श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर इंदौर सजने लगा है। बाजार तैयार हैं। दो साल से कोरोना पाबंदियों के बाद पहली बार कान्हा के जन्मोत्सव पर इंदौर खुलकर झूमेगा। मटकियां फूटेंगी, माखन मिश्री बंटेंगी। जानिए इंदौर में जन्माष्टमी पर बाजार में क्या-क्या तैयारी है…
कम्पलीट सेट मार्केट में, सिर्फ घर जाकर विराजित ही करना है
भगवान की पोशाक से लेकर पूजन सामग्री, प्रसाद, मूर्ति व अन्य श्रृंगार के सामान के कम्प्लीट पैकेज भी उपलब्ध हैं। गोपाल जी की प्रतिमा पूर्ण शृंगार (पालने में) के साथ 251 रुपए से लेकर 2100 रुपए तक उपलब्ध है। अन्य सामान के पैकेट भी 120 रुपए से लेकर 501 रुपए तक उपलब्ध है।
अब मूर्तियों की बात…
वस्त्र… पहले बात बालगोपाल की जरदोजी और मोती पोशाखों की…
इंदौर के पाटनीपुरा, मारोठिया और अन्य बड़े बाजार सजे हुए हैं। जरदोजी, मोती के वर्क और कांच के महीन और सुंदर काम वाली पोशाकें आई हैं। साधारण पोशाख 10 से 50 या 60 रुपए तक है। जरदोजी और मोती के काम वाली पोशाक का शुरुआती रेंज 80 रुपए है। 1000 रुपए से लेकर 1200 तक की भी पोशाखें हैं। पाटनीपुरा स्थित विक्रेता सुधीर अग्रवाल ने बताया मथुरा से भी खास तौर पर पोशाक मंगवाई गई हैं।
आभूषण… पोशाक के रंग की मैचिंग जूलरी भी इस बार
व्यापारी राकेश अग्रवाल ने बताया इस बार पोशाक के रंग के हिसाब से मैचिंग आभूषण भी आए हैं। नाथद्वारा से मंगवाई गई पोशाक और मैचिंग जूलरी के साथ भगवान कृष्ण की पगड़ी, बांसुरी, मोरपंख वाली कलंगी उपलब्ध हैं।
मूर्ति और बांसुरी… पीतल की मूर्ति और बांसुरी 10 रुपए से 1000 रुपए तक
लड्डू गोपाल की मूर्तियों और बांसुरी की बात करें तो बाजार में जहां 120 रुपए से लेकर 1200 रुपए तक की पीतल की मूर्तियां उपलब्ध हैं। वहीं पीतल की बांसुरी भी 10 से 250 रुपए की रेंज में है। चांदी और स्वर्ण की मूर्तियों की फिलहाल बाजार में खास डिमांड नहीं है, लेकिन कोटेड मूर्तियां बाजार में उपलब्ध हैं। जिनका मूल्य 101 रुपए से 501 रुपए तक है।
पालना… लकड़ी और स्टील से लेकर चांदी के कोटेड पालने भी
बाजार में इस बार छोटे से लेकर बड़ी साइज में लकड़ी, स्टील और कोटेड चांदी के पालने भी उपलब्ध हैं। नई डिजाइन में हार्ट शेप, बोट शेप से लेकर नॉमर्ल पालने भी मार्केट में कई रंग, डिजाइन, साइज और कीमत में उपलब्ध हैं। लकड़ी के पालने की बात करें तो इसकी कीमत 50 रुपए से लेकर 500 रुपए तक, स्टील के पालने की कीमत 80 रुपए से लेकर 251 रुपए तक है।
मोरपंख, बच्चों के कपड़े और मटकी भी
जन्माष्टमी पर शहर के स्कूलों से लेकर लगभग सभी संस्थाओं और मंदिरों में कृष्ण जन्म का कार्यक्रम धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा माता-पिता भी अपने बच्चों को भगवान कृष्ण की तरह सजाकर उनके फोटों खिंचवाने के साथ ही उन्हें मंदिरों में दर्शन के लिए भी कृष्ण स्वरुप में ही लेकर जाते हैं। इसे देखते हुए बाजारों में 1 से लेकर 5 साल तक के बच्चों के लिए कपड़े, मोर मुकुट आदि भी अलग-अलग रेंज में उपलब्ध हैं। इसके अलावा मटकी फोड़ का आयोजन करने के लिए रिबिन-झालर से सजाई गई मटकियां भी उपलब्ध हैं।
माखन-मिश्री, पंजीरी और ड्रायफ्रूट का प्रसाद
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को चढ़ाने के लिए मुख्य रुप से माखन-मिश्री, पंजीरी और ड्रायफ्रूट के प्रसाद का उपयोग किया जाता है। वैसे भगवान को सबसे प्रिय माखन-मिश्री ही है। ऐसे में जब एलआईजी स्थित तुलसांमृत दूध एवं मिठाई भंडार के सत्यनारायण शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी पर लगभग 300 से 400 किलो माखन (मक्खन) की बिक्री होती है। शर्मा के अनुसार आम दिनों में जहां 30 से 40 किलो मक्खन बिकता है, वहीं जन्माष्टमी पर इसकी खपत दस गुना तक बढ़ जाती है। मक्खन का रेट 540 रुपए किलो है और जन्माष्टमी पर भी इसके रेट में कोई इजाफा नहीं किया जाता है। वहीं पंजीरी का पैकेट 10 रुपए से लेकर 50,100 और 200 रुपए तक वजन के हिसाब से उपलब्ध है। ड्रायफ्रूट के प्रसाद में बाजार में काजू,बदाम,मखाने, किशमिश और मिश्री के प्रसाद के पैकेट भी उपलब्ध हैं।





