14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के तौर पर मनाए जाने की घोषणा भा ज पा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार द्वारा की गई है। देश का विभाजन एक मानवीय त्रासदी थी, जिसका गहरा असर देश पर पड़ा है। 75 वर्ष के बाद उन्ही जख्मों को फिर से कुरेदा जाना त्रासदी पूर्ण है। विभाजन के दौरान पैदा हुए नफरत का उपयोग राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया गया और किया जा रहा है। हमें त्रासदियों के दौरान उत्पन्न हुए जख्मों पर सद्भावना और प्यार का मलहम लगाने की जरूरत है। विभाजन के जख्मों को उभार कर राजनीतिक लाभ की कोशिश करना राष्ट्रहित में नहीं हो सकता।
हमें सदा याद रखना होगा कि हमारी मातृभूमि के विभाजन के चलते लाखों लोगों की मौत हुई तथा उससे कई गुना लोग विस्थापित हुए तथा मोहनदास गांधी -( बापू ) के जीवन को भी इस त्रासदी ने लील लिया।
गोडसे द्वारा गांधी जी की हत्या करवाई गई।
आइए हम 14 अगस्त को यह संकल्प लें कि हम एक साथ आकर नफरत के खिलाफ एकजुट होकर शांति, प्रेम, समता और न्याय पर आधारित भारत का निर्माण करेंगे। हम 14 अगस्त को आत्म चिंतन करेंगे ,नफरत और हिंसा के शिकार हुए व्यक्तियों को श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। नफरत फैलाने वाली और विभाजनकारी शक्तियों को मिलकर हराएंगे। विभाजन का केवल हिंदू , मुस्लिम और सिख ही शिकार नहीं हुआ ,आम व्यक्ति भी पीड़ित हुआ था। हमें 14 अगस्त को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम इस तरह की त्रासदी को फिर कभी दोबारा नहीं होने देंगे!
हम एसजीपीसी द्वारा 17 अगस्त को विभाजन के मृतकों की याद में प्रार्थनाएं और स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाने की घोषणा का स्वागत करते हैं।
हम 15 अगस्त 1947 को देश को मिली आजादी के लिए शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों को सलाम हैं !
डॉ जी. जी. परीख,मेधा पाटकर , तुषार गांधी, प्रो आनंद ,योगेंद्र यादव, डॉ सुनीलम, फिरोज मीठीबोरवाला, गुड्डी, अरुंधति धुरू ((एन एपीएम, उत्तर प्रदेश), संदीप पाण्डेय (शांति कार्यकर्ता), मीरा संगमित्रा (एन एपीएम, तेलेंगाना), सी. आर. नीलकन्दन (एनएपीएम, केरल), चिन्मय मिश्रा (लेखक, पत्रकार, मध्यप्रदेश), आलोक शुक्ला (छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन), विश्वास उटगी (सयुंक्त कामगार कृति समिति), गौतम बंद्योपाध्याय (गांधी विचार फाउंडेशन, छत्तीसगढ़)
7738082170/9029277751





