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इतिहास नहीं दोहराता स्वयं को?

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शशिकांत गुप्ते

एक कहावत है कि, इतिहास स्वयं को दोहराता है।
इस कहावत को शब्दशः समझना ग़लत है। इस कहावत को गढ़ने के पीछे जो महत्वपूर्ण आशय है, उस आशय को गम्भीरता से समझना जरूरी है।
दरअसल इतिहास स्वयं को कभी भी नहीं दोहराता है। इस कहावत का उपयोग कुछ स्वार्थी तत्व अपने स्वार्थ को जायज ठहराने के लिए करतें हैं।
इतिहास को अच्छे से पढ़कर,समझना चाहिए। इतिहास से सबक सीखना चाहिए।
इतिहास में जो गलतियां हई हैं,वही गलतियां पुनः दोहराई न जाए। बहुत से लोग इतिहास में घटित हुई उन्ही गलतियां को वर्तमान में दौहरतें हैं, और उक्त कहावत का सहारा लेकर स्वयं को Justify मतलब न्यायोचित ठहराते हैं।
इस मुद्दे पर मैने, मेरे मित्र सीतारामजी से विचार विमर्श किया तो उन्होंने मुझे सन 1959 में प्रदर्शित फ़िल्म दीदी के इस गाने का स्मरण कराया।
इस गीत के गीतकार है,शायर साहिर लुधियानवीजी
सीतारमजी ने कहा यह गाना अभिनेता सुनील दत्तजी पर स्कूल के एक कक्षा में फ़िल्माया है।
इस फ़िल्म में सुनील दत्तजी ने स्कूल के अध्यापक का अभिनय किया हैं।
इस गीत में कक्षा के विद्यार्थी और अध्यापक का संवाद है।
विद्यार्थी का सवाल है।
एक विद्यार्थी गाकर पूछता है।
हम ने सुना था
एक है भारत
सब मुल्कों से
नेक है भारत
लेकिन जब नज़दीक से देखा
सोच समझ कर ठीक से देखा
हम ने नक़्शे और ही पाये
बदले हुए सब ठौर ही पाये
एक से एक की बात जुदा है
धर्मं जुदा है ज़ात जुदा है
आप ने जो कुछ हम को पढ़ाया
वो तो कहीं भी नज़र न आया
अध्यापक का जवाब
जो कुछ मैं ने तुम को पढ़ाया
उस में कुछ भी झूठ नहीं
भाषा से भाषा न मिले तो
इस का मतलब फूट नहीं
इक डाली पर रह कर जैसे
फूल जुदा हैं पात जुदा…..
विद्यार्थी के सवाल
वही है जब क़ुरान का कहना
जो है वेद पुराण का कहना
फिर यह शोर शराबा क्यों है
इतना खून खराबा क्यों है
अध्यापक का जवाब
सदियों तक इस देश में बच्चों
रही हुकूमत गैरों की
लड़वाओ और राज करो
यह उन लोगों की हिकमत थी…….
.
इस गीत की एक एक पंक्ति आज के माहौल के लिए प्रासंगिक होने पर मतमतान्तर हो सकतें हैं। उक्त पंक्तियां प्रासंगिक है या नहीं
यह पाठकों के स्वविवेक पर निर्भर है।
स्पष्टिकरण देना अनिवार्य है।
यह गीत सन 1959 में प्रदर्शित फ़िल्म दीदी के लिए गीतकार साहिर लुधियानवीजी ने लिखा है।
मुख्य मुद्दा यह है कि, इतिहास में हुई गलतियों को दोहराकर उक्त कहावत का सहारा लेना ग़लत है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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