ओर मुखातिब हुए,
जो न्यायधीशों की आंखों में घूरते हुए,
ज़हर के प्याले का इंतजार कर रहा था !
'तुम्हारे सामने अभी पूरी जिंदगी पड़ी है,तुम्हें अभी बहुत कुछ करना है ‘,
‘माफ़ी मांग लो, क्या फ़र्क पड़ता है ‘
सुकरात के कान में वे न्यायाधीश फुसफुसाये !
सुकरात ज़हर के प्याले को हाथ में लेते हुए,हौले से मुस्कुराया,
‘मुझे आज की नहीं, कल की चिंता है,
मुझे भविष्य की चिंता है… ! ‘
यह कहकर सुकरात ने एक बार में ही प्याला गटक लिया !
साभार -मनीष आज़ाद के फेसबुक वॉल से,
संकलन - निर्मल कुमार शर्मा गाजियाबाद उप्र संपर्क - 9910629632




