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इंदौर के पिकनिक स्पॉट पर पर्यटकों का सैलाब ….भारी बारिश से खिल उठे तिंछा फॉल व कजलीगढ़ और चोरल के नजारे

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इंदौर

इंदौर और आसपास के इलाके में स्थित झरनों वाले पिकनिक स्पॉट्स बारिश के मौसम में और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाते हैं। लेकिन भारी बारिश की वजह से प्रशासन ने 31 अगस्त तक इन जगहों पर जाने पर रोक लगा रखी है। ऐसे में वीकेंड के दिन हम आपको इंदौर के प्रतिबंधित पिकनिक स्पॉट्स का वर्चुअल टूर करा रहे हैं…

तिंछा फॉल पर दूध की तरह गिर रहा पानी
सबसे पहले हम आपको दिखाते हैं इंदौर से 20 किलोमीटर सिमरोल थाने के पास स्थित तिंछा फॉल। मेन रोड पर थाने से ठीक पहले एक रास्ता मिला, यही हमें तिंछा फॉल पहुंचाएगा। रास्ता ठीक है। लोगों का कहना है कि गाड़ी फॉल तक चली जाएगी। पैदल चलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सिमरोल से तिंछा फॉल एरिया तक पहुंचने में 30 मिनट लग गए। यहां हमें सिर्फ वन विभाग की चौकी पर ही लोग मिले। इन्होंने खुद को वन समिति और फॉरेस्ट से जुड़ा होना बताया। हमने पूछा कि यहां कोई और नहीं है क्या, तो उन्होंने कलेक्टर द्वारा लगाए प्रतिबंध का हवाला देते हुए कहा कि- 31 अगस्त तक एंट्री बंद है।

फिर हमने वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर कुछ दूर अंदर तक जाने की परमिशन ली। उन्हें बताया कि दूर से ही कुछ वीडियो बनाना चाहते हैं। इसके दो फायदे होंगे। पहला, वीडियो लोग घर बैठे देख पाएंगे। दूसरा, प्रतिबंध को लेकर किसी तरह की अफवाह नहीं फैलेगी।

परमिशन लेकर जब हम तिंछा फाल पर पहुंचे और रेलिंग के पीछे खड़े होकर जब गिरता झरना देखा तो मन बाग-बाग हो गया। तेज बारिश के बाद तो यहां की खूबसूरती और बढ़ गई है। झरने से गिरता पानी दूध जैसा नजर आ रहा है।

अब आपको ले चलते हैं कजलीगढ़ का किला…
तिंछा फॉल से हम इंदौर-खंडवा मेन रोड पर आ गए। इसमें करीब 30 मिनट लगे। सिमरोल थाने से पहले एक और रास्ता है। मालूम करने पर पता चला- ये हमें कजलीगढ़ तक पहुंचाएगा। इस रास्ते पर 5 किलोमीटर अंदर गए तो सामने वन विभाग की चौकी मिली। रास्ते पर बैरिकेड्स हैं।

ड्यूटी पर मौजूद फॉरेस्ट गार्ड बोला- यहां 31 अगस्त तक एंट्री बंद है। जिला प्रशासन का ऑर्डर है। गार्ड से दूर से कवरेज की परमिशन मांगी। उसके हां कहते ही हम आगे बढ़ गए। कुछ दूर चलते ही सामने खूबसूरत नजारा दिखा। किला और इससे कुछ ही दूर सैकड़ों साल पुराना शिव मंदिर। मंदिर करीब डेढ़ सौ फीट नीचे गहराई में है।

सामने गुलेश्वर (गुलहर) का पेड़ दिखा। इसकी जड़ें चट्‌टानों में काफी गहराई तक हैं। चट्‌टानों और पत्थरों के नीचे काफी गहराई में शिवलिंग और त्रिशूल हैं। मंदिर को छोटा अमरनाथ भी कहते हैं। मंदिर के करीब 5 से 7 फीट दूर ही झरना बह रहा है। पानी 150 फीट नीचे गिर रहा है। झरने का नाम है- शिव खुदरा। गांववालों के मुताबिक- यह झरना बारिश में लगातार बहता रहता है।

कुछ आगे चूना भट्‌टा फॉल मिला। तिंछा फॉल की तरह ही बड़ी और खूबसूरत वादियां हैं। गांववालों के मुताबिक यहां चूने का काम होता था, इसीलिए इसका नाम चूना भट्‌टा फॉल पड़ा। यहां रेलिंग नहीं है। इस मौसम में पत्थरों पर फिसलन होने से गिरने का खतरा रहता है।

अब चलिए चोरल नदी, लोग इसे कहते हैं- चोर नदी…
इसके बाद हम 5 किमी का सफर तय कर फिर इंदौर-खंडवा मेन रोड पर आ गए। खंडवा की ओर 22 किलोमीटर आगे बढ़े। रोड किनारे जगह-जगह भुट्‌टे की दुकानें लगी हैं, हालांकि फिलहाल भीड़ कम है। वजह- पिकनिक स्पॉट पर लगा प्रतिबंध है। हम नदी तक तो पहुंच गए लेकिन रास्ता बैरिकेड्स से बंद था। नदी तक जाने का यही एक रास्ता है। हमने दूर से ही कवरेज करने का फैसला किया। सामने जो नजारा दिखा, वो दिल को बेहद सुकून पहुंचाने वाला था। वहां सिर्फ कुछ मछुआरे मछली पकड़ते दिखे।

कालाकुंड: इस मौसम में यहां जाने की रिस्क न लें
शाम के 5 बज रहे हैं। चोरल से ही हमने इंदौर लौटने के लिए कच्चा रास्ता पकड़ा। बाइग्राम से आगे दो रास्ते हैं- इंदौर और महू जाने के लिए। 2 किलोमीटर चलकर काला कुंड के कच्चे रास्ते पर पहुंचे। इंदौर आने के लिए ये शॉर्टकट रास्ता है, लेकिन बारिश में काफी खराब हो गया है। वन विभाग ने यहां भी बैरिकेड्स लगाकर गार्ड्स तैनात किए हैं।

सुरक्षा गार्ड ने बताया- जिला प्रशासन के आदेश पर 31 अगस्त तक एंट्री बंद है। वैसे कालाकुंड इंदौर से 35 किमी दूर है। पहाड़ियों से घिरा हुआ है। कालाकुंड-पातालपानी और आसपास के पर्यटन स्थल के लिए हेरिटेज ट्रेन सबसे बेहतर विकल्प है।

Ramswaroop Mantri

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