अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

 राष्ट्रीय ध्वज में पॉलिस्टर की छूट के बाद मोदी का गांधी – खादी का जाप दिखावा

Share

रीवा । देश के स्वतंत्रता अमृत महोत्सव वर्ष मनाए जाने के दौरान मोदी सरकार के द्वारा 11 अगस्त से लेकर 17 अगस्त तक मनाए गए स्वतंत्रता सप्ताह पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने एक संशोधित आदेश के जरिए खादी के अलावा पॉलिस्टर के इस्तेमाल की छूट उपलब्ध करा दी गई थी। इस बात को लेकर समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा कि यह आदेश संवैधानिक व्यवस्था को तिलांजलि देकर जारी किया गया था । इस दौरान करोड़ों की संख्या में पॉलिस्टर से बने राष्ट्रीय तिरंगे झंडे बेंचे गए । जिसके चलते स्वदेशी खादी आंदोलन को गहरा आघात लगा है । प्रधानमंत्री मोदी में यदि सच्चा खादी प्रेम होता तो निश्चित रूप से सभी देशवासियों को राष्ट्रीय ध्वज खादी में उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई जाती। 

श्री खरे ने कहा कि देश के आजादी के आंदोलन में 9 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व है । सन 1942 में इसी दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई थी और देश के लोग आजादी के लिए करो या मरो के महामंत्र पर आंदोलित थे। खादी आंदोलन ने स्वदेशी की भावना मजबूत बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन को गति प्रदान की थी। इधर आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के दौरान मध्य प्रदेश के रीवा में समाजवादी जन परिषद ,नारी चेतना मंच एवं विंध्यांचल जन आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में स्वतंत्रता सप्ताह 9 अगस्त से 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए अनेक घरों पर खादी के राष्ट्रीय तिरंगा ध्वज फहराए गए।

समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा कि यह काफी आपत्तिजनक बात है कि आजादी के अमृत महोत्सव मनाते समय मोदी सरकार ने ऐतिहासिक तारीख 9 अगस्त और खादी की अनदेखी की। इधर गुजरात के साबरमती में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी फरमाते हैं कि ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी कुछ पल चरखे पर सूत कातने मिला । खादी के एक धागे ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया । खादी के राष्ट्रीय झंडे फहराने में पॉलिस्टर को छूट देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इधर खादी का जाप कर रहे हैं । यही उनका दोहरा चरित्र है । ऐसा लगता है कि उनके गृह प्रदेश गुजरात में कुछ महीने बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को लुभाने गांधी और खादी का प्रचार उनकी चुनावी रणनीति का एक हिस्सा है । आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान स्वतंत्रता दिवस पर खादी के महत्व को घटाने वाले प्रधानमंत्री मोदी का इधर खादी जाप मुंह में राम , बगल में छुरी की कहावत को चरितार्थ कर रहा है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गांधी और खादी जाप दोहरे चरित्र के साथ महज चुनावी दिखावा है । श्री खरे ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश को आजादी दिलाने सत्य अहिंसा के साथ-साथ स्वदेशी आंदोलन को गति प्रदान की थी जिसके चलते चरखा राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक चिन्ह बना और खादी स्वदेशी भावना का मंत्र बनी।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें